पश्चिम बंगाल में शरणार्थी मतुआ समुदाय ने बीजेपी के दिए बयान से गुस्सा हो गया है। लाल सिंह आर्य ने बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत में आए लोगों के नाम मतदाता सूची में नहीं होने चाहिए। इससे मतुआ समुदाय में नाराजगी हो रही है।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा है कि यह आर्य का निजी विचार है, पार्टी की अधिकारिक राय नहीं।
वहीं, उत्तर 24 परगना के ठाकुरनगर में मतुआ समुदाय के गोसांई से मारपीट की गई। आरोप है कि मारपीट बीजेपी के केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर के लोगों ने की।
शरणार्थी मतुआ समुदाय बांग्लादेश से आए दलित हिंदू शरणार्थियों का बड़ा समूह है। जो चुनाव के दौरान प.बंगाल के उत्तर 24 परगना, नदिया और दक्षिण 24 परगना जिलों में निर्णायक भूमिका निभाता है।
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की थी। बंगाल में 58 लाख 20 हजार 898 वोटरों के नाम हटाने के लिए चिन्हित किए गए हैं। SIR का दूसरा चरण फरवरी 2026 तक चलेगा और अंतिम वोटर लिस्ट 14 फरवरी 2026 को जारी होगी।
पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को रोकने की मांग करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेटर लिखा। उन्होंने SIR प्रक्रिया को जबरदस्ती थोपने वाली और खतरनाक बताया है।
बिहार के बाद देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR 28 अक्टूबर से शुरू हुआ है। इस प्रोसेस में वोटर लिस्ट का अपडेशन होगा। नए वोटरों के नाम जोड़े जाएंगे और वोटर लिस्ट में सामने आने वाली गलतियों को सुधारा जाएगा।
पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़ी ये खबर पढ़ें।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि SIR से मतुआ समुदाय को घबराने की जरूरत नहीं है, शरणार्थियों को डरने की जरूरत नहीं। बीजेपी ने कहा है कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत योग्य मतुआ और नामशूद्र समुदाय के लोगों को कोई नुकसान नहीं होगा।
पश्चिम बंगाल की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी, 58.20 लाख नाम कटे।
ममता बोली- SIR खतरनाक, इसे रोकें: EC को लेटर लिखा- ये बिना प्लानिंग के हो रही; BSF का दावा- रोज 150 अवैध बांग्लादेशी लौट रहे।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा है कि यह आर्य का निजी विचार है, पार्टी की अधिकारिक राय नहीं।
वहीं, उत्तर 24 परगना के ठाकुरनगर में मतुआ समुदाय के गोसांई से मारपीट की गई। आरोप है कि मारपीट बीजेपी के केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर के लोगों ने की।
शरणार्थी मतुआ समुदाय बांग्लादेश से आए दलित हिंदू शरणार्थियों का बड़ा समूह है। जो चुनाव के दौरान प.बंगाल के उत्तर 24 परगना, नदिया और दक्षिण 24 परगना जिलों में निर्णायक भूमिका निभाता है।
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की थी। बंगाल में 58 लाख 20 हजार 898 वोटरों के नाम हटाने के लिए चिन्हित किए गए हैं। SIR का दूसरा चरण फरवरी 2026 तक चलेगा और अंतिम वोटर लिस्ट 14 फरवरी 2026 को जारी होगी।
पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को रोकने की मांग करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेटर लिखा। उन्होंने SIR प्रक्रिया को जबरदस्ती थोपने वाली और खतरनाक बताया है।
बिहार के बाद देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR 28 अक्टूबर से शुरू हुआ है। इस प्रोसेस में वोटर लिस्ट का अपडेशन होगा। नए वोटरों के नाम जोड़े जाएंगे और वोटर लिस्ट में सामने आने वाली गलतियों को सुधारा जाएगा।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि SIR से मतुआ समुदाय को घबराने की जरूरत नहीं है, शरणार्थियों को डरने की जरूरत नहीं। बीजेपी ने कहा है कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत योग्य मतुआ और नामशूद्र समुदाय के लोगों को कोई नुकसान नहीं होगा।
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