NMC Action: रियासी के श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की अनुमति रद्द, अन्य संस्थानों में भेजे जाएंगे छात्र

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने रियासी स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को तत्काल प्रभाव से अनुमति रद्द कर दी है। इस निर्णय के कारण, कॉलेज में भर्ती छात्रों को अतिरिक्त सीटों वाले जम्मू और कश्मीर के अन्य चिकित्सा संस्थानों में समायोजित कर दिया जाएगा।

इस निर्णय के पीछे बुनियादी ढांचे, नैदानिक सामग्री, शिक्षण संकाय और रेजिडेंट डॉक्टरों की कमी सहित कई शिकायतों को ध्यान में रखा गया। एनएमसी ने आदेश जारी किया है कि अनुमति पत्र कई शर्तों के अधीन था, जिनमें आवश्यक मानकों को बनाए रखना, अचानक निरीक्षण की अनुमति देना, सटीक जानकारी प्रदान करना और नवीनीकरण से पहले कमियों को दूर करना शामिल था।

इस विवाद के बारे में कई सवाल उठते हैं। क्या कॉलेज ने आवश्यक मानकों को बनाए रखने की कोशिश नहीं की? क्या अनुमति पत्र जारी करने से पहले सभी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया? और क्या एनएमसी ने अपने निर्णय में विनियमों को लागू करने के लिए उचित कदम उठाए?

इन सवालों के जवाब ढूंढने के लिए ज़रूरी है कि हम इस निर्णय से जुड़ी सभी जानकारी और तथ्यों पर विचार करें।
 
मुझे लगता है कि यह निर्णय थोड़ा अजीब है। अगर ऐसा मान लें कि शिकायतें सच्ची हैं तो एनएमसी से पूछना चाहिए कि क्यों जो शिकायतें थीं उन्हें ठीक करने के लिए पहले कुछ कर दिया गया? और अगर उन्हें विनियमों को लागू करने के लिए उचित कदम नहीं उठाए गए तो फिर एनएमसी ने सही मायने में क्या किया?

मैं समझता हूँ कि सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है और अगर कुछ नहीं ठीक हुआ तो जानबूझकर ऐसा करने पर कोई भी निर्णय नहीं लेना चाहिए। लेकिन अगर विशेषज्ञों को समस्याओं से मुकाबला करने के लिए उचित संसाधन और समर्थन नहीं दिया गया तो फिर क्या? 🤔
 
रियासी कॉलेज में शिकायतों को कम करने का दौर आ गया है 🤦‍♂️। निष्कासन की बात करते हैं लेकिन क्या विश्वविद्यालय ने अपनी कमजोरियों को सुधारने का प्रयास नहीं किया? मुझे लगता है कि ज़रूरत है कि हमें इन सभी समस्याओं पर एक्सप्लेन करें।
 
मुझे लगता है कि यह निर्णय बहुत बड़ा है, जैसे कि मैं अपने बेटे को रेलवे स्टेशन पर छोड़कर चला गया था, और अब वहां नहीं पहुंच पाया। पहले तो मुझे लगता है कि क्यों न कमियों को दूर करने के लिए समय दिया जाता? और आजकल यह सभी चिकित्सा संस्थानों पर रोक लगा देता है, जैसे कि मेरे खिलाड़ी टीम ने मैच बंद कर दिया।
 
रियासी में माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट को अनुमति रद्द करने से पहले तय कर लेना चाहिए था कि जम्मू और कश्मीर के अन्य संस्थानों में छात्रों को जानबूझकर भेजना। ये नहीं तो हमारी डिगरी का अर्थ क्या होता? 🤔

कोलेज ने कुछ साल पहले ही नई जगह खोज ली, फिर कहाँ इन सभी समस्याओं को हल करने का समय आया? 🙄
 
बिल्कुल सही, यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है। एनएमसी का कहना है कि इनमें बुनियादी ढांचे, नैदानिक सामग्री, शिक्षण संकाय और रेजिडेंट डॉक्टरों की कमी है, लेकिन यह तो सवाल उठाता है कि क्या उन्होंने इनमें सुधार करने का प्रयास नहीं किया। क्या उन्हें पता था कि कॉलेज में इतनी बड़ी कमी है?
 
मुझे लगता है कि यह निर्णय अच्छी नहीं है। कॉलेज में भर्ती छात्रों को ऐसे अन्य स्थानों में समायोजित करना बहुत मुश्किल होगा, जिसका अर्थ है कि उन्हें अपने पाठ्यक्रम और अध्ययन के संदर्भ में बड़े बदलाव का सामना करना पड़ेगा। और यह तो न केवल छात्रों की समस्या है, बल्कि इसका प्रभाव उनके भविष्य पर भी होगा।

मुझे लगता है कि एनएमसी ने अपने निर्णय में बहुत कमजोर सिद्धांतों को लागू किया। जैसे कि कॉलेज में भर्ती छात्रों की तुलना अन्य स्थानों से करना उचित नहीं है। और यह तो एनएमसी के निर्णय पर भी सवाल उठाता है कि वे अपने नियमों को कैसे बनाए रखने की कोशिश कर रहे थे।
 
क्या यह सच में नियंत्रण की कमी हो गई? राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने ऐसे निर्णय लेने की कैसे अनुमति दी जो पूरे सिस्टम को खतरे में डाल देता है? 🤔

कॉलेज में भर्ती छात्रों को समायोजित करने के लिए क्या यह सही तरीका है? क्या उन्हें एक बार फिर से परीक्षा लेने की ज़रूरत है? और क्या इससे उनके भविष्य में कोई फर्क पड़ेगा? 🤷‍♂️

नियमों को लागू करने के लिए एनएमसी ने क्या किया? शिकायतों पर ध्यान नहीं देने से यह निर्णय लेना उचित है? इसके पीछे कौन सी व्यवस्था हुई है जिससे ऐसा हो सका?
 
ਉੱਥੇ ਦੀ ਰਿਪੋਰਟ ਦੀ ਸुनੋ... 🤔 ਏनएमसी ने रियासी स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को तत्काल प्रभाव से अनुमति रद्द कर दी है, ਜੋ ਕਿ ਇਸ ਦੀ ज़ाहिरा कमी थी। 🚨

ਮुझे लगता ਹै कि यہ निर्णय वास्तव में छात्रों के लिए अच्छा हो सकता ہے, ਜिन्हें जम्मू और کشمیر कے अन्य چिकित्सا संस्थानوں میں تعینات کیا جाएगा। 📚

लेकिन ਏनएमसी ने ਕैसے ان سولوشنز کو سمجھا? 🤷‍♂️ ان्हوں نے چالانہ اور شائقین کی بھی کیا جگہ؟ 😬

ਮुझے یہ خواہش ہے کہ وہ اس پر ایک نیا نظر دھار کرن، جیسا کہ ان سولوشنز کو بھی برتر بنانے کی کوشش کریں، تاکہ ان्हوں نے پہلے کی طرح کمزوریوں پر धیان نہ دیا ہو۔ 💡
 
मुझे ये निर्णय बहुत दुखद लगा 🤕, मेरा ख्याल है कि एनएमसी ने बिल्कुल सही नहीं किया। हमें लगता है कि श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस में कुछ गलत हुआ है, लेकिन तत्काल प्रभाव से अनुमति रद्द करना बहुत ज़ोरदार है। मुझे लगता है कि उन्होंने आवश्यक मानकों को बनाए रखने की कोशिश नहीं की, और शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया। 🤔

ज़रूर, हमें इन सवालों के जवाब ढूंढने के लिए ज़रूरत है। मुझे लगता है कि एनएमसी ने अपने निर्णय में विनियमों को लागू करने के लिए उचित कदम नहीं उठाए। हमें जानना चाहिए कि उन्होंने यह क्या देखा था, और क्या वे सुनिश्चित कर सकते हैं कि ऐसी बातें कभी फिर नहीं होंगी। 🤝
 
बिल्कुल माने दें... तो यह निर्णय क्या है? एनएमसी ने शायद तय किया है कि कश्मीर में चिकित्सा संस्थानों की स्थिति बेहतर होनी चाहिए। लेकिन इससे पहले कि हम इसे सही ठहराएं, हमें यह जानने की जरूरत है कि क्या यह निर्णय सचमुच सुधार लाएगा या फिर और भी बड़ी समस्याओं को जन्म देगा। क्या जम्मू और कश्मीर के अन्य चिकित्सा संस्थानों में भर्ती छात्रों को अच्छी शिक्षा मिलेगी? क्या वे अपने अध्ययन के लिए सही परिस्थितियां पा सकेंगे। तो यह निर्णय शायद एक सुधार है, लेकिन इसके पीछे कुछ महत्वपूर्ण सवाल हैं जिनके जवाब ढूंढने की जरूरत है। 🤔
 
मुझे लगता है कि यह निर्णय सचमुच चिंताजनक है। मैंने अपने दोस्तों और परिवार को बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें पता नहीं था। मुझे यह सुनकर बहुत आश्चर्य हुआ कि कॉलेज की नियमित जाँच और सुधार में इतनी कमी क्यों आई। मैं समझता हूँ कि कई चीज़ें हो सकती हैं, लेकिन लगता है कि एनएमसी ने बहुत महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान नहीं दिया। मुझे लगता है कि हमें इन सवालों के जवाब ढूंढने की जरूरत है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ऐसी गलतियाँ न हों। 🤔
 
सब्बी, यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है। एनएमसी का यह फैसला तो अच्छा लगता है, लेकिन इसके पीछे क्या तर्क थे, इस बात को समझने से पहले हमें विशेष रूप से जांच करनी चाहिए। क्या ये सारी समस्याएं समाधान में नहीं आईं? अगर हाँ, तो फिर क्यों निलंबित किया गया?

मुझे लगता है कि यह देखना होगा कि एनएमसी ने अपने फैसले से पहले पूरी तरह से जांच की थी या नहीं। अगर ऐसा मामला है, तो इसके लिए हमें जवाब देने की जरूरत है।
 
रियासी स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को निलंबित करने की बात तो बहुत ही चिंताजनक है। मुझे लगता है कि एनएमसी ने अच्छे से विचार करके इस निर्णय लिया होगा, लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि छात्रों को जानबूझकर फंसाया नहीं गया है। कॉलेज में भर्ती छात्रों को समायोजित करने का तरीका तो अच्छा है, लेकिन इसके पीछे क्या वास्तविकता है? क्या एनएमसी ने कॉलेज से बातचीत नहीं की? मुझे लगता है कि हमें इस विवाद के पीछे की सच्चाई ढूंढनी चाहिए।
 
स्कूलों में चाय बनाने वाले बूढ़ों को भी ये समझना चाहिए कि इंजीनियरिंग डिग्री वाले लोगों को भी पढ़ाई में कमी महसूस होती है 🤔

और यह तो बहुत ही दुखद है कि एक स्थानीय संस्थान को अनुमति रद्द करके उन्हें अपना भविष्य नुकसान पा रहा है। शायद अगर एनएमसी ने पहले इन सभी मुद्दों पर ध्यान दिया होता, तो यह सब न होता 🤷‍♂️

कौन जानता है कि इन चिकित्सा संस्थानों में पढ़ाई करने वाले छात्रों की भविष्य कैसी रहेगी। ये एक बड़ी गलती हो सकती है, और इसके लिए एनएमसी पर ज्यादा से ज्यादा जवाबदेही होगी 🤯
 
मैं समझ नहीं पा रहा कि एनएमसी इतनी जल्दी एक ऐसी संस्थान को बंद कर दिया। उन्हें पहले तो कमियों को ठीक करने का मौका देना चाहिए था, फिर निर्णय लेना चाहिए था। लेकिन यह तो निर्णय लेते ही कॉलेज में भर्ती छात्रों को स्थानांतरित कर दिया गया है। यह तो बहुत ही असहज होगा उनके लिए।
 
मुझे लगता है कि ये निर्णय अच्छा नहीं है। मेरे दोस्त के भाई का बच्चा उस चिकित्सा कॉलेज में पढ़ रहा था, और अब वह कहाँ जाएगा? मैं समझता हूँ कि ढांचे की कमी, शिक्षकों की कमी, नैदानिक सामग्री की कमी... लेकिन तो क्या सरकार ने इससे पहले उनकी बात सुनी? मुझे लगता है कि अनुमति पत्र जारी करने से पहले उन्होंने पूरी चीज़ पर विचार नहीं किया। और अब, कॉलेज के छात्रों को दूसरे जगह जाना पड़ेगा, यह अच्छा नहीं है।
 
कुछ दिन पहले मैंने एनएमसी का यह निर्णय पढ़ा था, तो मुझे लगा कि शायद कोई गलतफहमी है कि जैसे साथ ही बहुत बड़े चिकित्सा संस्थानों को अपने आप मजबूत नहीं बनाने दिया गया। तो अब जब हम इस बारे में और चर्चा कर रहे हैं तो यह सवाल उठता है कि क्या इससे जुड़े सभी चिकित्सा संस्थानों को मजबूत न बनाने दिया गया।
 
🤔 यह तो बहुत दिलचस्प है राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को तत्काल प्रभाव से अनुमति रद्द कर देने की घोषणा। 📊 अगर हम चिकित्सा संस्थानों में भर्ती छात्रों की संख्या को देखें, तो यह 2025 में 1.2 लाख से 1.3 लाख तक पहुंच गया है। 🚑 इसके अलावा, चिकित्सा संस्थानों में भर्ती छात्रों की संख्या में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए, हमें यह देखने की जरूरत है कि अनुमति पत्र जारी करने से पहले सभी शिकायतों पर ध्यान किया गया था या नहीं। 📈
 
Back
Top