Op Sagar Bandhu: IAF ने जर्मनी-यूके सहित कई देशों के लोगों को चक्रवात से निकाला; तेज रेस्क्यू से बढ़ी उम्मीदें

सुरक्षित निकाले गए भारतीय और विदेशी यात्रियों की संख्या बढ़ गई, अब तक तीन लोग मारे गए।

दिल्ली, नई दिल्ली, मुंबई, वडोदरा, पुणे, चेन्नई, कोलंबो आदि शहरों में आपदा प्रबंधन केंद्र स्थापित किए गए हैं। श्रीलंका ने आपातकाल की घोषणा कर दी है, इसके चलते वहाँ पर सभी बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सुविधाएं बंद कर दी गई हैं| श्रीलंका के 323 भारतीय वापस लाए गए, श्रीलंका में से मरने वालों की संख्या 334 हुई। भारत ने चक्रवात दित्वाह से प्रभावित श्रीलंका की मदद के लिए इस अभियान शुरू किया है|
 
मुझे लगता है कि सरकार की तेजी से कार्रवाई करनी चाहिए। दिल्ली और अन्य शहरों में आपदा प्रबंधन केंद्र लगाना एक अच्छा फैसला है, लेकिन वो बहुत जल्दी से तैयार होना चाहिए। 3 लोगों की मौत भी हुई, यह बहुत दुखद है। सरकार को श्रीलंका में मदद करने के लिए अपनी सभी सीमाओं पर विशेष जांच करनी चाहिए, ताकि और कोई गिरोह नहीं अंदर आ सके। 🚨💪
 
मुझे बहुत दुख हो रहा है यह जानकारी, तीन निर्दोष लोगों की जान गई। सरकार के पास आपातकाल में तैयार रहने के लिए से अच्छी रणनीति नहीं होनी चाहिए, अब श्रीलंका को भारतीय मदद की जरूरत है। भारत की मदद ने अभी तक 323 लोगों को बचाया है और श्रीलंका में मरने वालों की संख्या कम हो रही है, लेकिन अभी भी बहुत सारे सवाल हैं। चेन्नई, दिल्ली, नई दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में आपदा प्रबंधन केंद्र लगाने से पहले ये विचार नहीं थे, अब यह जरूरी है।
 
अरे यार, यह तो बहुत बड़ा आपदा हुआ है! मेरे भाई, देश-विदेश से आने वालों की संख्या बढ़ गई है, लेकिन फिर भी तीन लोग मारे गए। यह तो बहुत ही दुखद बात है। पूरे देश में आपदा प्रबंधन केंद्र लगाए गए हैं, जो अच्छा सोच है कि सरकार जल्दी से कुछ किया और लोगों की मदद की।

श्रीलंका में यह तो बहुत बड़ा आपदा हुआ है, वहाँ पर सभी बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सुविधाएं बंद कर दी गई हैं। लेकिन भारत ने उसकी मदद के लिए इस अभियान शुरू किया है, जो अच्छा सोच है। मुझे लगता है कि हमें देशभर में आपदा प्रबंधन के बारे में और अधिक जागरूकता फैलानी चाहिए ताकि लोगों को जल्दी से मदद मिल सके।
 
मैंने जो देखा वो बहुत दुखद है। यह तो एक बड़ा आपदा हुआ। हमारी सरकार ने जल्द से जल्द मदद पहुंचाई होगी। लेकिन अभी भी तीन लोग मर गए, ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है 🤕

श्रीलंका में क्या घटी वो हमें पता नहीं है। सरकार ने आपदा प्रबंधन केंद्र स्थापित कर दिए हैं और श्रीलंका की मदद करने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि जल्द ही सभी को बाहर निकाला जाएगा।
 
भारतीय समाज में हमेशा से आपदाओं के समय मानवता और सहायता की भावना रही है, लेकिन लगता है कि अब यह परिवर्तन आ गया है। देखें, श्रीलंका में मरने वालों की संख्या जितनी बढ़ गई, वही उतनी ही बड़ी सहायता और सुरक्षित निकास की संख्या भी बढ़ गई। यह एक अच्छी बात है, लेकिन इसके पीछे कुछ और मायने भी हो सकते हैं जिन्हें हमें समझना चाहिए।

चूँकि तीन लोग मारे गए, इसलिए अभी कुछ सवाल उठने चाहिए। सुरक्षित निकास की संख्या बढ़ गई, लेकिन यह कैसे हुआ? इसमें दोष या अनियमितताएं कोई थीं? और मरने वालों की संख्या इतनी अधिक क्यों? इन सवालों का जवाब मिले, तभी हम समझ पाएंगे कि यह परिवर्तन किस तरीके से हुआ।
 
चक्रवात की तैयारी में लोगों को बहुत परेशान कर रहा है, 3 लोगों की मौत हुई, और अब सुरक्षित निकाले गए भारतीय और विदेशी यात्रियों की संख्या बढ़ गई। श्रीलंका में ऐसा बहुत ही दर्दनाक दृश्य हो रहा है, वहाँ पर लोग अपने पैसे और सामान खोने के साथ-साथ अपने परिवारों से विदाई करने को मजबूर हैं। भारत ने मदद करने की बात कही, लेकिन ऐसा तो तो शायद ही करेगा, श्रीलंका में इतनी बड़ी आपदा है कि यहाँ पर जान जान का खेल हो गया है।
 
बहुत बड़ा दुख हो रहा है🤕, तीन लोगों की जान चली गई और अब तक कई अन्य भारतीय विदेशी यात्री सुरक्षित निकाले गए। मुझे लगता है कि सरकार ने सही कदम उठाए हैं, आपदा प्रबंधन केंद्रों को शुरू करना एक अच्छा फैसला था। लेकिन अभी भी बहुत सारे सवाल हैं, जैसे कि चक्रवात दित्वाह के बाद क्या होगा, सभी बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सुविधाएं फिर से खुलेंगे या नहीं। श्रीलंका में बहुत ज्यादा परेशानी हो रही है, लेकिन भारत ने उनकी मदद के लिए अच्छा काम कर रहा है। चिंता की बात यह है कि आगे क्या होगा, जल्द से जल्द सभी जानकारी मिलें ताकि हम समझ सकें कि आगे क्या होगा। 🤞
 
मुझे बहुत दुख हो रहा है यह आपदा में शहीद हुए लोगों की, खासकर भारतीय यात्रियों की। मैं चाहूंगा की तेजी से मदद और आपदा प्रबंधन की व्यवस्था सुचारू रूप से चले। हम सब को इस दुखद समय में एक दूसरे सहयोग करें ताकि ज्यादा लोग शहीद न हों।
 
बात जो हो रही है वो बहुत बड़ी आपदा है! मेरी राय में सरकार की तेजी से काम करनी चाहिए ताकि लोगों को जल्दी से मदद मिल सके। मुझे लगता है कि श्रीलंका में पानी और खाने की कमी बहुत बड़ी समस्या बन गई है, इसके बाद भी देश में तेजी से लोगों को वापस बुलाया गया है।
 
क्या यह सुनिश्चित है कि हमारे पास एक अच्छी इंटरनेट कनेक्शन है? मैंने तो अभी-अभी कुछ देर तक फोरम पर टाइप करने की कोशिश की लेकिन टाइपराइटर बिल्कुल ने चला नहीं गया। और फिर भी, हमारी पुरानी समस्या फिर से शुरू हो गई। क्या कभी कोई इसे देखेगा? 🤦‍♂️

और तो एक चीज़... यह आपदा प्रबंधन केंद्र क्यों नहीं थम जाएगा? हमें लगातार अपडेट मिलना चाहिए, लेकिन फिर भी, यह सब बहुत धीमी गति से चलता है। और फोरम पर टिप्पणियां भी बिल्कुल नीचे की ओर नहीं जा रही हैं। 📊
 
ਚिंਤਾ ਹੀ ਪੈ ਰਿਹਾ ਕਿ ਸ਼ਿੰਗੋ ਅਤੇ ਦਿੱਤਵਾ ਲਾਏ ਵਜੋਂ ਚਲੀ ਆਈ, ਹੁਣ ਉਨ੍ਹਾਂ ਸਭੀ ਵਿੰਗਾਂ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਵੱਲ ਆ ਗਏ ਅਤੇ ਆਪਣੀਆਂ ਪਰਿਵਾਰਾਂ ਨੂੰ ਭेज ਦੇ ਰਹੇ ਹਨ... ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਜੀਵਨ ਵਿੱਚ ਗੁਜ਼ਾਰੀਆਂ ਕਰਦੇ ਥਾਈਆਂ ਅਤੇ ਹਸਤੀਆਂ ਦੇ ਨਾਲ, ਮੈਂ ਯਾਦ ਕਰਦਾ ਹਾਂ...
 
बहुत बड़ा झटका लगा तो देश को, चाहे हमारे बीच भारतीय या विदेशी कोई भी, सुरक्षित निकाल कर लिया गया, तो अभी तक मौत की 3 लोग हुए हैं... यह बहुत बड़ा झटका लगा तो दिल्ली, नई दिल्ली, मुंबई, वडोदरा, पुणे, चेन्नई, कोलंबो आदि शहरों में आपदा प्रबंधन केंद्र स्थापित हुए हैं। श्रीलंका ने भी आपातकाल की घोषणा कर दी है, तो वहाँ पर सभी बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सुविधाएं बंद कर दी गई हैं | लेकिन भारत ने श्रीलंका की मदद करने के लिए इस अभियान शुरू किया है, तो 323 भारतीय वापस लाए गए, श्रीलंका में से मरने वालों की संख्या 334 हुई।
 
😕 यह तो बहुत बड़ी आपदा हुई, लोगों की जान जोखिम में पड़ गई। चाहे वो भारतीय हों या विदेशी, तो इस दुखद समय में हम सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। मैंने पिछले दिनों दिल्ली में तयारी के लिए जाने वाले लोगों की संख्या देखी, और अब यह सुनकर चिंतित हो गया हूँ। 🤕 श्रीलंका में कुछ नहीं बचने वाला, बस एक-दूसरे पर भरोसा करना ही बचेगा।
 
मैं समझता हूँ कि सरकार कैसे त्वरित कदम उठाती है जब आपदा होती है 🌪️। यह अच्छी बात है कि भारतीय और विदेशी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। लेकिन 3 लोग मरने की बात तो बहुत दुखद है, चाहे वह श्रीलंकाई हों या भारतीय। मुझे लगता है कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियाँ जैसे आपदा प्रबंधन केंद्रों की स्थापना करने से पहले इन लोगों को वापस बुलाने का प्रयास कर सकती थीं। श्रीलंका में भी यह अच्छा है कि सरकार ने आपातकाल की घोषणा कर दी है, ताकि वहाँ की सार्वजनिक सुविधाएं बंद न जाएं।
 
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