पश्चिम बंगाल में संदेशखाली के बोयरमारी गांव में TMC कार्यकर्ता को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर शुक्रवार रात भीड़ ने हमला कर दिया। उस हमले में छह पुलिसकर्मी घायल हो गए। इस हमले से पश्चिम बंगाल में TMC और भाजपा के बीच तेज हो गई हिंसक टकराव।
पुलिस के अनुसार, पुलिस टीम ने Mousa Molla को पकड़ने की कोशिश कर रही थी। यहां पर उसके समर्थकों ने पुलिस वाहन को घेर लिया और पत्थरबाजी की, जिसके बाद Mousa मोल्ला फरार हो गया। संदेशखाली में इन दोनों हमलों के बीच एक राजनीतिक छेद उभरने वाला है।
मैं तो ये समझ नहीं पा रहा कि लोग तो इतने भिड़के हुए हैं । TMC और भाजपा में बहुत ज्यादा मतभेद है, फिर भी लोग इतने हिंसक होते दिख रहे हैं। मुझे लगता है कि अगर हम सोचते कि दो पक्षों के बीच में वोटों की बात करें, तो कई चीजें साफ हो जाएंगी। लेकिन ये हमले अच्छे से नहीं लग रहे, यहां तक कि TMC कार्यकर्ता को भी गिरफ्तार करने की पुलिस टीम पर भीड़ ने हमला कर दिया। चाहे वह TMC है या भाजपा, ये दोनों पक्ष की तरफ से लोगों की जान कुर्बान नहीं करनी चाहिए।
इस तरह की घटनाएं क्या कर रही हैं पश्चिम बंगाल में? पुलिस तो अपने काम करने का भी बहाना बना लेती है और लोगों पर आघात पहुंचाती है। TMC और भाजपा दोनों तो अपने राजनीतिक हितों के लिए ऐसी हिंसक घटनाएं करवा रहे हैं। लेकिन हमारी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को ऐसी गड़बड़ी को समझने में भी असफल रहने की जरूरत नहीं है। अगर सरकार और पुलिस जिम्मेदार नेतृत्व करें, तो इस तरह की घटनाएं कम हो सकती थीं।
पुलिस की गतिविधियाँ तय कर लेने से पहले उनके खिलाफ भीड़ की रोती-बेचती आवाजें चुप हो जाती हैं ? यह सिर्फ एक दुष्चक्र है जहाँ पुलिस और राजनेताओं के बीच शक्ति संघर्ष हो रहा है। मेरी राय में, भीड़भाड़ और हिंसा के मामले में हमारे समाज में बड़ी समस्या है लेकिन पुलिस को इस पर कड़ा हाथ रखना चाहिए ?
यह तो बहुत भयानक है । पुलिसकर्मियों की जान जोखिम में आने की बात सुनकर मन में गहरा दर्द हो रहा है। TMC और भाजपा के बीच इतनी हिंसक टकराव, ये हमारे समाज को कैसे आगे बढ़ाने देगी?
मुझे लगता है कि इस तरह के हमलों से सुधरना ही तभी मुमकिन है, जब हम एक-दूसरे को समझें और शांतिपूर्ण तरीकों से समस्याओं का समाधान खोजें। पुलिसकर्मियों के इस तरह के हमलों को लेकर, मुझे लगता है कि दोनों पक्षों को एक-दूसरे की बात सुननी चाहिए।
मुझे यह बात बहुत परेशान करती है कि हमारे देश में ऐसी गोलियां लगने की चीजें होती रहती हैं... पुलिस को अपना कर्तव्य करने दो, लेकिन ताकत बढ़ाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। और यह तो मेरी बात नहीं, सारी देशभक्ति की बात है। लेकिन सच्चाई को कहा जाए, तो यहां पर हमारे राजनेताओं ने अपने समर्थकों को सुरक्षा से ज्यादा महत्व दिया है, और इसके परिणामस्वरूप हमें यह देखकर दर्द होता है... फिल्मों में ऐसी चीजें कभी नहीं होती, लेकिन राजनीति में ये सब सच है।
यह तो बहुत ही गंभीर समस्या है । पुलिस को भी अपने कर्तव्य को निभाने में असमर्थ होने की स्थिति में ऐसे हमले होते देखना बहुत दर्दनाक है। TMC और भाजपा के बीच जो हिंसक टकराव बढ़ रहा है, वह सभी के लिए खतरनाक है । संदेशखाली में ऐसे हमलों के बाद, हमें यह समझने की जरूरत है कि हमारे देश में राजनीति कैसे चल रही है। लोगों को अपने मतदान अधिकार का सही तरीके से उपयोग करने और अपने नेताओं की जवाबदेही समझने की जरूरत है ।
मेरे दिल का दौरा पड़ गया , यह तो भूल गए थे कि हमारा देश कहीं और नहीं जाता है.. पश्चिम बंगाल में ऐसी स्थितियां निकलती रहती हैं जैसे हमें अपने घरों में अंडरग्राउंड हो रखना पड़ता है। क्या तो पुलिस वाहिनी यह इतनी दुर्जेय हो गई है? छह पुलिसकर्मी घायल, यह तो बहुत बड़ी बात नहीं है, लेकिन ऐसे में भीड़ कैसे ऐसे रोने लगती है? और Mousa Molla को पकड़ने की कोशिश कर रहे थे, यार फिर से ऐसा मामला उभरकर आता है जो हमारे देश की पुलिसी पर बुरा नाम लगाता है। यह तो भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच लड़ाई की तरह ही लगता है, लेकिन ऐसे में कोई सोचता है? देश की गवाही निकाल कर, खुद को भी पकड़ लेना चाहिए।
मुझे लगता है कि यह हमला TMC और भाजपा के बीच के खेल का हिस्सा हो सकता है। पुलिस टीम ने मुश्किल स्थिति में Mousa Molla को पकड़ने की कोशिश करनी चाहिए, लेकिन इसके बदले में उन्होंने हमले कर दिए। यह जैसा है कि पुलिस टीम ने अपना फैसला पहले से ही बना लिया था, इस हमले में उनकी भूमिका को खोजना मुश्किल नहीं होगा।
बिल्कुल ऐसा हुआ तो समझ आया कि पुलिस व भीड़ के बीच बहुत बड़ा जोखिम होता है संदेशखाली में यह हमला तो बहुत ही खतरनाक है, अगर न कोई पत्थरबाजी होती, न सारे समर्थकों ने पुलिस वाहन घेर लिया, तो यह सब कुछ भी नहीं होता।
लेकिन जैसे ही Mousa मोल्ला फरार हो गया, समझ आया कि कुछ गलत हो रहा है, क्योंकि अगर उसे पकड़ने की कोशिश कर रही थी, तो क्यों इतनी हिंसकता? संदेशखाली में TMC और भाजपा के बीच यह बहुत बड़ा जंग होने वाला है, अगर हमारी पुलिस और राजनेताओं में मिलकर कुछ अच्छा करें, तो शायद इस तरह की हिंसक घटनाएं न होती।
यह तो बहुत ही गंभीर समस्या है... पुलिस टीम पर भीड़ का हमला करना और पुलिसकर्मियों को घायल कर देना... यह कैसे स्वीकार्य है? हमें अपने देश की सुरक्षा के लिए एकजुट रहना चाहिए, न कि विभाजन में डालना चाहिए। TMC और भाजपा की राजनीतिक गतिविधियों पर हमला करने की बजाय, हमें अपने समाज में शांति और सौहार्द को बढ़ावा देने की कोशिश करनी चाहिए। पुलिसकर्मियों की जान जोखिम में डालने वाले लोगों को समझने की जरूरत है, हमें उनकी बात सुननी चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान खोजने की कोशिश करनी चाहिए