10 साल का बेटा पॉकेट मनी मांगता है: क्योंकि उसके दोस्तों को मिलती है, क्या इतने छोटे बच्चे को पैसे देना ठीक है?
पॉकेट मनी सिर्फ पैसे देने भर का विषय नहीं है। यह बच्चे के भीतर ईमानदारी, समझदारी और जिम्मेदारी की नींव रखने का एक जरिया भी है। लेकिन 10 साल की उम्र में पॉकेट मनी देने से ज्यादा जरूरी बच्चे को पैसों की वैल्यू समझाना है। उसे जरूरत व चाहत के फर्क से परिचित कराना है।
जब बच्चा इसे समझ लेता है, तब पॉकेट मनी उसे बिगाड़ती नहीं, बल्कि ज्यादा समझदार और मैच्योर बनाती है। यह एक जरूरी मौका है जब आप अपने बच्चे को पैसों की वैल्यू सिखाने का एक शानदार अवसर दे सकते हैं।
पॉकेट मनी सिर्फ पैसे देने भर का विषय नहीं है। यह बच्चे के भीतर ईमानदारी, समझदारी और जिम्मेदारी की नींव रखने का एक जरिया भी है। लेकिन 10 साल की उम्र में पॉकेट मनी देने से ज्यादा जरूरी बच्चे को पैसों की वैल्यू समझाना है। उसे जरूरत व चाहत के फर्क से परिचित कराना है।
जब बच्चा इसे समझ लेता है, तब पॉकेट मनी उसे बिगाड़ती नहीं, बल्कि ज्यादा समझदार और मैच्योर बनाती है। यह एक जरूरी मौका है जब आप अपने बच्चे को पैसों की वैल्यू सिखाने का एक शानदार अवसर दे सकते हैं।