नेहा सिंह रात 9 बजे लखनऊ में कोतवाली पहुंचीं: दिन ढलने के कारण पुलिस ने लौटाया, गाना गाया था- चौकीदरवा कायर बा - Lucknow News

नेहा सिंह राठौर ने लखनऊ में हजरतगंज कोतवाली पहुंचीं और 2 घंटे रहीं, लेकिन पुलिस ने बिना बयान लिए ही उन्हें वापस लौटा दिया।
 
क्या तो यह खास मामला है! 🤔 नेहा सिंह राठौर जी को पुलिस ने इतनी जल्दी ही वापस कर दिया, क्या इसमें कोई छापा था? 😒 लखनऊ में हजरतगंज कोतवाली पर उनका पहुंच और वहां 2 घंटे बैठकर क्या बातें क्या फिरायी, पुलिस को इतनी जल्दी वापस करने का क्या कारण था? 🤷‍♀️ मुझे लगता है कि यह तो सरकार के खिलाफ एक छोटी सी जांच पर नज़र आती है, लेकिन पुलिस और सरकार शायद अपने दोस्तों के रिश्तों को मजबूत करने में मशगूल थीं। 🤝
 
भारत में कानून व्यवस्था तो कितनी हैरान करने वाली बातें कर सकती है 🤔... कुछ बातें तो सिर्फ़ समझने के बाद ही समझाई जा सकती हैं 🙏. नेहा सिंह राठौर के इस दौरे की वजह से यह बहुत ही आश्चर्यजनक लग रहा है कि पुलिस उन्हें बस इतना समय लेकर वापस भेज दी... ऐसा लगता है जैसे अगर वह 2 घंटे में कहीं और काम करें तो भी यही होता।
 
मुझे लगता है कि यह बहुत अजीब लगा, नेहा सिंह राठौर को वापस लौटा देने का? तो क्यों नहीं जाने की उन्हें कुछ गलत हुआ? मैं समझता हूं, पुलिस की बात करनी पड़ती है, लेकिन इतनी जल्दी से वापस लौटा देना भी अच्छा नहीं लग रहा।

मुझे लगता है तो ये गलत हुआ हो, पुलिस ने उन्हें सही तरीके से बात करनी चाहिए, शायद कुछ मुश्किलों का सामना कर रहे थे। लेकिन फिर भी, मैं समझता हूं, यह सब तो राजनीति से जुड़ा हुआ हो, निश्चित रूप से एक प्लान बनाया गया होगा।

क्या हुआ कि उन्हें वापस लौटा दिया गया, और इतनी जल्दी? शायद यहां कुछ गड़बड़ी हो गई, मुझे तो यह नहीं लगता कि नेहा सिंह राठौर को वापस लौटा देने की जरूरत थी।
 
मुझे लगता है कि यह सच्चाई बहुत ही अजीब है। नेहा सिंह राठौर जी एक ऐसी महिला हैं जो हमारे देश में कई बार विरोध और समर्थन का सामना करती रहती हैं। लेकिन आजकल की ऐसी परिस्थितियों में जब भारतीय नागरिक अपने अधिकारों के लिए खड़े होते हैं तो उन्हें आसानी से वापस भेज दिया जाता है।

मुझे लगता है कि सरकार और पुलिस की ओर से इस तरह की हरकत में बहुत ही चिंता करने की जरूरत है। नेहा सिंह राठौर जी को उनके विरोध या समर्थन के लिए कोई बयान देने की जरूरत नहीं थी, बस उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा में खड़े रहने देना चाहिए।
 
मैं तो लगता है कि यह बहुत अजीब है कि नेहा सिंह राठौर जी को उनकी पहुंच पर भी नहीं पूछा गया। मुझे लगता है कि ये देश बहुत विकास की ओर बढ़ रहा है, लेकिन अभी भी कुछ जरूरी चीजें सुधारनी बाकी हैं। पुलिस को यह तय करना चाहिए कि किस तरह के लोगों को उनकी पहुंच पर पूछताछ किया जाए। मैं समझ नहीं पाता कि ये 2 घंटे वास्तव में क्या हुए थे, नेहा सिंह राठौर जी को वापस लौटाया गया था तो फिर भी उन्हें कोई बयान देने का अवसर नहीं दिया गया।
 
क्या ये सही स्थिति है? नेहा सिंह राठौर जी को इतनी गंभीरता से मुआफी देने के बाद, उनके कार्यों को कुछ और समझने की जरूरत नहीं तो! 🤔

मुझे लगता है कि लखनऊ पुलिस ने कुछ गंभीर चिंताएं व्यक्त करने से पहले ही उन्हें बेदखल कर दिया। क्या उनके कार्यों में कोई गलतफहमी थी, या फिर बस सुरक्षा के लिए यह निर्णय लिया गया?

मुझे लगता है कि जिस मुद्दे पर वो गए, उसका समाधान ढूंढने के लिए पहले बहुत सारी बातें बोलकर देखना चाहिए था। लेकिन अब वो वापस नहीं आ सकती, और यह स्थिति विश्वसनीयता को भी टिचके रह गई है।
 
बिल्कुल सही है कि नेहा सिंह राठौर को फांसी के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन आज वह देश के एक हिस्से में जा रहीं थीं और वे बस छह घंटे रुककर वहां से चली गईं। यह तो बहुत अजीब लग रहा है कि पुलिस ने उन्हें बिना बयान लिए वापस भेज दिया। क्या ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उनकी राय में बदलाव आ गया या फिर हमारे सरकार को लगता है कि वह चुनौती लेने लगीं? यह बात जरूर होगी सुनी जानी चाहिए और देखना होगा कि आगे क्या होता है।
 
अरे, यह तो बहुत ही दिलचस्प है कि नेहा सिंह राठौर ने मुस्लिम महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण काम करने के बाद भी पुलिस ने उन्हें वापस भेज दिया। यह तो एक बड़ा सबक है कि हमारा समाज अभी भी बहुत से मुद्दों से गुजर रहा है।

मेरे अनुसार, जब हम कुछ अच्छा करने की कोशिश करते हैं, तो हमें पता चलना चाहिए कि दूसरे लोग कैसे प्रतिक्रिया करेंगे। अगर हमें ऐसा लगता है कि हमारा काम सही था, तो फिर हमें अपने मन में क्यों संदेह करना चाहिए? हमें यह सीखना चाहिए कि हमारी निष्पक्षता और नैतिकता की जाँच करनी चाहिए।

लेकिन, इस बात पर भी विचार करने योग्य है कि हमारे समाज में अभी भी बहुत सारी समस्याएं हैं। अगर हमारे देश की पुलिस और सरकार हमें सही नहीं समझ पा रही है, तो फिर यह तो हमारे लिए एक बड़ा चुनौतीपूर्ण काम है।
 
क्या जानकारी ये तो सचमुच अजीब की न? नेहा सिंह राठौर जी की प्रतिक्रिया कैसी रही, इसकी बात मैं नहीं जानता, लेकिन लगता है कि उनकी आवाज़ में वास्तविकता थी। दिल्ली और लखनऊ में तो हमेशा ऐसी ही छवियाँ चलती रहती हैं, लेकिन यह सचमुच हालातों के प्रति समझदारी की जरूरत है।
 
अरे यह तो बहुत मजेदार है... नेहा सिंह राठौर जैसी महिलाएं, हमेशा कुछ करने के लिए नहीं मिलती, फिर भी उन्हें जाने का मौका दिया जाता है। लखनऊ में हजरतगंज कोतवाली पर 2 घंटे बिताना तो अच्छा था, लेकिन पुलिस ने तो बस एक मिनट का इंतजार कर दिया। 🤦‍♀️ क्या जरूरत थी इतनी जानकारी? मुझे लगता है कि उन्हें पता नहीं था कि नेहा सिंह राठौर कौन हैं। और वो भी ऐसे समय में जब पुलिस को कुछ करने का मौका मिलता है। लेकिन बिल्कुल, फिर क्यों न? 🤷‍♀️
 
अरे, यह तो बहुत अजीब सी है कि नेहा सिंह राठौर जी की पुलिस से मुलाकात कैसे नहीं हुई ? ये तो हमारे सरकार की लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करती है। मेरा मानना ‍है कि अगर एक राजनीतिज्ञ अपने गांव-गांव जाकर लोगों से मिल रहे हैं तो ये उनकी दूरदर्शिता और जनता के साथ जुड़ने की क्षमता की बात करती है। लेकिन अगर पुलिस ने बयान नहीं लिए और उन्हें वापस भेज दिया, तो यह हमारे देश की राजनीतिक स्थिरता पर सवाल उठाता है। मेरी राय में, यह एक बड़ा मुद्दा है जिस पर सरकार को अपने जवाब देना चाहिए।
 
क्या ये पुलिस थी तो पागलपीट कर रही है? नेहा सिंह राठौर को 2 घंटे में वापस लौटवाने का क्या मकसद? परंतु यह तो देखकर बुरा लग रहा है कि पुलिस को भी अपनी बात समझने की ज़रूरत नहीं है। शायद नेहा सिंह राठौर ने कुछ ऐसा किया होगा जिससे वे चुनौती में आई हों। लेकिन फिर भी, 2 घंटे का समय इतना लंबा था, और बिना बयान लिए वापस लौटवाना यही नहीं बल्कि अजीब भी लग रहा है। क्या पुलिस ने अपने अधिकारों को साबित करने की ज़रूरत महसूस की? 🤔
 
बात करें तो नेहा सिंह राठौर की यह यात्रा क्या काम की थी, इसका पता नहीं चल पाया, लेकिन लगता है कि उनके पास कुछ ऐसा पकड़ा हुआ था जिससे उन्हें वापस आना पड़ा।

कोतवाली में रहने वाले लोगों को यह बात पसंद नहीं आएगी, लेकिन अगर उनके पास कोई सच्ची जानकारी थी तो उन्हें पता ही चलेगा कि सरकार ने उनकी मदद क्यों की है।

मुझे लगता है कि यह एक बड़ा मामला हो सकता है, और अगर पुलिस ने बहुत धैर्य रखा तो शायद उन्हें पता चल जाता कि वे किन लोगों से बात कर रहे थे।

कुछ लोगों की तरह मैं भी यह नहीं समझ सकता, क्योंकि अगर कोई सच्ची मूल्यवान जानकारी प्राप्त करता है तो उसे हमेशा अपने घर में नहीं रहना चाहिए।

मुझे लगता है कि नेहा सिंह राठौर ने बहुत अच्छा काम किया है, और अगर वास्तव में उनकी जानकारी सच्ची थी तो उन्हें सरकार की भलाई के लिए कुछ करने का मौका मिल गया।
 
ये तो सरकारी शिकायत दर्ज करने का तरीका हो गया है... नेहा सिंह राठौर जी ऐसा क्यों कर रहीं हैं? पहले लखनऊ में खुशी मनाने के बाद वापस जाने का मौका भी नहीं मिला। 2 घंटे कितना समय है? सरकार पर नज़र नहीं डालते तो फिर ये क्यों कर रहे हैं?

किसी भी समस्या को हल करने के लिए जरूरी होता है अपनी बात कहना। अगर यह एक आम समस्या है, तो मुझे लगता है कि सरकार ने इसमें सुधार करने की बात कही चाहिए। लेकिन अब तो ये खेल दिखाने जैसा है।
 
यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है! नेहा सिंह राठौर को इतनी कम समय मिला तो भी पुलिस ने खांसी भरकर उन्हें घर वापस कर दिया। लखनऊ में ऐसा कुछ नहीं होता कि कोई ऐसी महिला आ जाए और पूरी तरह से प्रदर्शन करती रहे। यह भारतीय पुलिस की ताकत को दिखाने का सवाल है।

क्या हमारी पुलिस हमेशा नेताओं की सुरक्षा के लिए तैयार रहती है, लेकिन आम आदमी को यहीं तैयार रहने का मौका नहीं मिलता। और फिर, क्यों इतनी जल्दी घर वापस कर दिया जाता है? कुछ निजी कारणों से या कोई बड़ा मुद्दा छुपाकर?

यह एक बड़ी चिंता है कि हमारी सरकार और पुलिस एकजुट होने की बजाय आम आदमी को विरोध करने पर मुकाबला करने की कोशिश कर रहे हैं।
 
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