पुलिसकर्मी पिता का शव देख बेटी बेहोश: 11 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि; 4 पुलिसकर्मियों को गार्ड ऑफ ऑनर, एक्सीडेंट में हुई थी डेथ - Morena News

मुरैना में हुए पुलिसकर्मियों की त्रासदी: पिता का शव देख पुलिसकर्मी पिता की पत्नी बेहोश, बेटे ने दी मुखाग्नि

पुलिसकर्मियों की गाड़ी सामने से टकराकर विनाशकारी हादसा में जान गंवाई। उनके पार्थिव शरीर आज मुरैना लौटाए गए, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। हादसे में जान गंवाने वाले चार पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी गई।

हादसे में जान गंवाने वाले मुरैना पुलिस के चार जवान अनिल कौरव, विनोद शर्मा, परिमाल सिंह तोमर और राजीव चौहान थे। उनमें से अनिल कौरव को 11 साल का बेटा ने मुखाग्नि दी, जबकि विनोद शर्मा को 13 साल का बेटा ने मुखाग्नि दी।

पुलिसकर्मियों की गाड़ी में सवार डॉग पूरी तरह सुरक्षित था। हादसे में जान गंवाने वाले चार पुलिसकर्मियों को अंतिम संस्कार से पहले गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

पुलिसकर्मियों की पत्नियां उनके शव से लिपटकर रो पड़ीं। उनकी बहनें भी बिलख उठी। हादसे में जान गंवाने वाले परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

हादसे के बाद पुलिसकर्मियों के परिजनों ने अपने परिवार के साथ फूटी हुई परेशानियों को बताया। उनकी पत्नियां और बच्चे भी रोने लगे।

पुलिसकर्मियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल आरक्षक राजीव चौहान को सागर से एयरलिफ्ट कर दिल्ली भेजा गया है।

पुलिसकर्मियों के अंतिम संस्कार के मिनट-टु-मिनट अपडेट के लिए नीचे दिए गए ब्लॉग से गुजर जाइए।
 
मुरैना में हुए पुलिसकर्मियों की त्रासदी को देख कर बहुत दुख हुआ 🤕 मेरा दिल तो टूट गया है उन्हें कैसे मौत हो गई, यह तो समझ नहीं आ रहा है। पुलिसकर्मियों के परिजनों को यह जानकर शोक में पड़ गई। उनकी पत्नियां और बच्चे भी रोने लगे। यह तो बहुत दुखद है 🙏
 
अरे, यह तो बहुत दुखद है... पुलिसकर्मियों की त्रासदी, भारतीय सेना के जवानों की इस तरह मरना कैसे सहना जा सकता है? 🤕 पिता की शव से पत्नी बेहोश, बेटा ने मुखाग्नि दी, यह तो सबकुछ बहुत दर्दनाक है।

मुरैना में हुए इस हादसे में कौन सी गलती थी? इसके पीछे क्या कारण था? ये सवाल हमें सोचने पर मजबूर करते हैं।
 
ये तो बहुत दुखद खबर है… पुलिसकर्मियों की इतनी विनाशकारी हादसे में जान गई, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मैं सोचता हूं कि उनके बच्चे तो कैसे करेंगे? अंतिम संस्कार के समय परिजनों की दुखद स्थिति देखकर मुझे बहुत दर्द हुआ। 🙏🌹
 
🤕 यह तो बहुत दुखद, पुलिसकर्मियों की जान जानी गई और उनके परिवार का भी बहुत नुकसान हुआ। मुझे लगता है कि सरकार को इस हादसे की जांच करनी चाहिए और अगर कोई लापरवाही हुई तो उसे दूर करना चाहिए। इसके अलावा, पुलिसकर्मियों की पत्नियों और बच्चों को भी सहारा देना चाहिए, उनके लिए यह बहुत मुश्किल समय है। 🙏
 
मुरैना की इस त्रासदी पर मेरी दिल को छू लेने वाली आंसू बहाने हैं! 🤕🚔 पुलिसकर्मियों की जान जान गंवाने से देशभर में शोक मनाने का समय आया है। यह त्रासदी न तो राजनीति की है और न ही आर्थिक समस्या 🤑, बल्कि यह पुलिसकर्मियों की बहादुरी और बलिदान की कहानी है। मैं इन चार जवानों के परिवार के लिए श्रद्धांजलि देना चाहता हूं। उनकी पत्नियों, बच्चों और परिजनों को यह त्रासदी से गुजरने में मेरी नमस्कार है! 🙏 मैं उन्हें सबकुछ करने का सहयोग करूंगा, जिससे उनके परिवार को आर्थिक रूप से मदद मिल सके। #पुलिसकर्मियोंकोश्रद्धांजलि #त्रासदी #बहादुरी #नमस्कार
 
मुरैना में पुलिसकर्मियों की त्रासदी बहुत ही दुखद है। मेरे मन में क्या यह ऐसा हो सकता है? जान जानकर भारी रोने लगा। पुलिसकर्मी निर्दोष होते हैं और उनकी जान मुरैना में इतनी आसानी से ली गई। पुलिसकर्मियों की पत्नियां व उनके बच्चे तो बेहोश, भाग गए, लेकिन बच्चे ने अपने पिता की मुखाग्नि दी।

मेरे गले में से रोने लगे। मुरैना जैसे हाल में कभी नहीं सुना। मैं आशा करता हूं कि शहीद पुलिसकर्मियों को शांति मिलेगी।
 
मुझे यह सुनकर बहुत दर्द हुआ 🤕, पुलिसकर्मियों की ये त्रासदी कैसे हो सकती थी, उनके परिवार को इतना दुःख क्यों मिला। डॉग की बात करने पर मुझे यह सोचने को मजबूर हुआ कि अगर ऐसी जगहें बनाई जाएं जहां सवारी केवल डॉग्स के लिए है, तो इससे हमारे नागरिकों की जान बचने में मदद मिल सकती थी। मैं इस दुःख से शहीद हुए पुलिसकर्मियों और उनके परिवार के लिए श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।
 
સ્વાગત કરનાર આ હદેસમાં એજન્ટોના શવો લાવવા પછી અનુભવવામાં આવે છે. આ રીતે કયારેય સંભવતા ઘટનાઓ એજન્ટોના પરિવાર અને લોકોને મુશ્કેલતમાં ધીમે ધીમે પહોચવા પડે છે.
 
मुरैना में हुए पुलिसकर्मियों की त्रासदी बहुत दुखद है। मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि ऐसा क्यों हुआ। पुलिसकर्मी जान जोखिम में रहते हैं, लेकिन जब उनकी बेटियाँ और पत्नियाँ भी उन्हें रोकने आती हैं, तो यह कैसे संभव है? 🤔

मुझे लगता है कि सरकार को यहां पर सुधार करने की जरूरत है। पुलिसकर्मियों की गाड़ी में सवार डॉग क्यों नहीं रखा गया था? ऐसे हादसों से रोकने के लिए और सुरक्षित बनने के लिए यह जरूरी होता है। 🚨

अब जो हुआ है, वो बहुत दुखद है। पुलिसकर्मियों की पत्नियाँ और बच्चे कैसे करेंगे? उनके परिवार को इतनी मुश्किलें तो न आएं। हमें उन्हें सहारा देना चाहिए और सरकार को यहां पर सुधार करने की जरूरत है। 🤗
 
😭 यह तो बहुत ही दुखद खबर है। पुलिसकर्मियों की जान जाने का मौका मुरैना में निकल गया। उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, और बच्चे भी रोने लगे। यह तो बहुत ही दुखद है कि उनके शव से उनकी पत्नियां लिपटकर रोती हैं। 🙏

मैंने पहले भी कई बार कहा था, पुलिसकาร्मियों को हमारे समाज में बहुत महत्व देने की जरूरत है। वे हमारे समाज के लिए बहुत सेवा करते हैं, और उनकी जान जाने का यह मौका बहुत ही दुखद है।

मैं आशा करता हूं कि उनके परिजनों को शांति मिलेगी, और वे जल्द ही ठीक हो जाएंगे। 🙏
 
ये तो वाकई कुछ ही नहीं हुआ, मुरैना में ऐसा हादसा... मेरे बाप की याद आ गई, जब वह सड़क पर गिर गए थे। उनके शरीर लौटने के बाद हमारे घर में भी तो रोते-रोते रहे, और चीख-चीख कर रोते भी। आज भी मैं सोचता हूं, अगर वहां था तो क्या हुआ? पुलिसकर्मियों की पत्नियां उनके शव से लिपटकर रोती रहीं, मेरी बहनों ने भी हमेशा मुझसे कहा है कि मैं रोता रहता हूं जब भी कुछ गालीपल हो...
 
🙏 यह त्रासदी बहुत दुखद है, मुझे लगता है कि हमारे पुलिसकर्मियों को हमेशा हमारे समाज की रक्षा और सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले होते हैं। उनकी बहादुरी और बलिदान हमेशा याद रखें।

मैं इस घटना पर शोक में हूं। यह दृश्य पुलिसकर्मियों को देने वाले मुखाग्नि की बात सुनकर भावुक हुआ। अगर कोई बच्चा अपने पिता की मौत को समझ नहीं सकता, तो कैसे उन्हें इस विश्वास कराना चाहिए?
 
शवों की गाड़ी में और भी कई परिवार हैं जो इसी तरह से दर्द से भरे रहेंगे। परिवार का एक पेड़ तोड़ना, एक घर खोना, एक पिता मरना... यह सब एक दिन में हो सकता है। हमारे युवाओं की जान, उनकी जिंदगी, सभी मायनों में बर्बाद हो रही है।
 
मुरैना पुलिसकर्मियों की यह त्रासदी बहुत दुखद है। मैं समझता हूँ कि पुलिसकर्मी अपने परिवारों को भी अपनी जान दे सकते हैं। मेरा एक सवाल है कि क्या उनकी गाड़ी में सवार डॉग को बचाया गया था या नहीं। अगर हाँ, तो इसका कारण क्या था? क्या यह डॉग के साथ ही वे पुलिसकर्मी अपने परिवारों को भी बचा सकते थे।
 
मुरैना में हुए पुलिसकर्मियों की त्रासदी बहुत दुखद है 🤕। मेरे विचार में, यह घटना न केवल पुलिसकर्मियों के परिवार को बल्कि सामाजिक मानसिकता को भी प्रभावित कर रही है। हमें एक बार फिर सोचने की जरूरत है कि हम अपने समाज में शहीद हुए वीर जवानों को कैसे सम्मान देते हैं और उनके परिवार का साथ कैसे करें। पुलिसकर्मियों की गाड़ी में सवार डॉग को जानबूझकर टाला गया था, इससे यह बहुत स्पष्ट होता है कि हमें अपने नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
 
बेटे की मुखाग्नि देना तो अच्छा है, परन्तु पुलिसकर्मियों की मरना भी नहीं चाहिए। यार, याद आ रहा है 90 के दशक में, जब हमारे जवान बिना सुरक्षा उपकरण के फायरिंग करते थे, अब यह तो कितना बदल गया है। पुलिसकर्मियों की गाड़ी में डॉग रखकर सवारी करना एक अच्छा रिटर्न देना है, लेकिन मरने के लिए नहीं। और उनकी पत्नियों को शव से लिपटकर रोना तो बहुत ही बुरा हाल है। मुझे याद आ रहा है 90 के दशक में जब हमारे जवान अपने परिवारों के साथ रहते थे, अब यह तो कितना बदल गया है।
 
मुरैना की यह त्रासदी एक अजीब सी दर्दनाक याद है ... पुलिसकर्मियों की मौत ने उन्हें नहीं पता था कि उनके बच्चों को इतना दर्द होगा। मैंने भी अपने छोटे भाई की त्रासदी से भयंकार याद है जब वह 5वां पंजाब से 10वीं कक्षा में था, उसकी गाड़ी सामने से टकराकर जान गंवाई थी। उसकी पत्नी उस दिन बेहोश हो गई थी, और उसके बच्चे अभ भी उसकी याद में रोते रहते हैं ... ऐसा ही यहाँ पुलिसकर्मियों के परिजनों ने बताया है... 🙏
 
अरे, ये तो बहुत दुखद है... पुलिसकर्मियों की त्रासदी की नई खबर सुनकर मैं चिंतित हुआ हूँ... मेरा भाई एक पुलिसकर्मी है, और वह हमेशा सुरक्षित रहे हैं। लेकिन ये तो सोचा नहीं जा सकता था कि उनकी बहन का बेटा कैसे मुखाग्नि देगा।

मैंने इस दुनिया में कई ऐसे लोगों को देखा है जो हमेशा दूसरों की मदद करते रहते हैं। और इन पुलिसकर्मियों ने भी अपने नौकरी से दूसरों की सेवा करने के लिए तैयार रहे। यह बहुत दुखद है।

मैं उनकी श्रद्धांजलि के लिए नमन हूँ। मैं पुलिसकर्मियों को हमेशा अपनी जान डालने के लिए तैयार रहने की बुराई नहीं समझ सकता।
 
नहीं तो ऐसा हुआ है, भाई, नहीं तो ऐसा हुआ है... पुलिसकर्मियों की जान जानलेकिन याद आती है जब हमारी देशभर में सुरक्षा के लिए तैनात जवान की बहादुरी की कहानियां सुनाई जाती थीं। आज भी जब उनकी पिता पत्नी और बेटे ने अपने परिजनों को उनके शव देखने को, तब याद आता है कि हमारा यह जवान इतना बहादुर था कि उसके बच्चे तो गाड़ी सामने से टकराकर जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों की मुखाग्नि कर देते थे।

मैंने ही याद है जब मेरी बहन का शव हमारे घर में आ गया था, और वह तो एक छोटी लड़की थी। लेकिन पुलिसकर्मियों की बहादुरी से हमारी सुरक्षा बढ़ गई। यह बहुत ही दुखद घटना है, और मेरी नमस्कार है जानवरों को, विशेष रूप से सवारी कर रहे डॉग को। उन्हें भी दुख हुआ होगा।

अब पुलिसकर्मियों के परिजन अपने परिवार के साथ बहुत परेशानी में हैं। उनकी पत्नी और बच्चे रोने लगे, उनकी बहनें भी बिलख उठीं। यह देखकर लगता है कि हमारे पुलिसकर्मियों ने अपनी जान देने से देश को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया।
 
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