नहीं होगा सत्ता परिवर्तन, मेरे पिता पांच साल तक रहेंगे मुख्यमंत्री- कर्नाटक सीएम सिद्धारमैया के बेटे का एलान

कर्नाटक में नई सरकार बनाने की बातों को देखते हुए कांग्रेस के नए नेतृत्व पर सवाल उठते हैं। पार्टी के कई नेता सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं पर चिंतित हैं क्योंकि यह कहने में नहीं आता है कि कौन नया मुख्यमंत्री बनेगा।

इस बीच, प्रियंक खड़गे ने अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा है कि उनके चाचा मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करेंगे। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया में बयानबाजी से स्थिति और उलझती है।

वहीं, पूरे राजनीतिक दलों ने नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर नारेबाजी किए जाने पर ध्यान आकर्षित किया। इसके बावजूद, आधिकारिक स्तर पर नेतृत्व परिवर्तन की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
 
मुझे लगता है कि मीडिया को अपना काम करना चाहिए थोड़ा जिम्मेदारी, लेकिन अब देख रहा हूँ कि बोल-बालात्मक बयानबाजी से अधिक चर्चा होती है।
 
मुझे लगता है 🤔 कि नई सरकार बनाने के लिए सबसे ज्यादा चिंतित तो युवा वोटर्स होंगे। उन्हें लगता है कि सत्ता परिवर्तन से क्या बदलेगा। क्या नया मुख्यमंत्री उनके समस्याओं का समाधान कर पाएगा? 🤞

मैंने एक छोटी सी डाईगर्म बनाई है जो इस मुद्दे को दर्शाती है :

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| युवा | चिंतित | भविष्य
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मुझे लगता है कि हमें नये नेताओं से दूर नहीं जाना चाहिए, बल्कि उनकी योजनाओं और विचारों से जुड़ना चाहिए। 🤝
 
बिल्कुल मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि क्यों नया मुख्यमंत्री चुनने की बातें इतनी मुश्किल से निकलती हैं। क्योंकि हर दिन नई खबरें चलती रहती हैं और लोग ज्यादा परेशान होते हैं। मुझे लगता है कि अगर पार्टी के नेताओं ने खुलकर बात की, तो समस्या आसान हो जाती।
 
नई सरकार बनाने की बातें तो हमेशा ही होती रहती हैं लेकिन सच्चाई यह है कि जिन नेताओं ने सोचा था कि वे आगे बढ़ेंगे, अब उनके पीछे सीटों की लड़ाई में खो जाने का डर है। 🤔 प्रियंक खड़गे की बातें अच्छी हैं, लेकिन इसके पीछे क्या रणनीति है? और मीडिया पर बयानबाजी से इतना स्थिति को उलझा देने का क्या काम? 📰

मुझे लगता है कि अगर नए नेतृत्व आटे में चुककर तैयार नहीं होते, तो फिर भी पार्टियों के नाम से आगे बढ़ना कुछ नहीं है। इसके लिए सच्चाई और समर्पण की जरूरत है, न कि बस बयानबाजी। 💪
 
क्या तो यह बातें थोड़ी देर में आयी हैं। नया मुख्यमंत्री तय करने के लिए एक पूरा प्रक्रिया चलनी चाहिए, न कि बस बयानबाजी। राहुल गांधी जी और मल्लिकार्जुन खड़गे जी को वाकई जरूरत पड़ने पर तैयार रहना चाहिए। मीडिया में इतना बयानबाज़ी करना भी सही नहीं है। स्थिति को समझने की जरूरत है, न कि बस लोगों को दिखाने की।
 
कर्नाटक में नई सरकार बनाने की बातों पर यह देखकर वास्तव में क्या फायदा होगा, यह सोचते समय मुझे लगता है कि प्रियंक खड़गे ने सही कहा, लेकिन यह भी सच है कि नेतृत्व परिवर्तन हमेशा आसान नहीं होता 🤔
 
अरे भाई, ये तो सचमुच अजीब स्थिति है... नई सरकार बनाने की बातें करते हुए कांग्रेस के नए नेतृत्व पर सवाल उठते हैं तो यह समझ नहीं आ रहा कि कौन नया मुख्यमंत्री बनेगा। प्रियंक खड़गे जी की बातों सुनकर लगता है कि उनके चाचा मल्लिकार्जुन और राहुल गांधी जी जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करेंगे, लेकिन यह तो देखना ही होगा। मीडिया में बयानबाजी से स्थिति और उलझती है, हमें ध्यान रखना चाहिए...
 
मुझे लगता है कि भारतीय राजनीति में नेताओं को अपने फैसलों और बयानों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए 🤔। प्रियंक खड़गे की बातें अच्छी हैं, लेकिन उसके चाचा मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को नेतृत्व करने में सक्षम होने की उनकी स्थिति को देखकर मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ है। 🤷‍♂️
 
मुझे लगता है कि सत्ता परिवर्तन की बातें दो पक्षों में ही गर्माहट बढ़ा रही हैं 🤔। लेकिन अगर हम इस मामले से निपटने की कोशिश करें, तो शायद हमें यह समझना चाहिए कि नई सरकार बनाने से पहले पूरी प्रक्रिया हुई होती है, जिसमें कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जाते हैं। प्रियंक खड़गे ने भी सही कहा है कि मीडिया में बयानबाजी से स्थिति और उलझती है। हमें यह समझना चाहिए कि राजनीतिक दलों के बीच संवाद करने का तरीका भी बदल जाता है, लेकिन इस पर खुलकर चर्चा करना हमेशा अच्छा नहीं लगता। 🙏
 
मुझे लगता है कि नई सरकार बनाने की बातें लोगों को बहुत पसंद आती हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि सत्ता में बदलाव करने से पहले खुद को अच्छी तरह तैयार करना जरूरी है। प्रियंक खड़गे जी ने भी कहा है कि उनके चाचा मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को नेतृत्व में रखने की जरूरत है, लेकिन इसके लिए बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। पार्टी के नेताओं को अपने विचारों को एक साथ लाने और एक दिशा तय करने में समय लग सकता है, इसलिए उन्हें धैर्य रखना चाहिए।

मुझे लगता है कि मीडिया की भूमिका यहां बहुत महत्वपूर्ण है। वे लोगों को सच्चाई बताने में मदद कर सकते हैं और उन्हें सही निर्णय लेने में मदद कर सकते हैं। लेकिन मीडिया में बयानबाजी से कुछ भी नहीं बदला जा सकता।
 
क्या सचमुच नया मुख्यमंत्री तय होने में इतना समय लग रहा है? 🤔 मुझे लगता है कि अगर कांग्रेस के नेताओं को खुद पर विश्वास करने का मौका मिल जाए, तो शायद सब ठीक हो जाएगा। लेकिन इतनी बातें क्यों करते हैं? 🤷‍♂️ पार्टी के नेताओं को अपने दिल से सही फैसला करने का मौका देना चाहिए, नहीं तो सबकुछ उलझ जाएगा। 🙅‍♂️ और यह सवाल भी उठता है कि क्या नया मुख्यमंत्री बनने से पार्टी की छवि अच्छी होगी? मुझे लगता है नहीं, क्योंकि सबकुछ खुलकर हो जाएगा। 🤷‍♂️
 
ਆਖिर ਕੰਨੜ ਵਿੱਚ ਹੀ ਸੋਚਣਾ ਪਏ, ਤਾਂ ਮੈਨੂੰ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਕਿ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸਮਝਣ ਦੀ ਲੋੜ ਹੈ। ਇਹ ਨਵੀਂ ਸਰਕਾਰ ਬਣਨ ਦੀ ਗੱਲ 'ਤੇ ਕੁਝ ਖ਼ਿਆਲ ਮੈਨੂੰ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ।
 
मैंने मात्र 3 दिन पहले अपने गाँव के मंदिर में जाने का फैसला किया था। वहां एक छोटी सी झील थी जहाँ प्यारे पैरों के बच्चे खेल रहे थे। तभी ने देखा, वाह! वहीं एक बूढ़ा आदमी बिना किसी कमरे की जरूरत के अपने कागज़ और पेन से चित्रकारी कर रहा था। मुझने उससे पूछा कि आप इतने बड़े चित्र बनाने कैसे करते हैं? उसने मुझसे कहा, "मेरे दोस्त, कल्पना से कुछ भी संभव है।" फिर वो लोगों को अपने चित्र खींचते हुए बैठने के लिए कह दिया। वहाँ से मैं बहुत प्रभावित महसूस किया।
 
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