नेहरू जी ने 'वंदे मातरम्' को राष्ट्रगीत बनाने से इनकार किया था, लेकिन यह तय है कि उन्होंने इसे अस्वीकार करने का क्या कारण था।
जिस दिन 1921 में महात्मा गांधी ने 'अल्लाहू अकबर' के शब्दों को भारतीय राष्ट्रगीत में बदलने की सिफारिश की, तब उस समय के प्रधानमंत्री डॉ. सर्वपALLI राधाकृष्णन जी ने इसे अस्वीकार कर दिया था। लेकिन गांधीजी ने कहा कि अगर 'अल्लाहू अकबर' को हटाया जाएगा, तो इसके स्थान में क्या शब्दों का चयन किया जाएगा।
इसी बीच में उन्होंने यह भी पूछा था कि अगर हम 'अल्लाहू अकबर' को हटाते हैं, तो इसके स्थान पर क्या शब्दों का उपयोग किया जाएगा, और यह किस व्यक्ति का नाम होगा।
कुछ लोग मानते हैं कि अगर गांधीजी ने इसे अस्वीकार कर दिया था, तो इसमें कोई मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव नहीं होता। लेकिन अन्य लोग मानते हैं कि इसमें मुसलमानों के खिलाफ भाषण की तरह कुछ अंतर्दृष्टि है।
आज लोकसभा में इस पर बहस चल रही है, और यह सवाल उठता है कि क्या 'वंदे मातरम्' को राष्ट्रगीत बनाया जाएगा, और इसके पीछे क्या कारण है।
जिस दिन 1921 में महात्मा गांधी ने 'अल्लाहू अकबर' के शब्दों को भारतीय राष्ट्रगीत में बदलने की सिफारिश की, तब उस समय के प्रधानमंत्री डॉ. सर्वपALLI राधाकृष्णन जी ने इसे अस्वीकार कर दिया था। लेकिन गांधीजी ने कहा कि अगर 'अल्लाहू अकबर' को हटाया जाएगा, तो इसके स्थान में क्या शब्दों का चयन किया जाएगा।
इसी बीच में उन्होंने यह भी पूछा था कि अगर हम 'अल्लाहू अकबर' को हटाते हैं, तो इसके स्थान पर क्या शब्दों का उपयोग किया जाएगा, और यह किस व्यक्ति का नाम होगा।
कुछ लोग मानते हैं कि अगर गांधीजी ने इसे अस्वीकार कर दिया था, तो इसमें कोई मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव नहीं होता। लेकिन अन्य लोग मानते हैं कि इसमें मुसलमानों के खिलाफ भाषण की तरह कुछ अंतर्दृष्टि है।
आज लोकसभा में इस पर बहस चल रही है, और यह सवाल उठता है कि क्या 'वंदे मातरम्' को राष्ट्रगीत बनाया जाएगा, और इसके पीछे क्या कारण है।