सोहराब और सलीम दोनों ही जेल में सजा काट रहे हैं और उनकी क्राइम हिस्ट्री बहुत लंबी है। सोहराब ने एक ज्वैलरी शोरूम में लूट और हत्या की थी। दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। सलीम और उसके भाई रुस्तम और सलीम की मौत हो गई, उनके पोते मोहम्मद जैद शकील की हत्या भी की गई थी।
ये बात तो मजाक नहीं है, सोहराब और सलीम दोनों की सजा तो चोरी-छपाई के मामले में लंबी है, क्योंकि उनके पूरे परिवार की जिंदगी अपराधिक थी। रुस्तम भाई की मौत सुनकर मुझे बहुत दुःख हुआ, वह तो एक अच्छा लड़का था। और अब सलीम के पोते की हत्या की बात सुनकर मेरा मन निश्चिंत हो गया। ये जेल में सजा लेने वाले दोनों को अपने अपराधों के लिए सजा भी चुकानी चाहिए, लेकिन यह भी सच है कि उन्हें लगता है कि जेल से बाहर निकलना आसान है।
जेल की खिड़की से निकलने वाले सोहराब और सलीम दोनों तो फिर से अपनी बात चुपके से बोल रहे हैं... जेल में! कोई ऐसा ख़ूनखोज़ी भाई नहीं होता जो एकदम से लूटपाट न करे। और सलीम, तुम्हारी क्राइम हिस्ट्री इतनी लंबी है कि तुम्हारे लिए जेल की खिड़की से निकलना ही नहीं होगा, बल्कि तुम्हें पुनर्वास विभाग की भी देखभाल करनी होगी। और मोहम्मद जैद शकील, उसकी हत्या कौन कर सकता था? यह तो सलीम के ख़िलाफ़ एक बड़ा बहाना बन गया है।
ये दोनों केस बहुत गंभीर हैं और लोगों को चिंतित कर रहे हैं। सोहराब की ज्वैलरी शोरूम में लूट और हत्या की बात सुनकर मुझे डर लगा कि कैसे ऐसी बहुत बड़ी अपराधिया हमारे समाज में फैलते हैं? सलीम और उसके भाई रुस्तम की मौत की वजह से लोगों ने उनकी हत्या की बात उठानी शुरू कर दी है जो बहुत दुखद है। उनके पोते मोहम्मद जैद शकील की हत्या भी एक बड़ा झटका था और अब जब सलीम जेल में सजा काट रहे हैं तो सोहराब को भी जल्द से जल्द गिरफ्तार कर लेना चाहिए। हमें याद रखना चाहिए कि अपराधियों को जमानत नहीं देनी चाहिए और उन्हें सजा पूरी करने का मौका नहीं देना चाहिए।
मुझे लगता है कि दोनों को सजा देना ठीक है, लेकिन हमें सोचना चाहिए कि क्या सजा करने वाले न्यायालय में भी कोई गड़बड़ी हो सकती है। जेल में सजा काटने वालों की देखभाल कैसे होती है, यह नहीं तो उन्हें और खलासा कर दिया जाता।
सोहराब और सलीम की जेल में सजा काटने की बात सुनकर मुझे लगता है कि उनकी अपराधी गतिविधियों पर रोक लगाने की जरूरत है। दिल्ली पुलिस ने सोहराब को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन सलीम और उसके भाईयों की हत्याओं की जांच अभी भी जारी है। यह तो बहुत बड़ा मामला है और हमें उम्मीद है कि न्याय प्रणाली अच्छी तरह से इसकी जांच करेगी।
जेल से बाहर निकलने का कोई संदेह नहीं है, बस सोहराब और सलीम के खिलाफ मामलों को देखें। उनकी सजा काट रहे हैं तो यह अच्छी बात है लेकिन क्राइम हिस्ट्री बहुत लंबी है। ज्वैलरी शोरूम में लूट और हत्या, यह तो बहुत बड़ा अपराध है। और सलीम और उसके भाई की मौत, और उनके पोते की हत्या... ये सब कुछ खत्म नहीं हुआ। फिर भी, जेल से बाहर निकलने वालों को एक नया जीवन शुरू करने की उम्मीद कर सकते हैं। लेकिन यह तो आसान नहीं है।
जेल में सजा काटने वाले लोगों से हमें सीखने की जरूरत है कि खुद पर नियंत्रण करें और अपने जीवन को सही दिशा में ले जाने का प्रयास करें। दोनों के ज्वैलरी शोरूम में हुआ दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने हमें सोचने पर मजबूर किया है कि आत्महत्या कैसे एक परिवार को नुकसान पहुंचाती है। सलीम और उसके भाई की मौत एक बड़ा झटका लगा, लेकिन उनके पोते की हत्या से बहुत दर्द हुआ। इससे हमें यह सीखने का मौका मिलता है कि आत्महत्या और विरोधाभासी जीवनशैली से हमारे परिवार को नुकसान पहुंचाती है।
मैं समझ नहीं पाया कि दोनों को फिर से सजा मिलेगी? पहले तो सलीम और उसके भाई रुस्तम को मौत हो गई, अब मोहम्मद जैद शकील की बेटियाँ उनकी हत्या के लिए मुकदमे में दाखिल होंगी। सबकुछ कैसे होता है? मैं सोचता हूँ कि अगर वह चाहते थे तो बस गायब भी हो जाते।
सोहराब और सलीम दोनों की सजा काट रहे हैं लेकिन यह बात नहीं रहेगी कि उनकी अपराध की कहानी बहुत जटिल है। सोहराब ने लूट-फोड़ में शामिल होकर एक ज्वैलरी शोरूम को बर्बाद कर दिया था, फिर उस पर हत्या का आरोप लगा। दिल्ली पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी में बातचीत की। अब सलीम और उसके भाई रुस्तम की कहानी सुनकर तो ज्यादा सहन नहीं हो सकता, उनकी हत्या हुई थी, फिर उनके पोते को भी मार दिया गया। इसके बाद सलीम पर कई आरोप लगाए गए, जैसे स्ट्रिप क्लब में शामिल होना और एक पुलिसकर्मी से सुर्खियों में आ जाना। यह तो सब कुछ सही नहीं है।
मुझे सोहराब और सलीम की कहानी बहुत दुखद लग रही है । दोनों ने अपने जीवन में बहुत गलतियाँ की हैं और अब वे सजा काट रहे हैं। लेकिन मेरा सवाल यह है कि उनकी हत्याओं से हमें कुछ सीखने को मिलता है? या फिर वे बस दोषी पाए गए थे जो सजा काट रहे हैं?
मुझे लगता है कि हमें अपने समाज में अपराध की समस्या से निपटने के लिए एक नई रणनीति बनानी होगी। सरकार को और हमारे द्वारा भी कुछ करने की जरूरत है। सोहराब और सलीम की कहानी हमें याद दिलाती है कि अपराध की समस्या बहुत जटिल है और इसका समाधान आसान नहीं होगा।
मुझे लगता है कि जेल में सजा काटने वाले लोगों की बात करने से पहले हमें उनके अपराधों को समझने की जरूरत है। सोहराब और सलीम दोनों की हत्या की कहानी बहुत दर्दनाक है, मगर इसके पीछे कुछ गहराई भी हो सकती है जिसे हम नहीं समझ पाते। शायद वे अपने परिवारों को बचाने के लिए ऐसे कदम उठाए थे। और सलीम की हत्या की बात करने से पहले उसके भाई रुस्तम की कहानी सुनने की जरूरत है, वह एक शांतिपूर्ण व्यक्ति था, मगर अपने परिवार को बचाने के लिए जानबूझकर ऐसा कुछ नहीं करना चाहता। इसके अलावा हमें यह भी सोचना चाहिए कि जेल में सजा काट रहे लोगों को वापस जीवन में आने के लिए क्या सहारा दिया जा सकता है, ताकि वे अपने परिवारों और समाज को फिर से एक महत्वपूर्ण स्थान दिला सकें।
सोहराब और सलीम दोनों को सजा मिली तो अच्छा है, लेकिन उन्हें अपने अपराधों के बारे में सोचते समय एक बात याद रखनी चाहिए कि उनकी क्राइम हिस्ट्री बहुत लंबी है और वह दोनों ने अपने परिवार को भी बहुत पीड़ा पहुंचाई है। मुझे लगता है कि अगर वे अपने जीवन को फिर से शुरू करें तो उन्हें पहले अपने अपराधों की सजा काटनी चाहिए और फिर अपने परिवार को एक अच्छा जीवन देना चाहिए।
जेल में सजा काट रहे लोगों की कहानियाँ बहुत दिलचस्प होती हैं । सोहराब और सलीम दोनों ने बहुत गलत काम किए हैं, उनकी जिंदगी कैसे हुई, इसका सवाल उठना ताजiba है। लेकिन जब हम उन्हें देखकर कहीं और नहीं डालते हैं तो हमारी सังคม में विवाद होता है । मुझे लगता है कि जेल में सजा काटने वालों को अपने खामियों के बारे में सोचने की जरूरत है, और हमारे समाज को उनकी गलतियों से सबक लेने की जरूरत है।
बिल्कुल सही! सोहराब और सलीम दोनों की अपराध की गिनती लंबी है तो फिर भी हम उन्हें बार-बार माफ करने की कोशिश नहीं कर सकते। जेल में सजा काटने का मतलब यह है कि हमें उनकी गलतियों को स्वीकार करना चाहिए और आगे क्या होगा, इस पर विचार करना चाहिए। लेकिन फिर भी, मुझे लगता है कि जेल में सजा काटने के बाद भी उन्हें एक दूसरे को नहीं रखना चाहिए। हमें अपने समाज को साफ करने और अपराधियों को रोकने के लिए काम करना चाहिए
मुझे लगता है कि सोहराब और सलीम दोनों को सज़ा देने से पहले उन्हें एक बार फिर जेल में डालना चाहिए . लेकिन फिर भी, मैंने उनकी क्राइम हिस्ट्री देखी है, वह तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। सलीम की हत्या की बात तो एकदम से दुखद है, उसके पोते की भी हत्या की गई, यह तो जान जानकर ही मन में आ गया है . लेकिन फिर भी, मैं समझता हूँ कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है, और अब वह सज़ा काट रहे हैं, जो सही है। शायद हमें उन्हें एक बार फिर से देखना चाहिए, नहीं, मैं तो ऐसा नहीं कह सकता, मेरी भाग्य कैसा है!