‘राहुल के पास हमारे लिए वक्त नहीं, प्रियंका कमान संभालें’: कांग्रेस से सस्पेंड मोहम्मद मुकीम बोले- खड़गे नहीं हटे, तो कुछ नहीं बदलेगा

ये तो पुराने दिनों की बातें हैं! मुझे लगता है कि कांग्रेस में बदलाव होने से पहले वास्तव में एक बड़ा ट्रिगर मिलना बहुत जरूरी था। हमारे पास ऐसे लोग नहीं हैं जो पार्टी की विचारधारा को समझें। दूसरे देशों की राजनीति को देखकर भारतीय लोगों को समझाना चाहिए, यह हमें बहुत मुश्किल कर देता है।
 
अगर कांग्रेस में बदलाव करना है तो पार्टी विचारधारा को समझने वाले लोग होना जरूरी है। देश के नेताओं से पहले हमें अपने आप को और पार्टी की स्थिति को अच्छी तरह से जानना चाहिए। अगर विदेश में देखा जाए तो राजनीति तो एक ही तरह की नहीं है। हमें दूसरे देशों की राजनीतिक समस्याओं को समझना चाहिए और उसी से हमारी पार्टी की समस्याओं को भी समझना चाहिए। अगर ऐसा न करें तो बदलाव होने पर वहां दोष कहीं और लगेगा।
 
राहुल गांधी जी की यह नेतृत्व कोशिश जरूरी थी, तो फिर वाकई उनके पास एक ट्रिगर मिलना जरूरी नहीं था। हमारी पार्टी विचारधारा को समझने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों की बोलियाँ सुननी चाहिए। राजनीति को दूसरे देशों में देखना हमें फायदा नहीं करता। हमें अपनी खुद की पार्टी विचारधारा और समाज की जरूरतों को समझना होगा। और सबसे ज्यादा, हमें अपने नेताओं से अच्छे लोग बनाना होता है, न कि ट्रिगर मिलने के।
 
अरे, यह तो बहुत ही दिलचस्प बात है 🤔 राहुल जी के नेतृत्व में बदलाव, यह हमारे पार्टी विचारधारा को अच्छी तरह से नहीं समझा गया। लोगों को दूसरे देशों की राजनीति को देखकर समझाना चाहिए, वहाँ की समस्याओं और समाधानों को समझने वाले लोगों को हमें सीखना चाहिए। हमारे पास अपनी ज़रूरतों को समझने वाले लोग नहीं हैं, इसलिए दूसरों से सीखने की जरूरत है 📚
 
राहुल जी के नेतृत्व में कांग्रेस में बदलाव से पहले बड़ा ट्रिगर मिलना बिल्कुल जरूरी था, तुम्हारे पास पार्टी विचारधारा को समझने वाले लोग नहीं हैं, बूढ़पान में भी जादू होता है 🤣। हमारे देश में राजनीति से परे हिस्से को देखने की जरूरत है, दूसरे देशों की राजनीति को देखकर भारतीय लोगों को समझाना चाहिए, तुम्हारे पास युवाओं की बोलचाल को सुनने वाले लोग नहीं हैं। हमें अपने देश में बदलाव लाने के लिए नई ऊर्जा और नई दृष्टि की जरूरत है, और राहुल जी के नेतृत्व में बदलाव से पहले बड़ा ट्रिगर मिलना एक अच्छा शुरुआत का संकेत हो सकता है।
 
राहुल गांधी जी की नेतृत्व में कांग्रेस में बदलाव की बात में तो सबको खुश होना चाहिए, लेकिन ऐसे बड़े ट्रिगर क्यों लाने पड़ते? मेरा मन सोचने लगता कि अगर हमारे देश में राजनीतिक दल की विचारधारा को समझने वाले सोच न हों, तो फिर कैसे समाज में बदलाव लाना चाहिए? 🤔 और हमारे देश में जो बातचीत होती है, वह कितनी प्रभावशील है? मुझे लगता है कि अगर हम राजनीतिक दलों की विचारधारा को समझने वाले लोग से मिलकर कुछ करें, तो बदलाव की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं… लेकिन फिर भी क्यों ट्रिगर लाने पड़ते? 🤷‍♂️
 
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