दिल्ली-एनसीआर में बढ़े एक्यूआई पर संसद में सवाल: क्या 20 प्रतिशत कम पराली जलाने के बावजूद वायु प्रदूषण बढ़ा है?
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने सोमवार (1 दिसंबर) को संसद में बताया कि 2022 की तुलना में 2025 में पंजाब और हरियाणा में धान कटाई के मौसम के दौरान खेतों में आग लगाए जाने की लगभग 90 प्रतिशत कम घटनाएं दर्ज की गईं हैं। पराली जलाने के प्रभावों को लेकर कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने एक प्रश्न के उत्तर में इस जानकारी दी थी।
चन्नी ने सवाल किया था कि क्या इस साल पंजाब में खेतों की आग में 20 प्रतिशत की कमी के बावजूद दिल्ली का एक यूनिट वायु गुणवत्ता सूचकांक (एयूआई) 450 को पार कर गया है? पर्यावरण मंत्री ने उत्तर देते हुए कहा कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण कई स्थानीय और क्षेत्रीय कारकों का परिणाम है, जिसमें वाहन और औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण से धूल, अपशिष्ट जलाना और मौसम संबंधी स्थितियां शामिल हैं।
साथ ही, उन्होंने कहा कि पंजाब और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पराली जलाना भी एक महत्वपूर्ण कारक है। यादव ने बताया कि 2025 में पंजाब में सबसे अधिक पराली जलाने की घटनाएं संगरूर जिले में दर्ज हुई हैं, जहां 693 घटनाएं घटीं। इसके बाद फिरोजपुर में 547 घटनाएं, मुक्तसर में 376 घटनाएं और जालंधर में 85 घटनाएं दर्ज की गईं।
इसके अलावा, पर्यावरण मंत्री ने बताया कि पंजाब और हरियाणा को फसल अवशेषों का निस्तारण करने वाली मशीनों की आपूर्ति के लिए 2018-19 से 3120 करोड़ रुपये से अधिक की राशि केंद्र द्वारा दी गई है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने सोमवार (1 दिसंबर) को संसद में बताया कि 2022 की तुलना में 2025 में पंजाब और हरियाणा में धान कटाई के मौसम के दौरान खेतों में आग लगाए जाने की लगभग 90 प्रतिशत कम घटनाएं दर्ज की गईं हैं। पराली जलाने के प्रभावों को लेकर कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने एक प्रश्न के उत्तर में इस जानकारी दी थी।
चन्नी ने सवाल किया था कि क्या इस साल पंजाब में खेतों की आग में 20 प्रतिशत की कमी के बावजूद दिल्ली का एक यूनिट वायु गुणवत्ता सूचकांक (एयूआई) 450 को पार कर गया है? पर्यावरण मंत्री ने उत्तर देते हुए कहा कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण कई स्थानीय और क्षेत्रीय कारकों का परिणाम है, जिसमें वाहन और औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण से धूल, अपशिष्ट जलाना और मौसम संबंधी स्थितियां शामिल हैं।
साथ ही, उन्होंने कहा कि पंजाब और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पराली जलाना भी एक महत्वपूर्ण कारक है। यादव ने बताया कि 2025 में पंजाब में सबसे अधिक पराली जलाने की घटनाएं संगरूर जिले में दर्ज हुई हैं, जहां 693 घटनाएं घटीं। इसके बाद फिरोजपुर में 547 घटनाएं, मुक्तसर में 376 घटनाएं और जालंधर में 85 घटनाएं दर्ज की गईं।
इसके अलावा, पर्यावरण मंत्री ने बताया कि पंजाब और हरियाणा को फसल अवशेषों का निस्तारण करने वाली मशीनों की आपूर्ति के लिए 2018-19 से 3120 करोड़ रुपये से अधिक की राशि केंद्र द्वारा दी गई है।