पाकिस्तानी आतंकियों से लड़ेंगी जम्मू की अनीता-सोनाली: विलेज डिफेंस गार्ड एक्टिव, गश्त और फायरिंग की ट्रेनिंग दे रही सेना

जम्मू-कश्मीर में विलेज डिफेंस गार्ड्स (वीडीजी), पाकिस्तानी आतंकियों से लड़ने का नया तरीका बनता हुआ दिख रहा है। जम्मू-कश्मीर की पहाड़ी इलाकों में रहने वाली महिलाएं भी आतंकवादियों के खिलाफ लड़ रही हैं। इन महिलाओं ने पहली बार ऑटोमैटिक हथियार चलाना सीखा है, और गश्त करने की ट्रेनिंग ली है।
 
बहुत ही दिलचस्प बात यह है कि जम्मू-कश्मीर में महिलाएं आतंकवादियों के खिलाफ भी लड़ रही हैं। पहले तो हमने सिर्फ पुरुष पुलिस और सैनिक देखे, लेकिन अब यह साबित हुआ है कि महिलाएं भी अपना योगदान देने में सक्षम हैं। वीडीजी ने इन महिलाओं को ऑटोमैटिक हथियार चलाना और गश्त करने की ट्रेनिंग दी, तो अब यह साबित हुआ है कि अगर हम अपनी महिलाओं को सही तरीके से प्रशिक्षित करें, तो वे भी आतंकवादियों के खिलाफ लड़ने में सक्षम हो सकती हैं।
 
मुझे ये किसी भी तरह से आश्चर्यजनक नहीं लगता, जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों का खतरा हमेशा रहा है, और अब महिलाएं भी इस लड़ाई में शामिल हो रही हैं! 🤝

मुझे पता है कि पाकिस्तान से आते वाले आतंकवादियों ने हमारी देश की सीमाओं पर बहुत ही खतरनाक हमले किए हैं, लेकिन अब भारतीय सरकार और सैन्य बलों ने इस लड़ाई में एक नया तरीका अपनाया है, जो आतंकवादियों को रोकने में मदद करेगी।

लक्ष्मी वालांड, जो पहले भारतीय महिला सैनिक थीं, अब जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ लड़ने वाली एक नयी टीम बनाई हुई है! 🚀

आपको लगता है कि यह योजना कितनी प्रभावी होगी, अगर जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकवादियों से लड़ने वाली महिलाएं और वीडीजी टीम दोनों एक साथ मिलकर काम करेंगे तो? 🤔
 
अरे, ये बहुत ही रोचक बात है कि जम्मू-कश्मीर में महिलाएं आतंकवादियों से लड़ने का तरीका बन रही हैं 🤩। पहली बार ऑटोमैटिक हथियार चलाना सीखना और गश्त करने की ट्रेनिंग लेना यह बहुत ही प्रेरक है। हमें उम्मीद है कि ये महिलाएं आतंकवाद के खिलाफ लड़ने में सफल होंगी। और देखें, जम्मू-कश्मीर की पहाड़ी इलाकों में रहने वाली महिलाएं अब आतंकवादियों से लड़ने के लिए तैयार हो गई हैं 🚀। हमें उम्मीद है कि ये महिलाएं भारत की आज़ादी के लिए लड़ने में सफल होंगी।
 
जम्मू-कश्मीर में कुछ ऐसा देखने को मिल रहा है जिससे हमें खुशी होती है। वीडीजी नामक एक गार्ड बनकर वहां की रहने वाली महिलाएं आतंकवादियों से लड़ने का तरीका सीख रही हैं। यह बहुत अच्छी बात है कि उन्हें ऑटोमैटिक हथियार चलाना और गश्त करने की शिक्षा मिल रही है। इससे हमें उम्मीद है कि वहां की सुरक्षा बढ़ेगी।
 
नई जम्मू-कश्मीर की योजना अच्छी लगी, तो फिर से आतंकवादियों से लड़ने का तरीका बदल गया। लेकिन ज्यादा देर तक चल नहीं पाया, आतंकवादी अभी भी जम्मू-कश्मीर में खाली उंगली नहीं छोड़ते। लेकिन फिर भी, यह सोचा गया कि महिलाएं भी हथियार उठाकर आतंकवादियों के खिलाफ लड़ सकती हैं। तो उन्हें बुलाया गया और ऑटोमैटिक हथियार चलाने की प्रशिक्षण देने का कोर्स कराया। अब उनकी भी अपनी जवानी में आ गई, लेकिन उम्मीद है कि आतंकवादी अभी तक गिर नहीं जाएंगे।
 
कश्मीर में महिलाएं आतंकवादियों से लड़ने की तैयारी कर रही हैं... यह तो बहुत ही रोचक है 🤔 क्या हमारे देश में आज भी ऐसी कई महिलाएं हैं जो अपने घरों की सुरक्षा के लिए आगे आ रही हैं? वीडीजी से लेकर ऑटोमैटिक हथियार चलाने तक, उन्हें सबकुछ सीखने के लिए तैयार हैं। यह हमारी महिलाओं की शक्ति और साहस को दिखाता है। लेकिन एक सवाल उठता है... क्या हमारी सरकार ने उनकी मदद करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए? क्या यह जरूरी है कि महिलाएं हमेशा लड़ें और हथियार चलाएं? मुझे लगता है कि हमें अपनी महिलाओं को सुरक्षित रखने के लिए एक अलग तरीका ढूंढना चाहिए... शायद हमें उनकी जरूरतों को समझना और उन्हें सही तरीके से मदद करनी चाहिए। 🤷‍♂️
 
बहुत अच्छी बात है कि जम्मू-कश्मीर में महिलाएं भी आतंकवादियों के खिलाफ लड़ रही हैं। यह बहुत ही प्रेरणादायक है कि वे ऑटोमैटिक हथियार चलाना सीख गई हैं और गश्त करने की ट्रेनिंग ली है। मुझे लगता है कि सरकार ने इस तरह की योजनाएं शुरू करनी चाहिए ताकि हमारे देश में हर किसी को सुरक्षित महसूस हो।
 
वीडीजी जैसी चीजें तो हमेशा से मौजूद हैं, लेकिन आतंकवाद के समय विशेष रूप से जरूरी लगती हैं... ये लड़कियाँ और लड़के ऐसी कई कोशिशों के बाद इनसानी जीवन में इतने खुंखार बनते हैं, तो फिर क्या करें? हमें उन्हें यह महसूस करने देना चाहिए कि उनका योगदान कितना महत्वपूर्ण है, और हमें उनकी सुरक्षा को लेकर खुश होना चाहिए।
 
🤔 यह तो बहुत ही दिलचस्प बात है कि जम्मू-कश्मीर में महिलाएं भी आतंकवादियों से लड़ने के लिए सीख रही हैं। पिछले दिनों की तरह अब यह तो एक सम्मानजनक और सकारात्मक दिशा में बदलाव आया है। लेकिन, मुझे लगता है कि हमें अपनी खुद की सुरक्षा के लिए अधिक प्रयास करने चाहिए। वीडीजी को भी उनके कर्तव्य के अनुसार स्थापित और समर्थन देने की जरूरत है। इसके अलावा, हमें अपने समाज में आतंकवाद के खिलाफ लड़ने वालों को और भी अधिक प्रोत्साहित करना चाहिए। 🙏
 
वीडीजी देखकर तो बहुत ही खुश हुआ, ये वास्तव में हमारे जवानों की भावना को दिख रहे हैं। लेकिन इसके पीछे जो महिलाएं हैं उन्हें भी हमें सीखने को कहीं खुशी नहीं होगी। यहाँ तो हमें यह सीखने को मिलता है कि शिक्षा और कौशल किसी भी उम्र में दूसरों को सिखाया जा सकता है। यानी अगर हमारे पास इतनी शक्ति है, तो हम अपने परिवार, समाज और देश के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हो सकते हैं।
 
जम्मू-कश्मीर में वीडीजी की बहुत बड़ी जरूरत है, हमारे देश में आतंकवाद की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए इन महिलाओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होगी। ये महिलाएं अपने गाँवों और आसपास के इलाकों में आतंकवादियों को रोकने में मदद कर सकती हैं और सामुदायिक सुरक्षा बढ़ा सकती हैं।

ऐसे ही पाकिस्तानी आतंकियों से लड़ने का नया तरीका वीडीजी बन रहा है। लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि इन महिलाओं को भी सुरक्षा और समर्थन की जरूरत है, ताकि वे अपने काम में सफल हों।
 
ਪाकिस्तानी आतंकवादी जैसੇ ਮੋਢਿਆਂ ਨਾਲ ਜੰਗ ਕਰਨ ਵਾਲੀਆਂ ਅਤੇ ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਸਹਿਯੋਗੀ ਚੌਧਰੀਆਂ, ਜੋ ਬਹੁਤ ਕੁੱਝ ਲਵਾਉਣ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਵਾਲੀਆਂ ਸਨ, ਇਨ੍ਹਾਂ ਅਜਿਹੀਆਂ ਬੱਚਿਆਂ ਦਾ ਕਰੀਬ ਤੋਂ ਕਦੇ ਵੀ ਸਮਝਿਆ ਨਹੀਂ ਜਾਣਦਾ।
 
कुछ गलत होने पर हमेशा थोड़ी सी बुद्धिमत्ता और साहस से लड़ना चाहिए। ये महिलाएं आतंकवादियों के खिलाफ अपने गांव की रक्षा करने के लिए जो संघर्ष कर रही हैं, वह एक बहुत बड़ी बात है। हमें यह समझना चाहिए कि लड़ने का तरीका यौन भेदभाव से भरा नहीं होता। आजकल महिलाएं कई कामों में पूर्ण रूप से सक्षम बन गई हैं। और अगर वे अपने गांव की रक्षा करने के लिए ऐसी ही बुद्धिमत्ता दिखाती हैं तो यह एक बहुत बड़ा सबक है।
 
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