परिवार फिर हुआ एक… अजित पवार ने चाचा शरद पवार को लेकर कह दी ये बात, भाजपा की टेंशन बढ़ी

महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों के समीप डिप्टी सीएम अजित पवार ने एक नए बयान से राजनीतिक हलचल तेज कर दिया है। उनका कहना है कि एनसीपी के दोनों गुट कार्यकर्ताओं को फिर से एकजुट करना चाहते हैं, जबकि पवार परिवार में चल रहे तनाव अब लगभग समाप्त हो गए हैं।

इस बयान से तीनों राजनीतिक दलों – एनसीपी, बीजेपी और कांग्रेस – में हलचल बढ़ गई है। अजित पवार ने कहा कि एनसीपी के दोनों गुट को अपने मतभेदों को भूलना चाहिए और एकजुट होना चाहिए, ताकि वे मिलकर शहर के राजनीतिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

इस बयान से बीजेपी के लिए बड़ा खतरा बन गया है, क्योंकि अजित पवार अभी राज्य में बीजेपी के साथ तालमेल बैठाए हुए हैं। इसके अलावा, एनसीपी के दोनों गुट को एकजुट होते हुए, वे एक मजबूत मैदान में खड़े हो सकते हैं और मुख्यमंत्री प्रतिभा गायकवाड़ पर ताकत दिखा सकते हैं।
 
अरे, यह तो बहुत ही रोचक है कि अजित पवार ने एनसीपी के दोनों गुट को फिर से एकजुट करने की बात कही है। मुझे लगता है कि ये बहुत ही अच्छा विचार है, खासकर जब हमें राज्य के राजनीतिक मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है।

अगर एनसीपी के दोनों गुट एकजुट हो जाते हैं तो उनका विरोधी दल बीजेपी के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकता है। मुझे लगता है कि यह एक अच्छा मौका है कि उन्हें अपने मतभेदों को भूलकर एकजुट होकर साथ मिलकर शहर के राजनीतिक मुद्दों पर ध्यान देने की कोशिश करें।

मुझे यह उम्मीद है कि नतीजों का इंतजार करने के लिए हमें बहुत तेजी से समय लगेगा, और उम्मीद है कि एनसीपी के दोनों गुट एकजुट होकर अच्छे परिणाम मिलेंगे। 🤞🌈
 
अरे, ये तो अजित पवार का नया चालचल है 🤔। निरंतर जंग खेलने से एनसीपी वास्तव में आगे नहीं बढ़ पाती। इसके अलावा, राज्य में बीजेपी के साथ तालमेल बैठाने पर उन्हें अब अपना मैदान खो देना होगा। मुझे लगता है कि एनसीपी को अगर वास्तव में अपने मतभेदों को भूलना है, तो उन्हें पहले से ही एकजुट होना चाहिए और अपने उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अन्यथा, वे शहर के राजनीतिक मुद्दों पर बैठकर नहीं चल सकते।
 
निर्वाचन के नजदीक तो यही उम्मीद है कि सबकुछ सही से चले, लेकिन अजित पवार के बयान से यहाँ एक हलचल बढ़ गई है। मुझे लगता है कि उनकी बातों में एक छोटा सा राजनीतिक मंच है, जिससे एनसीपी, बीजेपी और कांग्रेस में दूरियां कम होने लगी हैं।

मेरी राय में एनसीपी को अपने गुटों को एकजुट करना चाहिए, न कि अजित पवार के इस बयान से। इससे वे मजबूत देशभर में खड़े हो सकते हैं, लेकिन अगर वे तालमेल पर बैठते हैं तो यह सब फायदा नहीं होगा। बीजेपी और कांग्रेस को भी ध्यान रखना चाहिए, खासकर प्रतिभा गायकवाड़ जी पर।
 
अरे, यह बयान सुनकर मुझे थोड़ा अजीब लगा कि अजित पवार ने एनसीपी को फिर से एकजुट करने की बात कही? पहले तो मैंने सोचा कि वे अपनी अलग-थलगता को जारी रखेंगे, लेकिन अब लगता है कि वे मुख्यमंत्री प्रतिभा गायकवाड़ पर दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं। यह तो एक दिलचस्प स्थिति है, लेकिन मुझे लगता है कि एनसीपी के दोनों गुट को फिर से एकजुट करना आसान नहीं होगा।
 
अरे दोस्त! यह बयान सुनकर मुझे लगता है कि अजित पवार को अपनी राजनीति को फिर से बदलने की जरूरत है। उनका कहना है कि एनसीपी के दोनों गुट एकजुट हो जाएंगे, लेकिन मुझे लगता है कि यह तो कुछ आसान नहीं होगा।

बीजेपी के लिए खतरा बनता है, लेकिन मुझे लगता है कि वो अपने रणनीति से इस पर ध्यान देंगे। और एनसीपी के गुटों के बीच एकजुटता तो जरूर होगी, लेकिन यह तो उनकी मजबूतियां ही दिखाएगा।

मुझे लगता है कि आजकल राजनीति में बहुत सारे जासूस और जालसाज हैं। अजित पवार का बयान तो एकदम मजाक है। क्या वो नहीं जानते कि उनकी इस तरह की बातें सुनकर लोगों को निश्चित रूप से घबराहट लगती है?

क्या आपको भी इस बयान पर कोई राय है?
 
अगर एनसीपी के दोनों गुट एकजुट हो जाते हैं तो बीजेपी के लिए यह बहुत बड़ा खतरा होगा। अगर एनसीपी मिलकर चलती है तो वे बीजेपी से कहीं भी पीछे नहीं हो सकते।
 
यह तो बिल्कुल जरूर होगा कि अजित पवार का यह बयान एनसीपी के दोनों गुट को फिर से एकजुट करने की कोशिश है। लेकिन मुझे लगता है कि इसका मतलब होगा कि वे अपने मतभेदों को भूलने के लिए पार्टी के अन्य नेताओं पर दबाव डालेंगे। और यह तो बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण होगा, खासकर अगर वे राजनीतिक मुद्दों पर एनसीपी से सहयोग नहीं कर पाते हैं। लेकिन जैसा कि कहा जाता है "बहुत बड़ा खतरा कभी भी आता नहीं", तो यह बयान मुझे लगता है कि एक तरह की पार्टी विभाजन की नई मोड़ बन सकता है।
 
यह तो एनसीपी की खुशियों की बात है न... अजित पवार से पहले की तरह कोई और नहीं... उनका यह बयान तो बस इतना है कि उन्हें राजनीतिक हलचल तेज करना चाहता है। लेकिन फिर भी, यह तो एनसीपी के गुटों को एकजुट करने में मदद कर सकता है, जो अब तक अलग-अलग दिशाओं में चल रहे थे।

लेकिन फिर, यह तो बीजेपी की चिंता है... और कांग्रेस को भी। क्योंकि जब एनसीपी एकजुट होती है, तो वे एक मजबूत मैदान में खड़े हो सकते हैं और मुख्यमंत्री प्रतिभा गायकवाड़ पर दबाव डाल सकते हैं। यह तो बीजेपी के लिए बड़ा खतरा बन गया है...
 
क्या अजित पवार को लगता है कि अगर एनसीपी के दोनों गुट एकजुट हो जाते हैं तो वे बीजेपी से कहीं अच्छे होंगे? 🤣 पवार परिवार में तनाव समाप्त होना तो अच्छा है, लेकिन यह तो एनसीपी के गुटबाज़ी को दूर नहीं करेगा। और अगर बीजेपी को लगता है कि पवार की बात सुनने के लिए तैयार है तो वे मजाक कर रहे हैं।

मुझे लगता है कि एनसीपी को अपने मतभेदों को भूलना चाहिए और सिर्फ राजनीति करना चाहिए। वह तो कभी एक मजबूत मैदान में खड़े होंगे, लेकिन फिर भी उनकी सफलता पर पवार की बातें जरूर प्रभाव डालेंगी। 🤓
 
अरे, यह क्या बोल रहा है अजित पवार?! पहले तो लगता है कि वह एनसीपी के एक गुट से तालमेल नहीं बनाना चाहता, फिर कहीं गड़बड़ी हुई और अब वह दूसरे गुट के साथ तालमेल बैठाए हुए हैं?! 🤯

और भी, यह तो बड़ा खतरा है कि एनसीपी के दोनों गुट एकजुट होते हैं! जैसे अगर वे एक साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो मुख्यमंत्री प्रतिभा गायकवाड़ पर बहुत दबाव बना सकते हैं... लेकिन फिर क्या होगा? वह भी नहीं चलेगी! 😂

कोई ऐसा सोचता है कि अजित पवार ने बस एनसीपी को एकजुट करने के लिए यह बयान दिया है, लेकिन मुझे लगता है कि वह अपने परिवार की समस्याओं को भूलकर चुनावों से पहले राजनीतिक हलचल कर रहे हैं! 🙄
 
अरे भाई, यह बयान से हमें बहुत कुछ पता चल रहा है। अगर अजित पवार को एनसीपी के दोनों गुट को एकजुट करने में सफल होते हैं तो यह बीजेपी के लिए एक बड़ा खतरा होगा। मुझे लगता है कि पवार परिवार ने अपने तनाव को दूर कर लिया है, लेकिन अब उन्हें एनसीपी के गुटों को एकजुट करना होगा। अगर वे इसे सफलतापूर्वक करते हैं तो यह शहर में उनकी स्थिति को बहुत मजबूत कर देगा। 👍
 
अरे भाई, यह बयान सुनकर लगता है कि अजित पवार फिर से राजनीतिक खेल में खिला रहे हैं! उनकी बात सुनकर तो लगता है कि एनसीपी के दोनों गुट एकजुट होने की बात सच नहीं है, लेकिन फिर भी यह बयान नेताओं के लिए बड़ा खतरा हो सकता है। बीजेपी को ये देखकर चिंता होगी, क्योंकि पवार अभी राज्य में उनके साथ तालमेल बैठाए हुए हैं। लेकिन फिर भी यह बयान एनसीपी के लिए बहुत अच्छा है, क्योंकि वे एकजुट होते हुए मजबूत मैदान में खड़े हो सकते हैं और मुख्यमंत्री प्रतिभा गायकवाड़ पर दबाव डाल सकते हैं। तो हमें देखकर देख, क्या यह बयान सच साबित होता है या नहीं!
 
अरे, ये सुनकर बहुत हैरानी हुई कि अजित पवार ने एनसीपी के दोनों गुट को एकजुट करने की बात कही है। लोगों को लगता है कि वो अपने परिवार में चल रहे तनाव को भूल गए हैं और फिर से एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं।

लेकिन ये बात थोड़ी दिलचस्प है, क्योंकि अजित पवार अभी राज्य में बीजेपी के साथ तालमेल बैठाए हुए हैं। इससे लगता है कि वो अपने बयान से किसी भी तरह से बीजेपी के खिलाफ नहीं आ रहे हैं।

और एनसीपी के दोनों गुट एकजुट होते हुए, वो मुख्यमंत्री प्रतिभा गायकवाड़ पर ताकत दिखाने की कोशिश कर सकते हैं... लेकिन यह देखना रोचक होगा कि वो अपने बयान से कितना प्रभावित करते हैं!
 
अरे यार, नगर निकाय चुनावों के बारे में अजित पवार का यह बयान बहुत ही रोचक है। मुझे लगता है कि एनसीपी के दोनों गुट एकजुट हो जाने से ये राजनीतिक दलों में बहुत बड़ा बदलाव आ सकता है।

मैंने देखा है कि बीजेपी पर भारी दबाव है, और अगर एनसीपी अपने गुटों को एकजुट कर लेती है, तो वे राज्य में बहुत बड़ा प्रभाव बना सकते हैं। इसके अलावा, अजित पवार ने कहा है कि वे शहर के राजनीतिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं, जो बहुत ही महत्वपूर्ण है।

लेकिन, यार, यह तो कहना मुश्किल है कि क्या पवार का बयान सचमुच इस तरह का बदलाव लाएगा या नहीं। हमें अभी और देखने की जरूरत है।
 
अगर एनसीपी के दोनों गुट एकजुट हो जाते हैं तो यह सचमुच बड़ा संकेत है कि उनकी राजनीतिक शक्तियाँ बढ़ रही हैं। लेकिन मुझे लगता है कि इससे प्रभावित व्यक्ति को अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। शहर के राजनीतिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए हमें स्वयं अपने आसपास की दुनिया को समझना होगा। 🌱💆‍♀️
 
अरे, यह बयान सुनकर लगता है कि अजित पवार राज्य की राजनीति में एक बड़ा खेल जोखिम ले रहे हैं 🤔। उन्होंने एनसीपी के दोनों गुट को फिर से एकजुट करने का दावा किया, लेकिन यह कहना मुश्किल है कि वह इस बात पर विश्वास कर रहे हैं या नहीं।

अगर एनसीपी के दोनों गुट एकजुट हो जाएं, तो यह निश्चित रूप से बीजेपी के लिए बड़ा खतरा बन सकता है 🚨। अजित पवार अभी भी बीजेपी के साथ तालमेल बैठाए हुए हैं, इसलिए उनके इस बयान से उन्हें खुद को सबसे ज्यादा खतरे में डालना पड़ रहा होगा।

लेकिन, यह कहना भी सही है कि एनसीपी के दोनों गुट एकजुट होते हुए, वे शहर के राजनीतिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं और मुख्यमंत्री प्रतिभा गायकवाड़ पर ताकत दिखा सकते हैं 💪। यह एक रोमांचक दृष्टिकोण है, लेकिन इसके परिणाम अभी भी देखने को मिलेंगे।
 
अरे, लोगों को यकीन है कि अजित पवार का यह बयान साफ-सफाई करने वाला है! #नगरनिकायचुनाव #नसीपी #एकजुटहोना

मुझे लगता है कि एनसीपी के दो गुट एकजुट होते हुए तो उन्हें शहर के राजनीतिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। #नसीपीजूट

बड़ा खतरा बन गया है? नहीं, नहीं! यह तो सिर्फ अजित पवार की राजनीति है! #राजनीतिकहलचल #पवारपरिवार
 
अजित पवार का यह बयान सचमुच राजनीतिक हलचल का कारण बन रहा है! 🤔 क्योंकि अगर एनसीपी में एकजुटता बन जाती है, तो इससे बीजेपी के लिए बहुत बड़ा खतरा हो सकता है। और अगर पवार परिवार में तनाव अब समाप्त हो गया है, तो इससे एनसीपी के दोनों गुट एकजुट होते हुए मजबूत मैदान में खड़े हो सकते हैं और मुख्यमंत्री प्रतिभा गायकवाड़ पर दबाव डाल सकते हैं।

लेकिन सच्चाई यह है कि राजनीति में हर चीज़ साफ नहीं होती है। क्या एनसीपी के दोनों गुट वास्तव में एकजुट हो पाएंगे? या क्या यह सब एक बड़ा खेल है? 🤷‍♂️ केवल समय ही बताएगा।
 
ਕੀ ਤो यह ਹੈ! Nagar Nigam chuneiyon ke samaap mein, Ajit Pawar ne ek alag baat ki hai... 🤔 Wahi bat kya hua tha, yeh kahein?

Mujhe lagta hai, wahi sahi ho gaya hai. Ankhey se nahi, dil se yah baat samajhne ko aati hai. Ajit Pawar ke ye baatein, wohi sachchai ke sath badhte hain. Logon ki aawaaz sunkar, apne netaon ne jaankari bhi nahi, bas apne hissa bhar kar nikaal lete hain.

Ajit Pawar ko ek majboot saamaajik samarthan chahiye. Nihai wajah se bhi wahi hai... 🤝 Kisi aur kaam ko bina aage badhne ke rakhna, toh kaisa ho sakta?

Lekin, yeh baat yahi hai ki, yahaan sahi baatein hoti hain to hi hum sab fayde uth sakte.
 
Back
Top