पीरियड्स के सबूत मांगने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: केंद्र-हरियाणा से जवाब मांगा; जस्टिस नागरत्ना बोलीं- क्या छुट्टी देने के लिए भी सबूत मांगेंगे?

महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी का मामला, जिसमें 4 महिला कर्मचारियों से पीरियड्स का सबूत मांगने की घटना हुई थी, सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर आपराधिक मामले के रूप में देखा। जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा, "यह महिलाओं के प्रति लोगों की सोच दिखाता है। अगर उनकी गैरमौजूदगी की वजह से कोई भारी काम नहीं हो सका तो किसी और को लगाया जा सकता था।"

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार और अन्य पक्षों से जवाब मांगा, जबकि याचिका में कहा गया है कि ऐसी गाइडलाइंस बनाई जाएं जो पीरियड्स के दौरान महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान, निजता और शारीरिक स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित करें।
 
क्या ये तो हिंदुस्तान के मूल्यों पर बोल रहा है? पीरियड्स के दौरान भी महिलाओं को सम्मान की जरूरत है, नहीं तो यह देश खत्म हो जाएगा। सरकार से कोई गाइडलाइंस बनानी चाहिए, जैसे कि हर मामले में तीन पुरुषों की एक परिवार होना चाहिए तो फिर भी महिलाओं को सम्मान मिलना चाहिए। यह देखकर अच्छा लगता है कि सुप्रीम कोर्ट ने सही बात कही है, लेकिन अभी तक देश में इतनी मुश्किल क्यों हुई? 🤷‍♂️
 
मैंने जो पढ़ा है तो बहुत ही दुखद है। यूनिवर्सिटी में ऐसी घटनाएं कभी भी नहीं होनी चाहिए। महिलाओं का स्वास्थ्य, सम्मान और निजता हमेशा प्राथमिकता होना चाहिए। सरकार द्वारा ऐसे गाइडलाइंस बनाए जाने चाहिए जो हर किसी की स्वतंत्रता और सम्मान को सुनिश्चित करें। यह एक बड़ी समस्या है और हमें इस पर और भी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। मैं आशा करता हूँ कि ऐसी घटनाएं भविष्य में न होंगी।
 
जस्टिस बीवी नागरत्ना जी ने सही कहा, लेकिन यह भी सच है कि मानसिकता बदलने में समय लगta hai. ये सोच और समझ ही नहीं चल पाती, फिर क्या? हमारी सरकारों को ऐसे नियम बनाने चाहिए जो महिलाओं को उनके अधिकार देने में मदद करें। लेकिन सुनिश्चित होना चाहिए कि पूरा समाज इसका समर्थन करे। यह एक छोटी सी समस्या नहीं है, बल्कि एक बड़ी समस्या जिसे हमने हल करने की जरूरत है।
 
नरसिंह ने ये तो एक बहुत बड़ा मुद्दा है 🤯, जैसे कि हम कह रहे थे कि भारतीय शिक्षा प्रणाली में क्या गलत है। लेकिन इसकी बात करने से पहले तो हमें यह पता लगाना चाहिए कि क्या हमारी सरकार द्वारा जो नियम बनाए गए थे, वे सही थे या नहीं। और अगर उन्हें बदलने की जरूरत है तो हमें साथ में इसके लिए कोई भी प्लान बनाना चाहिए। 🤝
 
यह तो बहुत ही गंभीर मामला है... कैसे इतने जिम्मेदार व्यक्ति महिलाओं पर पीरियड्स का सबूत मांगने लगे? और सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तार करने की बात कही? 🤯

क्या हमारे समाज में यह तो बहुत ही आम बात बन गई है... महिलाओं को अपने शरीर पर जिम्मेदार ठहराया जाता है। और अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर उनकी गैरमौजूदगी की वजह से कोई भारी काम नहीं हो सका तो किसी और को लगाया जा सकता था। लेकिन यह तो बहुत ही मुश्किल होता है... क्योंकि अगर ऐसा करना होता तो पहले से ही पुरुषों को अपनी बात कह देते।

मुझे लगता है कि हमें अपने समाज में बदलाव लाने की जरूरत है। हमें महिलाओं को उनके अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए। और सरकारें भी अपने नियमों में बदलाव लानी चाहिए ताकि महिलाएं अपने स्वास्थ्य, सम्मान, निजता और शारीरिक स्वतंत्रता की रक्षा कर सकें। 💪
 
मुझे लगता है कि यह मामला तो पूरी तरह से सरकार की योजनाकल्पिकता का परिचय देता है 🤔। जैसे ही महिलाओं के अधिकारों की बात होती है, तभी उनके खिलाफ भी हिंसा और हानि की साजिशें शुरू कर दी जाती हैं। सरकार हमेशा अपने नीतियों को बदलने में रूकावट डालती रहती है। यह तो महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के प्रति भारत सरकार की दूरदर्शिता पर सवाल उठाता है 🚨
 
अरे, यह तो बहुत ज्यादा ही गंभीर मामला है 🤕। मैं समझता हूँ कि महिलाओं के प्रति ऐसी बातें करना भी ठीक नहीं होती। लेकिन, हमें थोड़ा सोच-समझकर देखना चाहिए कि यहां इतनी गंभीरता से क्यों लिया जा रहा है। शायद सरकार को और इस मामले पर ध्यान देना चाहिए। हमें तो बस यही चाहते हैं कि महिलाओं को सम्मान मिले, उनके अधिकारों की रक्षा की जाए। 🙏
 
मुझे यह घटना बहुत दुखद लगती है, जिसमें महिलाओं को अपने शरीर पर नियंत्रण नहीं मिलने देने की बात कही गई। यह एक बड़ा मुद्दा है जिस पर हमें सावधानी से विचार करना चाहिए। सरकारों और संगठनों को ऐसी गाइडलाइंस बनानी चाहिए जो महिलाओं के अधिकारों और सम्मान को बढ़ावा दें। हमें अपनी बोलचाल में भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए जो महिलाओं को शर्मिंदा कर सके। 🤦‍♀️🚫
 
मैंने तो पढ़ा है यह घटना, तो मुझे लगता है कि यह बहुत ही गंभीर समस्या है, जिसमें हमारे देश की महिलाओं का सम्मान नहीं किया गया। पीरियड्स के दौरान भी लड़कियों और महिलाओं को सम्मान मिलना चाहिए, तो फिर गाइडलाइंस बनाकर उनकी रक्षा कैसे करेंगे। मैंने तो सोचा है कि हमें अपने देश में ऐसी जगहों की खोज करनी चाहिए जहां लड़कियों और महिलाओं को अच्छा सम्मान मिले।
 
🤔 यह सुप्रीम कोर्ट की बात है तो मुझे लगता है कि जस्टिस बीवी नागरत्ना बहुत सही कह रही हैं। लेकिन मेरी राय में ऐसी दुनिया है जहां महिलाओं को अपने पीरियड्स के दौरान भी शारीरिक स्वतंत्रता मिलती है। और अगर सरकार बनाते तो उन्हें पता होना चाहिए कि लोगों की सोच बार-बार बदलती रहती है। मुझे लगता है कि याचिका में कहीं भी ऐसी गाइडलाइंस नहीं बनाई जाएंगी जो हमारी संस्कृति के खिलाफ हों। लेकिन मेरा विचार तो यही है कि सरकार और अदालतें अपने-अपने तरीके से मदद करेंगी। 🤝
 
राजकीय मामलों में ऐसे ही दृढ़ दृष्टिकोण लेना कभी अच्छा नहीं होता 🙅‍♂️, लेकिन अगर किसी महिला कर्मचारी को पीरियड्स का सबूत मांगना सही नहीं है तो फिर सोचें कि क्या देश में अभी भी पुरुषों के लिए निजता का विचार नहीं है? 🤔
 
मेरे मन में है कि सरकार को ऐसी गाइडलाइंस बनानी चाहिए जैसे कह रहे हैं। पर मुझे लगता है कि यह तभी संभव होगा जब लोगों की सोच बदलेगी। अभी तक पीरियड्स के बारे में बात करना और महिलाओं को शर्मिंदा बनाना क्यों? हमारी सरकार बहुत अच्छी है, लेकिन ऐसे मामले आ रहे हैं जो हमें सोचने पर मजबूर करते हैं।
 
Back
Top