आज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसका अर्थ यह है कि उनकी सरकार इस विवाद पर फूट फोड़ रही है। नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में अपने आदर्शों और धार्मिक सहिष्णुता को लेकर एक ऐसा बयान दिया था जिसका अर्थ यह था कि वह अपने आदर्शों के प्रति निरंतर संकल्पित हैं।
नीतीश कुमार साहब की बात सुनकर मुझे बहुत खेद हो रहा है। वे हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की वजह से हमारा गर्व कर्ता थे। लेकिन अब यह देखकर आश्चर्यचकित हूं कि उनकी सरकार किस तरह फूट फोड़ रही है। मुझे लगता है कि यह एक गलत रास्ता पर चलने की संकेत हो सकता है। नीतीश जी को अपने आदर्शों और मूल्यों पर हावी रहना चाहिए, न कि उनके खिलाफ।
नीतीश कुमार की इस बयान से लगता है कि उनकी सरकार खुद ही विभाजन के मुद्दे पर फूट फोड़ रही है। जैसे ही, वह अपने आदर्शों और धार्मिक सहिष्णुता को लेकर बात कर रहे थे, उसी समय उनकी पार्टी ने अलगाववादी समूहों से मिलने और उन्हें समर्थन देने की तैयारी शुरू कर दी है। यह एक अजीब चीज है, जैसे ही वह अपने आदर्शों को लेकर बोल रहे थे, उसी समय उनका विरोधी भाग्य बन गया है। मुझे लगता है कि नीतीश कुमार ने इस बयान से बहुत गलत फैसला लिया होगा।
नीतीश कुमार का यह बयान तो देखने को मिला है... क्या उनकी सरकार वास्तव में ऐसी तरह की चाल चल रही है? पहले मैंने सुना था कि उन्होंने अपनी सरकार में धार्मिक सहिष्णुता को लेकर कई कदम उठाए हैं, लेकिन अब यह दिखाई दे रहा है कि वे फूट फोड़ने के खिलाफ भी तैयार हैं। मुझे लगता है कि उन्हें अपने बयान को सुधारना चाहिए, नहीं तो उनकी सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठेगा।
नीतीश जी का यह बयान तो जरूर सोच-समझकर दिया गया था, लेकिन सरकार के पीछे की सच्चाई कुछ और है। अगर वास्तव में वह धार्मिक सहिष्णुता के बारे में इतने गंभीर है, तो फिर उनके सरकार में ऐसे नियुक्तियां तो नहीं थी जो किसी एक समूह को अन्य लोगों से अलग कर देतीं। यह एक बड़ा खुला रहवासी है नीतीश जी, सरकार आपके बयान को कितना मानती है?
नीतीश कुमार जी का यह बयान तो बहुत बड़ा मुद्दा बन गया है । मुझे लगता है कि उनकी सरकार ने पहले ही इस मामले को लेकर अपनी स्थिति ठीक कर दी है। एक तरफ वह अपने आदर्शों और धार्मिक सहिष्णुता पर जोर दे रहे हैं, दूसरी तरफ उन्हें अपने सरकारी कामकाज में ऐसी नसीहतें करनी पड़ रही हैं जो लोगों को पसंद नहीं आतीं। तो उनके बयान से पहले भी यह साफ था कि उनकी सरकार विवाद पर फूट फोड़ने की कोशिश कर रही है।
नीतीश जी के बयान पर तो हमें कुछ सवाल उठाने चाहिए, लेकिन हर सवाल के जवाब देने का मतलब यह नहीं है कि हम उन्हें बदनाम करें। मैं समझता हूँ कि नीतीश जी की सरकार में बहुत सारे बदलाव आ रहे हैं, और लोगों को आश्चर्य हुआ होगा। लेकिन फिर भी, हमें सोच-समझकर बात करनी चाहिए, न कि तोड़-मरोड़। सरकार का एक अच्छा दिशानिर्देश बनाने में समय लगता है, और इससे पहले कि हम उसको खत्म कर दें, हमें जानना चाहिए कि इसके पीछे क्या सोच रही थी। मुझे लगता है कि नीतीश जी ने एक अच्छा विचार लिया है, लेकिन इससे पहले कि हम उसको स्वीकार करें, हमें उससे बात करनी चाहिए, समझने की कोशिश करनी चाहिए।
नीतीश कुमार जी का यह बयान मुझे थोड़ा अजीब लगा , यार जब वे बोल रहे हैं कि उनकी सरकार धार्मिक सहिष्णुता के बारे में जो दावा कर रही है वह तो थोड़ी भ्रामक लगती है। वास्तविकता यह है कि बिहार में कई जगहों पर राम-मंदिर और भगवान शिव के निर्माण पर रुकने की समस्या है, लेकिन नीतीश जी इसे हल करने के बजाय सड़कों पर फूट पड़ने दे रहे हैं। यार, मुझे लगता है कि अगर वे सचमुच अपने आदर्शों को पूरा करना चाहते हैं तो उन्हें यह समस्या को हल करने की जरूरत है।
नीतीश कुमार जी के दिलचस्प बयान सुनकर मैं थोड़ा आश्चर्यचकित हुआ। लगता है उनकी सरकार अब अपने आदर्शों और धार्मिक सहिष्णुता पर सोचने लग गई है। यह एक अच्छा कदम नहीं दिख रहा है, लगता है वे फूट फोड़ रहे हैं जिससे पूरा राज्य बुरी तरह से प्रभावित होगा। मुझे लगता है कि नीतीश कुमार जी को अपने बयान पर थोड़ा और सोचने की जरूरत है, ताकि उन्हें यह समझने का मौका मिल सके कि उनके आदर्शों की क्या सच्चाई है।
नीतीश जी का यह बयान एकदम समझ नहीं मिल रहा है। सबसे पहले, उन्हें ऐसा बयान देना चाहिए था जो सबको एकजुट करे। आज बिहार के लोगों को लगता है कि सरकार खुद भी तोड़-मचन गई है। नीतीश जी को अपने आदर्शों पर विश्वास करना चाहिए और उन्हें अपने दिल से निकालना चाहिए। लोग उनकी सरकार में आशा करते थे और अब यह आशा फाड़ गई है।
नीतीश जी के बयान में एक छोटी-छोटी चीज़ बदल गई है । उनके द्वारा उठाए गए कदम को समझने के लिए हमें उनके आदर्शों और मूल्यों को ध्यान में रखना होगा। मुझे लगता है कि नीतीश जी की सरकार की शिकायतों को कम करने के लिए कुछ बदलाव जरूरी हैं।
नीतीश कुमार जी का यह बयान सुनकर मुझे लगता है कि उनकी सरकार को एक बड़ा मौका मिल गया है। लेकिन यह भी सच है कि उनके बयान से कई लोगों को असंतुष्टता की भावना हो रही है। शायद वे अपने बयान को समझने में थक गए हैं और अब उन्हें अपने द्वारा उठाए गए दावों से खुद को बचाने की जरूरत हो। यह एक ऐसा समय है जब हमें सोच-विचार करने की जरूरत है कि हमारी सरकार क्या कर सकती है अपने बयान को सुधारने के लिए।
मुझे लगता है कि हमें अपनी सरकार को एक दूसरे की बात मानने की जरूरत है। अगर हम सभी एक ही रास्ते पर चलने की कोशिश करेंगे, तो शायद हमारे देश को और भी अच्छा बनने में मदद मिलेगी।
मुझे लगता है की इस्त्री की बात सुनकर मुझे थोड़ा उदास महसूस होता है, मेरा यह मानना है की जो भी नेता अपने आदर्शों और सहिष्णुता को लेकर बोलते हैं वो उनके प्रति सच्चाई से विश्वास करते हैं, लेकिन अगर वो फिर भी गलत बयान देते हैं तो यही समस्या होती है । बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार पर जोर पड़ना ठीक नहीं है, मेरा मानना है कि वो अपने बयान से सबकुछ बदल देने की कोशिश कर रहे हैं और यहां तक की अपनी सरकार भी इस बात में खलल देती जा रही है।
नमुना तुम बिहार के मुख्यमंत्री को कहाँ देखते हो? मैंने उसकी बहुत सारी फिल्में देखी है और वो एक अच्छा अभिनेता भी है। लेकिन अब यह तो बहुत ज्यादा गड़बड़ी हो गई है। क्या वह सचमुच अपने आदर्शों के बारे में बात कर रहा था या फिर बस एक बयान दे रहा था? और विवाद कैसे शुरू हुआ? मैं समझ नहीं पा रहा हूँ। मुझे लगता है कि मैंने तो सबकुछ गलत समझ लिया होगा।
नीतीश कुमार की बातें हमेशा विवादास्पद होती हैं । लेकिन आज उनका बयान से लगता है कि उन्होंने अपने आदर्शों और धार्मिक सहिष्णुता पर भारी दबाव डाल दिया है। अगर वे सचमुच अपने शब्दों में विश्वास करते हैं तो फिर उनके बयान के पीछे क्या सच्चाई है? क्या वे सचमुच धार्मिक सहिष्णुता पर जोर देना चाहते हैं या फिर यह सिर्फ एक राजनीतिक गेम है? मुझे लगता है कि नीतीश कुमार को अपने बयान की पीछे की सच्चाई से खुद पर विश्वास करना चाहिए।
नीतीश कुमार जी का बयान बिल्कुल सही में नहीं आ रहा है । अगर उनकी सरकार ऐसा कदम उठा रही है तो इसका अर्थ यह है कि वे अपने खुद के आदर्शों को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। अगर वे सच में धार्मिक सहिष्णुता के प्रति निरंतर संकल्पित हैं तो उन्हें इस तरह का बयान नहीं देना चाहिए था। उनकी सरकार को अब अपने आदर्शों और कार्यों को एक साथ लाने की जरूरत है, न कि अलग-अलग बयान देने की।
क्या बात है! इस forum में तो कुछ भी नहीं चल रहा है। सब लोग अपने दिमाग में लगे हुए हैं और विचार करने के लिए समय नहीं देते। आज नीतीश कुमार जी ने सरकार में एक बड़ा कदम उठाया है लेकिन यहाँ तो कोई फर्क नहीं पड़ता। मुझे लगता है कि अगर हम अपने विचारों और वादों को साझा करने में सक्षम न होते, तो सामाजिक परिवर्तन कभी हो सकता था। लेकिन फिर भी, इस forum में तो कुछ भी नहीं होता।
नीतीश कुमार जी का यह बयान बिल्कुल सही माहौल तैयार कर देता है। लोगो की उम्मीदें अब और बढ़ गई हैं कि उनकी सरकार निरंतर संकल्पित रहेगी। लेकिन, ये सवाल उठता है कि क्या यह बयान हमेशा ही सही निकलेगा? मुझे लगता है कि नीतीश कुमार जी अपने बयान को देने से पहले अच्छी तरह से विचार कर लें, ताकि किसी भी गलतफहमी को रोका जा सके।
अरे, नीतीशजी कितने बार फूट-फोड़ में पड़ते हैं? पहले तो वे तो लोगों का सोना चुराने की ताकतदार थे, फिर वे हिंदू होने पर तो दीवाला बन जाते हैं, और अब फूट-फोड़ में पड़ते हैं? [Video of a person doing a split ]
क्यों तो हम सब सोचते हैं कि नीतीशजी को पहले से ही पार्टी छोड़नी चाहिए। [Image of a person running away from a problem ]