आज की महिलाएं अपनी जिंदगी की प्लानिंग कैलेंडर और डेडलाइंस के हिसाब से कर रही हैं। शरीर का बायलॉजिकल कैलेंडर इन योजनाओं से अलग चलता है, यहीं से शुरू होता है वो टकराव, जहां मन कहता है “अभी नहीं” और बॉडी चुपचाप समय गिनती रहती है। इसी गैप में एक मेडिकल ऑप्शन का सामने आया है–एग फ्रीजिंग। इसे “फर्टिलिटी का पॉज बटन” भी कहा जाता है, जिसे महिलाएं अब ज्यादा आत्मविश्वास से दबा रही हैं। पिछले एक दशक में दुनिया भर में एग फ्रीजिंग के मामलों में करीब 60% फ्रिजिंग की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अमेरिका में यह ट्रेंड और तेज है, जहां हर साल एग फ्रीजिंग साइकल्स में औसतन 20% की वृद्धि देखी जा रही है। भारत में भी तस्वीर तेजी से बदल रही है।