राजनाथ सिंह ने बीकानेर में BRO रोड प्रोजेक्ट का किया उद्घाटन, बॉर्डर पर सेना को पहुंचने में होग

बीकानेर में BRO रोड प्रोजेक्ट का उद्घाटन: सेना को पहुंचने में आसानी, स्थानीय जीवन में बदलाव

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को लेह से सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की हाल में पूर्ण हुई 125 परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया। इन परियोजनाओं में राजस्थान के दूरस्थ सीमांत क्षेत्रों के लिए कई महत्वपूर्ण सड़कें शामिल हैं, जो आने वाले सालों में बीकानेर संभाग की सामरिक, सामाजिक और आर्थिक दिशा को बदलने वाली हैं।

इन परियोजनाओं का निर्माण 5,000 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है और ये परियोजनाएं लद्दाख, जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेशों, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और मिजोरम सहित 7 राज्यों में फैली हैं।

बीकानेर में इन परियोजनाओं का उद्घाटन करने वाले राजनाथ सिंह ने कहा, "इन परियोजनाओं का निर्माण हमारी सीमा सड़क संगठन की प्रतिबद्धता का एक प्रभावी उदाहरण है। ये परियोजनाएं हमारे देश के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और सेना को पहुंचने में आसानी, स्थानीय जीवन में बदलाव लाने में मदद करेंगी।"

इन परियोजनाओं के उद्घाटन के अवसर पर बीकानेर रणबांकुरा डिवीजन के जीओसी मेजर जनरल दीपक शिवरान और चेतक परियोजना बीकानेर के चीफ इंजीनियर सुरेश गुप्ता उपस्थित रहे। दोनों अधिकारियों ने बीआरओ के उत्कृष्ट प्रदर्शन, कठिन परिस्थितियों में तेजी से काम पूरा करने की क्षमता और सीमांत विकास को गति देने में इसकी भूमिका को सराहा।
 
बीकानेर में BRO रोड प्रोजेक्ट का उद्घाटन करने की बात तो अच्छी है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इन सड़कों का निर्माण 5,000 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। यानी अगर हमारे देश में इतनी पैसे की कमी नहीं थी, तो क्यों हमें इन परियोजनाओं को शुरू करने के लिए बांटे गए? 🤑

और यह भी सवाल उठता है कि इन सड़कों का निर्माण कैसे किया गया था, जिसमें इतनी तेजी और कठिन परिस्थितियों में काम पूरा किया गया। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इन सड़कों का निर्माण करने वाले लोगों को बहुत मुश्किलें हुईं, इसलिए तभी ऐसा कुछ भी संभव हुआ। 🔧

लेकिन हमारी सरकार ने कहा है कि इन परियोजनाओं का उद्घाटन हमारी सीमा सड़क संगठन की प्रतिबद्धता का एक प्रभावी उदाहरण है, लेकिन मैं तो सोचता हूं कि यहां पर बहुत कुछ बदलने की जरूरत है। 🔄
 
बहुत अच्छा, ये बीकानेर रोड प्रोजेक्ट ने राजस्थान के कई गाँवों में सड़क जाम को दूर कर दिया है 🚗💨. अब वो भी लोग वहां अपनी फसल लगाने और छुट्टियों में आसानी से यात्रा करने के लिए आने-जाने में आसानी है।
 
बीकानेर में BRO रोड प्रोजेक्ट का उद्घाटन हुआ, जिससे सेना को पहुंचने में आसानी होगी। लेकिन याद करो, 80 के दशक में, हमारे देश में बहुत कम सड़कें थीं, और यात्रा करना बहुत मुश्किल था। मैंने अपने बचपन में लद्दाख जाने की कोशिश की, लेकिन सड़कें इतनी खराब थीं कि हमें रुकना पड़ता था।

आज, ये परियोजनाएं सामरिक, सामाजिक और आर्थिक दिशा में बदलाव लाने वाली हैं। मुझे लगता है कि ये परियोजनाएं हमारे देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। लेकिन, मैं सोचता हूं कि हमें अपने बचपन की यादों को भी नहीं भूलना चाहिए। 📚
 
बीकानेर में BRO रोड प्रोजेक्ट का उद्घाटन हुआ, जो सेना को पहुंचने में आसानी लेकर आ रहा है 🚗💨। लेकिन क्या यह परियोजनाएं हमारे देश के विकास को ही ध्यान में रखकर बनाई जा रही हैं? या यह भी एक ऐसी परियोजना है जिसमें स्थानीय लोगों की जरूरतों और सोच को ध्यान में रखा गया है? 🤔

मुझे लगता है कि इन परियोजनाओं में से अधिकांश में स्थानीय लोगों की जरूरतों को ध्यान में नहीं रखा गया है। जैसे कि भारी सड़कों का निर्माण करने से पहले हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे स्थानीय लोगों के द्वारा उपयोग किए जाने वाले वाहनों और फसलों को भी ध्यान में रखें। 🚜💪

इसके अलावा, इन परियोजनाओं में निकलने वाले खर्चों से कैसे स्थानीय लोगों का जीवन बदलेगा? हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इन परियोजनाओं से हमारे देश की अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक परिवर्तन हो। 💸

लेकिन फिर भी, मुझे लगता है कि BRO रोड प्रोजेक्ट का उद्घाटन एक अच्छी बात हो सकता है। सेना को पहुंचने में आसानी लेकर आ रही है, जिससे हमारे देश की रक्षा में सुधार हो सकता है। 🚫
 
बीकानेर में BRO रोड प्रोजेक्ट का उद्घाटन करने वाले राजनाथ सिंह को बधाई! लेकिन मुझे लगता है कि 5,000 करोड़ रुपये की लागत पर इन परियोजनाओं का निर्माण बहुत बड़ा पैसा है। हमारे देश में किसानों और गरीबों को सबसे ज्यादा फायदा होना चाहिए, नहीं तो ये पैसा बिल्कुल बर्बाद ही होगा।
 
बीकानेर में BRO रोड प्रोजेक्ट का उद्घाटन हुआ, जिससे सेना को पहुंचने में आसानी होगी और स्थानीय जीवन में बदलाव आ सकता है। यह परियोजनाएं दूरस्थ सीमांत क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण सड़कें बनाने में मदद करेंगी। 5,000 करोड़ रुपये की लागत से इन परियोजनाओं का निर्माण किया गया है और ये परियोजनाएं देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगीं। 🚗
 
बीकानेर में BRO रोड प्रोजेक्ट का उद्घाटन एक बड़ा कदम है, लेकिन यह सोचते समय नहीं जा रहे हैं कि ये परियोजनाएं दूरस्थ क्षेत्रों के लिए फायदेमंद है या न क्या? इसकी लागत 5,000 करोड़ रुपये है, यह सोचते समय नहीं जा रहे हैं कि इतनी पैसे में देश के अन्य भागों को छोड़कर केवल इन क्षेत्रों की मदद किया गया है? यह एक अच्छी बात है कि सेना को पहुंचने में आसानी होगी, लेकिन स्थानीय जीवन में बदलाव तभी होगा जब इन परियोजनाओं से नागरिकों की जिंदगी में फायदा हो।
 
बीकानेर में BRO रोड प्रोजेक्ट का उद्घाटन करने से सेना को पहुंचने में आसानी होगी, और स्थानीय जीवन में बदलाव आएगा। लेकिन ये सवाल है कि इन परियोजनाओं के निर्माण में कितनी राजस्थान की समस्या को हल करने की कोशिश की गई? क्या ये परियोजनाएं हमारे देश की ग्रामीण विकास की समस्याओं को हल कर पाएंगी?
 
बीकानेर में BRO रोड प्रोजेक्ट का उद्घाटन हुआ, जिससे सेना को पहुंचने में आसानी होगी और स्थानीय जीवन में बदलाव आएगा 🚗💪। ये परियोजनाएं हमारे देश के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और लद्दाख, जम्मू कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और मिजोरम सहित 7 राज्यों में फैली हुईं। 🌆 ये परियोजनाएं हमारे देश को एक मजबूत और सामरिक रूप से शांतिपूर्ण बनाने में मदद करेंगी। 🙏
 
बीकानेर में BRO रोड प्रोजेक्ट का उद्घाटन करने पर सोचते हैं तो यह सारे 5,000 करोड़ रुपये कितने लोगों के भविष्य की बात कर रहे हैं? क्या ये राजस्थान में किसानों के खेतों तक पहुंचने के लिए सड़कें बनाने से उनकी फसलों की दुकानों तक पहुंच होगी या यह तो बस सेना को पहुंचने में आसानी ही है?
 
बीते हुए सप्ताह तक लेह से बीआरओ की 125 परियोजनाओं का सफल निष्पादन देखकर मुझे खुशी हुई। ये परियोजनाएं हमारे देश के विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और सेना को पहुंचने में आसानी लाने में मदद करेंगी। लेकिन मुझे लगता है कि इन परियोजनाओं के अलावा हमें अपने गाँवों में भी ऐसी प्रयोगशालाएं बनानी चाहिए जहां से हम अपने दैनिक उपयोग में उपकरण तैयार कर सकें।
 
राजनाथ सिंह जी ने बीकानेर में BRO रोड प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया, जिससे सेना को पहुंचने में आसानी होगी और स्थानीय जीवन में बदलाव आएगा। लेकिन याद रखना चाहिए कि ये परियोजनाएं हमारे देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनके निर्माण के लिए भी बहुत सारे मानवीय संसाधन लग गए हैं। यह हमें पूछता है कि परियोजनाएं तो बन जाती हैं लेकिन उनकी सफलता के लिए हमारी मेहनत, समर्पण और सहयोग की जरूरत होती है।
 
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