फिजिकल हेल्थ- भारत में तेजी से बढ़ रही एग फ्रीजिंग: ये क्या है, कैसे होती है, डॉक्टर से जानें हर जरूरी सवाल का जवाब

आज की महिलाएं अपनी जिंदगी की प्लानिंग कैलेंडर और डेडलाइंस के हिसाब से कर रही हैं। शरीर का बायलॉजिकल कैलेंडर इन योजनाओं से अलग चलता है, यहीं से शुरू होता है वो टकराव, जहां मन कहता है “अभी नहीं” और बॉडी चुपचाप समय गिनती रहती है। इसी गैप में एक मेडिकल ऑप्शन का सामने आया है–एग फ्रीजिंग। इसे “फर्टिलिटी का पॉज बटन” भी कहा जाता है, जिसे महिलाएं अब ज्यादा आत्मविश्वास से दबा रही हैं। पिछले एक दशक में दुनिया भर में एग फ्रीजिंग के मामलों में करीब 60% फ्रिजिंग की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अमेरिका में यह ट्रेंड और तेज है, जहां हर साल एग फ्रीजिंग साइकल्स में औसतन 20% की वृद्धि देखी जा रही है। भारत में भी तस्वीर तेजी से बदल रही है।
 
मैंने अपनी पत्नी को कभी नहीं देखा, जब वह घर पर बैठकर अपने बायोलॉजिकल कैलेंडर का ध्यान न करे। अगर मुझे पता होता तो मेरी जिंदगी पहले से अच्छी होती। 🤔

मैंने इस बात पर विचार किया है कि यहां तक कि हम अपने शारीरिक रूप को भी नियंत्रित कर लेते हैं, तो फिर जीवन कितनी स्वतंत्रता मिलती है? यह एक दिलचस्प सवाल है, लेकिन मुझे लगता है कि यह एक अच्छी बात नहीं हो सकती। अगर हम अपने शरीर को नियंत्रित करेंगे, तो फिर हम अपने जीवन को भी कहां ढूंढेंगे। 🤷‍♂️

कुछ लोगों का मानना है कि यह एक अच्छा तरीका है अपने श्रम से बचने का। लेकिन मुझे लगता है कि यह पूरी तरह से सही नहीं है। यहां तक कि अगर हम भी इसे बेचारे देवताओं से छुपाने की कोशिश करें तो? 🙏

मैं सोचता हूं कि जब तक हम अपने जीवन में एक संतुलन नहीं बनाते, तब तक हम शांत नहीं रह पाएंगे।
 
आज की महिलाएं अपनी जिंदगी को पूरी तरह से नियंत्रित करने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन शरीर को यह नहीं पता कि कब खुश है और कब गुस्सा है। तो फिर क्यों हमने एक मेडिकल ऑप्शन की जरूरत है? 😒

आगरे की गर्मियाँ आ गईं, लेकिन अपनी खाली पेट में कुछ नहीं रखा, तो क्या? एग फ्रीजिंग की बढ़ती दुनिया में मैं आश्चर्यचकित नहीं हूँ। अमेरिका में हर साल 20% की वृद्धि दर, यह एक पूरी नई यूनिट है। लेकिन जब भारत में तस्वीर बदलने लगती है, तो मुझे लगता है कि हमें अपनी खाली पेटों पर ध्यान देने की जरूरत है। 😊
 
यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारी स्त्रियाँ इतनी दबाव में हैं कि वो अपने शरीर की प्रतिक्रियाओं पर नियंत्रण नहीं कर पातीं। यह भी गलत है कि लोग कहते हैं कि एग फ्रीजिंग “फर्टिलिटी का पॉज बटन” है, जैसे कि यह हमारी सफलता की सुनिश्चितता करता है। लेकिन, हमें याद रखना चाहिए कि हर मानवीय प्रजनन प्रक्रिया अद्वितीय होती है और कभी-कभी बायोलॉजिकल कैलेंडर शरीर से अलग चल सकता है।

हमारी इस तकनीकी उन्नति से हमारी भावनात्मक और शारीरिक संतुलन पर प्रभाव पड़ता है। यह समय निर्धारित करने के बजाय, हमें अपने शरीर को समझने का मौका देना चाहिए। हमें खुद पर विश्वास रखना चाहिए और अपनी स्थिति को स्वीकार करना चाहिए।
 
एग फ्रीजिंग की बात करते समय, मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ा और जटिल विषय है। कई महिलाओं को अपने शरीर की प्लानिंग और एग फ्रीजिंग की दिशा में स्पष्टता चाहिए। जब तक अंतिम निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक इस बारे में चिंतन करना बिल्कुल सही है।
 
मैं समझता हूँ, यह नई ट्रेंड बहुत ही रोमांचक है लेकिन हमें अपनी जिंदगी को इतनी प्लान करने में न लगे कि शरीर भी खुद अपनी योजनाओं से अलग चलना शुरू कर दे। एग फ्रीजिंग की बात करते हुए, मैं यह कहूँगा कि यह एक विकल्प हो सकता है, लेकिन इसके पीछे हमें खुद को सही तरीके से तैयार करना होगा। यह एक बड़ा निर्णय है और इस पर हमें बेहद सावधान रहना चाहिए। मैं उम्मीद करता हूँ कि सभी महिलाएं अपने शरीर को जानते हुए ही इसे सोचें।
 
मुझे लगता है की यह ट्रेंड बहुत ही खतरनाक हो सकता है और महिलाओं पर बेहद दबाव डाल देता है, वो अपने बच्चों को जन्म देने के लिए तैयार नहीं होती हैं और फिर पूरा जीवन वैकल्पिक चुनाव से भर देती हैं, और सबसे बड़ी बात यह कि मानव शरीर की तरह कोई भी मशीनरी नहीं है जिस पर हम सब नियंत्रण कर सकते हैं।
 
बिल्कुल, ये ट्रेंड बहुत खतरनाक है.. हर महिला अपनी जिंदगी को कैलेंडर और डेडलाइंस के आधार पर लेकर रहेगी, तो शायद कभी अपनी पसंद-नापसंद को समझेंगी। यह एग फ्रीजिंग की बढ़ती संख्या का एक ही कारण है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इससे महिलाओं की आत्मविश्वास कम होने लगेगा और वो अपने शरीर पर नियंत्रण खोने लगेंगी।
 
मुझे लगता है कि यह ट्रेंड बहुत ही रोचक है। अगर मैं अपनी पत्नी से बात करूं तो वो बिल्कुल सहमत होंगी। वह कहती होगी, "अरे, क्यों फ्रीज न कर देती? कोई बात नहीं" लेकिन पीछे से बॉडी चुपचाप समय गिनती जा रही है। यह बहुत ही चुनौतीपूर्ण है, खासकर जब दोनों को अपने प्लानिंग में सहमत होना होता है।
 
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