पुतिन अपनी स्पेशल कार छोड़ पीएम मोदी के साथ बैठे: चलता-फिरता किला है पुतिन की कार, बैठे-बैठे कर सकते हैं न्यूक्लियर अटैक

रूस का नेता Vladimir Putin India aaya hai, aur mujhe lagta hai ki ye decision kuch galat nahin hai. Bharat mein economy kaafi badh gaya hai, aur China se competition hi to bahut zyaada hai. Russia ko bhi koi choice nahi hai apne economy ko save karne ke liye. Aur agar Putin India par kuch good initiatives le aa raha hai toh usse humari side se bhi kuch benefit milenge. Lekin, security protocols ka breach karne wale saare logon ko serious attitude se lena chahiye. Safety pehle se hai, aur yeh Russia ki responsibility hai. Aapke thoughts? 🤔
 
व्लादिमीर पुतिन की ऑरस सीनेट कार छोड़ने की बात में कुछ ना कुछ अजीब लगता है। तो वो अपनी नई दुनिया में आ गया और पहले से ही सभी को बताने की इच्छा कर रहा था। यहां तक कि एयरपोर्ट पर भी सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़कर बैठने की गंभीरता क्यों? चाहे वह किसी नये देश में जाना हो, या अपना निजी जीवन शुरू कर रहा हो। यहां तक कि हम भी इस दुनिया में सुरक्षित महसूस करते हैं और सिर्फ अपना समय बीताने की चिंता करते हैं।
 
वाह, ये ऐसी बड़ी बात है! पुतिन जी का भारत आना और मोदी जी के साथ एयरपोर्ट पर मिलना बहुत रोमांचक लग रहा है। मुझे लगता है कि यह एक दोस्ती और सहयोग की शुरुआत हो सकती है, जिससे हमारे देशों के बीच काम करने के अवसर बढ़ सकते हैं। तो चिंता मत करें, पुतिन जी ने सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़ने के लिए माफ़ी मांगनी चाहिए, फिर से किसी भी व्यवहार से बच गया होगा। यह एक अच्छा संकेत है कि हमारे देशों के बीच शांति और सहयोग की लहर तेज़ हो सकती है। 🤗👍
 
रूसी पुतिन क्यों भारत आ गए? कोई अच्छा कारण नहीं पता। वह हमें कैसे मदद कर सकते हैं? और कौन सी बातें उन्हें यहां लाने की जरूरत थी? मुझे लगता है कि वो कुछ गुमनाम तरीके से अपने देश की समस्याओं को हल करना चाहते थे, लेकिन हमें पता नहीं चलेगा। और एयरपोर्ट पर उनके साथ में बैठकर रवाना होने से पहले उन्होंने प्रोटोकॉल तोड़ दिया। यह बहुत अजीब है... क्या उन्हें लगता था कि वो कुछ गलत कर रहे हैं? 🤔
 
रूस की गाड़ी में बैठकर भारत आता है... यह तो एक अच्छा संदेश नहीं है 🤔। हमारे देश में ऐसे लोग आने आने लगे हैं, जो हमारी परिस्थितियों को समझने की कोशिश नहीं करते। प्रधानमंत्री से मिलना तो अच्छा है, लेकिन सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़ना बुरा है। इससे हमें यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि हमारी सुरक्षा हमारे आपसी सहयोग पर निर्भर करती है, न कि हमारी सरकार की ताकत पर 🚫
 
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