मेरी बात तो यह है कि पंडित होने का मतलब केवल इतना ही न्हीं है। हमारे देश में जिस भी व्यक्ति को शिक्षा, संस्कृति, और ख्याल-खोज का गहरा अर्थ है, वह पंडित कहलाया जाता है। लेकिन अब तो लोग इस शब्द पर बहुत अधिक ध्यान दे रहे हैं और कुछ व्यक्तियों को इसी आधार पर पहचाना जा रहा है।
मेरे ख्याल में अगर कोई ऐसा व्यक्ति है जो स्वतंत्र सोच, समाज सेवा और शिक्षा में योगदान देता है, तो उसे पंडित कहलाना चाहिए। लेकिन फिर भी हमें यह सोचना चाहिए कि इस शब्द को कैसे समझा जाए और इसका सही अर्थ निकाला जाए।
मैं ये तो मानता हूँ कि शिक्षा, संस्कृति, और समाज सेवा के लिए हमें पंडित होना चाहिए, परंतु यह शब्द अब एक प्रतीक नहीं बन गया है।