चुनाव आयोग ने प्रदेश में 4-5 हजार से ज्यादा चुनावी खर्च का ब्योरा नहीं देने वालों को रोकने की संभावना बढ़ गई है। इन लोगों को अगर चुनाव लड़ने पर मौका मिलता है तो 3 साल तक चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाई जा सकती है।
राज्य चुनाव आयोग ने हाल ही में खर्च सीमा बढ़ाने की अधिसूचना जारी की थी। नए नियमों के मुताबिक, पंचायती राज के चुनाव में सरपंच 1 लाख, पंचायत समिति सदस्य 1.5 लाख और जिला परिषद सदस्य 3 लाख ही खर्च कर पाएंगे।
चुनावी खर्च का ब्योरा देने से पहले नियमानुसार रिजल्ट घोषित होने के 15 दिनों के भीतर अपना खर्च विवरण आयोग को देना होता है। लेकिन पिछले पंचायत चुनाव में खर्च का ब्योरा नहीं देने वाले पंच-सरपंचों के दोबारा चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती है।
राज्य सरकार ने ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए जयपुर-जोधपुर सहित प्रदेश के 12 जिलों में जिला परिषद और पंचायत समितियों के बोर्ड समय से पहले भंग भी कर सकती है।
राज्य चुनाव आयोग ने हाल ही में खर्च सीमा बढ़ाने की अधिसूचना जारी की थी। नए नियमों के मुताबिक, पंचायती राज के चुनाव में सरपंच 1 लाख, पंचायत समिति सदस्य 1.5 लाख और जिला परिषद सदस्य 3 लाख ही खर्च कर पाएंगे।
चुनावी खर्च का ब्योरा देने से पहले नियमानुसार रिजल्ट घोषित होने के 15 दिनों के भीतर अपना खर्च विवरण आयोग को देना होता है। लेकिन पिछले पंचायत चुनाव में खर्च का ब्योरा नहीं देने वाले पंच-सरपंचों के दोबारा चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती है।
राज्य सरकार ने ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए जयपुर-जोधपुर सहित प्रदेश के 12 जिलों में जिला परिषद और पंचायत समितियों के बोर्ड समय से पहले भंग भी कर सकती है।