राजस्थान के 9 शहरों में पारा 10°C से नीचे पहुंचा: इंदौर में तापमान 4.5°C, 10 साल का रिकॉर्ड टूटा; उत्तराखंड में नदी-नाले, झरने जमे

राजस्थान के 9 शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे पहुंचा, इंदौर में तापमान 4.5 डिग्री पर, उत्तराखंड में नदी-नाले, झरने जम गए

राजस्थान के कई शहरों में गुरुवार को पारा 10 डिग्री से नीचे चल गया। इंदौर में इस दिन तापमान 4.5 डिग्री पर पहुंच गया, जिसमें गुरुवार रात न्यूनतम तापमान होने का रिकॉर्ड टूट गया।

इसी तरह, सीकर के फतेहपुर में पारा 4 डिग्री पर, नागौर में 5 डिग्री, सीकर में 5.5 डिग्री और लूणकरणसर में 5.6 डिग्री दर्ज किया गया। राजधानी जयपुर में तापमान 10.7 डिग्री पर रहा।

इसके अलावा, उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से बर्फबारी के बाद अब पाला गिर रहा है। इससे नदियां, नाले और झरने जम गए हैं। चमोली और पिथौरागढ़ में लोगों के घरों में पाइपों में भी पानी जम गया है।

उत्तराखंड के हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में गुरुवार सुबह घना कोहरा छाया रहा। वहीं श्रीनगर में डल झील पर गुरुवार को सर्दी के बीच पर्यटक शिकारा की सवारी करने पहुंचे।
 
ਤापमान 10 डिग्री से नीचे आनੇ ਤੋਂ ਮੈਨੂੰ ਪੁਲਿਸ ਜਾਣ ਵਿਚ ਕੀਹ ਫਾਇਦਾ? ਉਹ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮੈਨੂੰ ਪਿੱਛੇ ਆ ਜਾਣਾ ਕਿ ਭਲਾ? ਅਸੀਂ ਉਹਨਾਂ ਗੁਣਾਂ ਦੇ ਬਾਰੇ ਤਾਂ ਬਿਰਤੀਕਾਰ ਕਰਵਾਏ ਜਿਸ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਆਪਣੇ ਘਰ ਦੀਆਂ ਖ਼ਾਦਾਂ ਤੋਂ ਹੱਥ ਧੋਵਾਏ, ਉਹਨਾਂ ਕੁਝ ਗੱਲਾਂ ਮੇਰੀਆਂ ਜਿੰਦ ਤੋਂ ਪਛਤਾਵੀਂ, ਬਸ ਇਹ ਕੁਝ ਪੈਲੀਟ ਨਹੀਂ ਚਲੀ।
 
ब्रेन में तूफान चला गया! पारा 10 डिग्री से नीचे आ गई, लोगों को खांसी लगने जैसा महसूस होगा। शायद फसलें भी खराब हो जाएंगी। उत्तराखंड में नदियां जम गईं, यार तो पानी का यह नाम भूल गए।
 
ਇੰਡੀਅਨ ਪ੍ਰਸ਼ਾਸਣ ਦੀ ਤਕਨੀਕ ਮੁੱਖ ਭੂਮੀਗਤ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਹਨ, ਇਸ ਲਈ ਦੁਰਘਟਨਾਵਾਂ ਕਰਵਾਉਣਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ। ਫਿਰ ਵੀ, ਸਭ ਤੋਂ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਬਾਅਦ ਇਕਲੌਤੀ ਗੱਲ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਸਭ ਥਾਂ 'ਤੇ ਚਰਬੀ ਧਰਤੀ ਵਿਚ ਪਏ, ਉੱਥੋਂ ਹੀ ਜਲਵਾਯੂ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੋ ਗਿਆ।
 
अरे यार, यह तो बहुत ही दुखद स्थिति है! राजस्थान में इतना ठंडा हो गया कि तापमान 10 डिग्री से नीचे चल गया। और उत्तराखंड में नदियां, नाले और झरने जम गए, यह तो बहुत बड़ा समस्या है! पारा इतना कम हो गया कि इंदौर में तापमान 4.5 डिग्री पर रहा, यह तो हमेशा की तरह ठंड की सीट बन गया।

मुझे लगता है कि ऐसे मौसम के समय, हमें खाद्य सुरक्षा और पेयजल के बारे में विशेष ध्यान रखना चाहिए। पानी जम जाने से बहुत सारे लोगों को परेशानी होगी। शायद सरकार और स्थानीय प्रशासन को ऐसी स्थितियों को देखते हुए जलवायु संरक्षण और मौसम पूर्वानुमान में सुधार करना चाहिए।
 
मुझे लगता है कि ये ठंड तेजी से आ रही है, मैंने पहले से भी अपने घर को अच्छी तरह से स्टोर किया हुआ हूँ, अब मैं बाहर निकलने पर ध्यान दूंगा। लेकिन यह ठंड तो सबको प्रभावित करेगी, खासकर बच्चों और बड़ों को, कुछ लोग अपने घरों की छतों पर आराम करेंगे, फिर भी।
 
राजस्थान में पारा इतनी कम हो गई है कि इंदौर जैसे शहरों में तापमान 4.5 डिग्री पर गिर गया। यह बहुत ही बेमौसम है। मुझे लगता है कि इससे हमारे प्रदेश की फसलें भी खराब हो सकती हैं। उत्तराखंड में नदियां और नाले जम गए, यह तो बहुत बड़ा समस्या है। शायद अगले कुछ दिनों में इस मौसम के बाद थोड़ी सुधार आएगा, लेकिन अभी तक तो यह बहुत ही स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर रहा है। 🌡️😷
 
मुझे पूरे देश में ठंड लगने का बहुत खेद है 🤕❄️, खासकर राजस्थान में जो 9 शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे पहुंच गया। यह तापमान बेहद कम है, मुझे लगता है कि गर्मियों का दौर बहुत जल्दी हुआ है। 🌞☀️

उत्तराखंड में भी बर्फबारी के कारण पाला गिरने से नदी-नाले, झरने जम गए, यह बहुत बड़ी समस्या है जिस पर हमें ध्यान देना चाहिए। 🌊😨

मुझे लगता है कि तापमान में बदलाव करने के लिए हमें जलवायु परिवर्तन की समस्या को समझने और उसका समाधान निकालने की जरूरत है। 🌎💡
 
मुझे लगता है कि यह तापमान बहुत कम है, मैंने अपने घर के आसपास कभी नहीं देखा है 🤔। लूणकरणसर में 5.6 डिग्री तो बहुत ठंडा है। मुझे लगता है कि हमारे शहर की जल संसाधनों को बढ़ाने पर विचार करना चाहिए, इससे हमारे घरों में पाइपों में भी पानी नहीं जम जाती।
 
बिल्कुल नहीं, तापमान कम होने से पहले हम प्लास्टिक की समस्या का सामना कर रहे थे, और अब बिजली की समस्याएं बढ़ गई हैं, तो इस तरह की खुराक तेज़ करने से कैसे कमियां दूर होंगी? पानी जम जाने का मतलब कि नदियां और झरने कहीं भी नहीं चलेंगे, न कि लोगों के घरों में, न कि पर्यटन स्थलों पर...
 
राजस्थान की ठंड वाली खबर बहुत ही दिलचस्प है 🤔, और यह तो उत्तराखंड में पाला गिरने से जुड़ी भी है। लेकिन यह तो हमारे सरकार की जलवायु नीति पर सवाल उठाता है, क्योंकि इससे पहले भी कई जगहों पर गर्मी के दौर में बहुत बारिश हुई थी। सिर्फ इतना नहीं बल्कि वर्ष 2020 में भी उत्तराखंड में एक बड़ा सूखा पड़ा। तो यह तो सरकार की जलवायु नीति की कमजोरी पर सवाल उठाता है और हमें सोचता है कि क्या अब सरकार किसी जवाबदेही में नहीं आ रही? 🤷‍♂️
 
मैंने सुना है कि राजस्थान के कई शहरों में तापमान बहुत कम गया है, यह देखकर मुझे थोड़ा चिंतित हुआ है। 10 डिग्री से नीचे जाना तो बिल्कुल भी ठीक नहीं है, खासकर जब गर्मियों का मौसम चल रहा हो। इंदौर में तापमान 4.5 डिग्री पर और उत्तराखंड में नदी-नाले जम गए, यह सब बहुत सावधानी से देखना चाहिए। शायद सरकार को इस मुद्दे पर ध्यान रखना चाहिए ताकि लोगों को किसी भी तरह की समस्या न हो।
 
बिल्कुल नहीं समझा, राजस्थान में तो तापमान कम होना एक अच्छी चीज़ है, लेकिन इतना कम होना वास्तव में खतरनाक भी। राजधानी जयपुर में 10.7 डिग्री का तापमान, यह सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं है, हमारी पूरी दुनिया इस मौसम से संघर्ष कर रही है। उत्तराखंड में नदियां और झरने जम गये, यह सच्चा दुर्भाग्यपूर्ण घटना है तो कोई तय नहीं करता। पाला गिरना एक बहुत बड़ा खतरा है, हमें अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।
 
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