अरे, देखो तो ये 6 दिसंबर की चुनावी दिनों में राजनीतिक संचार में वंदे मातरम् नाम का जिक्र होने लगा है। पूर्वी परिवेश में इसके क्या महत्व था? मुझे लगता है कि भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस जैसे पार्टियों के बीच इस नाम का इस्तेमाल अब शायद बहुत ही कम हो गया है। ये दिन पहले राष्ट्रवाद का महासिद्ध अंतर्दृष्टि था, लेकिन अब यह सिर्फ एक पुराने नारे की तरह जीवित नहीं है। मुझे लगता है कि हमें अपनी विविधता और सामाजिक परिवर्तनों की ओर बढ़ने की जरूरत है, न कि एक पुराने नारे को बनाए रखने की।