‘राहुल के पास हमारे लिए वक्त नहीं, प्रियंका कमान संभालें’: कांग्रेस से सस्पेंड मोहम्मद मुकीम बोले- खड़गे नहीं हटे, तो कुछ नहीं बदलेगा

नमस्ते दोस्तों... मुझे यह बातें बहुत पसंद नहीं हैं, जब लोग एक-दूसरे पर आरोप लगाने लगते हैं। राहुल और प्रियंका जी को अपने संगठन के नाम पर इतनी मुश्किलें न उठानी चाहिए। बदलाव हमेशा अच्छा नहीं होता, लेकिन अगर वह बदलाव सही दिशा में होता है तो यही स्वस्थ समाज के लिए जरूरी है।

मेरे अनुसार, राहुल और प्रियंका जी अपने संगठन को फिर से बनाने की जरूरत नहीं है। उन्हें अपने स्वयं के मूल्यों और सपनों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अगर वे अपने योगदान के अनुसार समाज में सकारात्मकता लेकर आ जाएं तो सब कुछ ठीक हो जाएगा।
 
मुझे तो लगता है कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को अपने संगठन को नई दिशा देने की जरूरत है। वे दोनों ही बहुत अच्छे नेता हैं लेकिन फिर भी हमारे साथियों को लगता है कि वे और अधिक जागरूक होने की जरूरत हैं। मुझे लगता है कि अगर वे अपने संगठन को नई दिशा देंगे तो हमारे लिए बहुत फायदा होगा। हमें एक नए प्रकार का नेतृत्व चाहिए जो हमारी समस्याओं का समाधान कर सके। मैं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से अपेक्षा करता हूं कि वे अपने संगठन को नई दिशा देंगे और हमारे लिए अच्छा नेतृत्व करेंगे। 🙏
 
😊 main isse samajh nahi aaya, ye log kya kah rahe hain? Rahul Gandhi aur Priyanka Gandhi ko sangaat badalna chahie? 🤔 toh maine socha hai ki ye log kisi cheez ke liye nahi yahan aaye hain, balki ye sabhi hi ek hi mission ke liye hain. ye mission hai ki hum apne desh ko achha banayen, aur un logon ko sahi disha mein le jayein.

main bhi sochta hoon ki Rahul Gandhi aur Priyanka Gandhi ko sangaat badalna chahiye, kyunki vah dono hi ek hi sanchaar ke liye hai. main chahta hoon ki ve apne desh ke logon ke saath akele khade ho jaayein, aur unhe unki baaton se sun lein. yei toh ek achha raasta hai, kyunki vah dono hi humein sachchai dikhane wale hain.

lekin, main bhi sochta hoon ki ye sab kuch badi jatil cheez hai, aur ismein bahut se logon ko bhi sahayak honge. main chahta hoon ki Rahul Gandhi aur Priyanka Gandhi apne team ke saath milkar kaam karein, aur unke baad mehsoos ho jaaye ki ve ek hi cheez ke liye hain. 🤞
 
अरे दोस्त, यह राजनीति की खेल है 🤦‍♂️, कोई भी नेता अपने पद पर रहते ही बदलते रहते हैं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने अपने संगठन में बदलाव लाने की बात कही है, लेकिन मुझे लगता है कि उन्हें पहले अपने अंदर की चीजों को सही करना चाहिए। जैसे कि हमारे देश की समस्याओं पर वास्तविक सोच और रणनीति बनानी चाहिए 🤔, लेकिन बदलाव की जड़ होती है हमारे समाज में रहने वाले लोगों का दिल छू जाना है।
 
अगर राहुल और प्रियंका अपने संगठन को बदलें तो अच्छा होगा, लेकिन यह सवाल क्या है कि वे बदलना चाहते हैं या बदलाव की जड़ मैं हूं... 🤔

मेरे दोस्तों को लगता है कि राहुल और प्रियंका को अपने संगठन को खुद परिवर्तित करने की जरूरत है, लेकिन मुझे लगता है कि वे बदलाव की जड़ को नहीं देख रहे हैं। अगर वे सचमुच बदलाव की जड़ को समझना चाहते हैं तो उन्हें अपने संगठन को समाज और राजनीति में एक नई दिशा देनी होगी।

लेकिन अगर वे अपने संगठन को खुद परिवर्तित करने की कोशिश करते हैं तो फिर यह सवाल उठता है कि वे बदलाव कैसे लाएंगे? उनके पास ऐसे नेतृत्व और रणनीति क्या होगी जिससे वे समाज में बदलाव ला सकें।
 
अगर राहुल-प्रियंका जी अपने परिवार के नेतृत्व को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो उन्हें अपने संगठन को भी समृद्ध बनाने की जरूरत है। मैं समझता हूँ कि पार्टी की जड़ें गहराई से जुड़ी हुई हैं और बदलने की जरूरत नहीं है, बल्कि उसे मजबूत बनाने की जरूरत है।

लेकिन अगर वे अपने परिवार को नेतृत्व करने के लिए तैयार नहीं हैं, तो उन्हें संगठन में बदलाव लाने का समय आ गया है। यह एक नई दिशा की शुरुआत होगी, जिसमें नए नेतृत्व और रणनीति की जरूरत होगी। मैं उम्मीद करता हूँ कि उन्हें अपने परिवार को समर्थन देने की जरूरत नहीं है, बल्कि संगठन को मजबूत बनाने की जरूरत है।
 
मुझे लगता है कि ये बड़ा गलतफहमी की बात है 🤦‍♂️। राहुल और प्रियंका गांधी दोनों ही अपने-अपने तरीके से काम कर रहे हैं और संगठन में बदलाव लाने की जरूरत नहीं है। वे भाइयों को समझने की कोशिश कर रहे हैं और आम जनता की बात सुनने की कोशिश कर रहे हैं। मुझे लगता है कि उन्हें अपने-अपने तरीके से आगे बढ़ना चाहिए और बदलाव लाने की जरूरत नहीं। वे दोनों ही एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह से जानते हैं और मुझे लगता है कि उन्हें अपने-अपने तरीके से आगे बढ़ना चाहिए।
 
मुझे यह खबर बहुत पसंद आयी है 🤩। मेरा अनुमान है कि राहुल और प्रियंका गांधी अपने संगठन को बदलने की जरूरत है, लेकिन नहीं तो ये बदलाव तभी हो सकता है जब उनके परिवार की बातें भी बदल जाएंगी। मेरी बहन ने मुझे बताया है कि राहुल और प्रियंका के बच्चे बड़े होते हैं तो वे अपने माँ-पापा की जगह लेने लगेंगे। मैं सोचता हूं, यह सच होने दो। हमारे देश की राजनीति में परिवारों की भूमिका बहुत बड़ी है, और अगर परिवार बदलने लगता है तो ये एक अच्छा बदलाव होगा।
 
मुझे तो लगता है कि राहुल और प्रियंका जी अपनी पार्टी को बचाने के लिए बहुत सोच रहे हैं। लेकिन, मेरे दिल में एक सवाल उठता है - ये बदलाव वास्तव में उनके लिए होगा या फिर किसी और की खिड़की में उजागर करने के लिए?

मैंने अपने बचपन से ही देखा है कि पार्टियां बदलती रहती हैं, लेकिन जीवन में हमेशा एक ही बदलाव होता है - बदलाव। जिस बदलाव को राहुल और प्रियंका जी आज सोच रहे हैं, उसे मैं 'खुद' कह सकता हूं। क्योंकि बदलाव की जड़ें हमारे दिल में होती हैं, न कि किसी पार्टी या व्यक्तिगत बदलाव को।
 
क्या बात करो, राहुल और प्रियंका जी, उनके द्वारा की गई कामसूनी में निरंतर बदलते पोर्टफोलियो से लेकर घिसी फोड़ी समाचारों में डाली गई चोटी छाती , बाकी सब एक ही बात सुनते रहे... क्या कोई उनके द्वारा किए गए कामसूनी का एंटेली ने व्यक्त नहीं कर दिया?

मुझे लगता है कि अगर वे अपने पोर्टफोलियो में बदलाव लाने में रुचि रखते तो कुछ वास्तविक बदलाव लाने की संभावना है।
 
बिल्कुल सही कहा, राहुल-जी और प्रियंका-जी को अपने संगठन की नई दिशा की तलाश करनी चाहिए। #बढ़ावा

मुझे लगता है कि एक नया संगठन बनाने से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए बेहतर मौके मिलेंगे। उनको अपनी पक्षपातपूर्ण राजनीति को बदलने और आम जनता की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। #नएदिन

और कुछ भी बदलने की जरूरत नहीं है, बस अपने संस्कारों और आदतों को बदलकर उन्हें समाज में बेहतर रूप से लागू करें। एक नया दौर शुरू करने की जरूरत है। #समृद्धि

किसी भी पार्टी या संगठन को सफल बनाने के लिए, अपने नेताओं और सदस्यों में बदलाव होना चाहिए। उन्हें एक नये दिशा और नए सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। #नयाआवश्यकता
 
अगर राहुल-जी और प्रियंका-जी अपने संगठन को बदल देते, तो फिर भी हमारे देश में कोई फरक नहीं पड़ता 🤷‍♂️। यहाँ कुछ लोग ऐसे हैं जो पहले से ही अपने पद पर बैठे हुए हैं, और फिर उन्हें बदलने की बात करना क्यों करें?

इसके अलावा, अगर हमारे नेताओं में इतनी उम्र की अनुभव और ज्ञान नहीं है, तो फिर कौन सिखाएगा? 🤔 यह देश इतना विकसित हुआ है कि अब शायद किसी भी तरह से शिक्षा और जानकारी मिल सकती है।
 
यह बहुत ही रोचक बात है 🤔। मुझे लगता है कि ये दोनों भाई-बहन अपने-अपने तरीके से काम कर रहे हैं। लेकिन अगर हमारे पार्टी में बदलाव की जरूरत है, तो फिर उन्हें एक-दूसरे से बात करनी चाहिए। शायद वे एक साथ मिलकर अपने-अपने तरीकों से काम कर सकते हैं। प्रियंका जी बहुत ही सक्रिय और ईमानदार हैं, वह जरूर अपने तरीके से कुछ लाएंगी। और राहुल गांधी भी बहुत ही शिक्षित और अनुभवी व्यक्ति हैं। मुझे लगता है कि अगर वे एक साथ मिलकर काम करें, तो हमारे पार्टी में एक अच्छा बदलाव आ सकता है।
 
"सच्चाई से सच्चाई खुद बाहर निकलती है।" 🤔

मुझे लगता है कि पार्टी में ऐसे कई छोटे-छोटे बदलाव हो रहे हैं जिनसे अगर आप भारी बदलाव देखते हैं, तो वहाँ कोई समझ नहीं आता। लेकिन यह सच है कि हर चीज़ में एक नई दिशा खुलती है और हमें उस ओर बढ़ने का अवसर मिलता है।
 
मुझे लगता है कि राहुल-प्रियंका जोड़ी में थोड़ा सा बदलाव जरूरी है। उनकी राजनीतिक यात्रा तो बहुत ही लंबी और खूबसूरत है, लेकिन अब समय है कि उन्हें अपने संगठनों में भी थोड़ा बदलाव लाना चाहिए। देखें, जितनी ही स्थिरता और अनिश्चितता के बीच रूढ़िवादीपन बढ़ता है, हमारी राजनीति कमजोर होती रहती है।

मुझे लगता है कि उन्हें अपने संगठनों में नई ऊर्जाएं और नए विचारों को लाने की जरूरत है। क्या नहीं? एक बार फिर, जैसे कि हमने देखा था, जब राहुल कुमार गांधी ने अपनी पहली पुस्तक लिखी, तो उसकी खूबसूरती और सादगी ने हमें बहुत अच्छी तरह से पसंद आकर्षित किया था।

तो मैं समझता हूं, बदलाव की जरूरत है, और अगर वह बदलाव होता है तो मुझे खुशी होगी।
 
मुझे यह खब्र सुनकर बहुत आश्चर्य हुआ 🤔, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी दोनों में से कौन सा व्यक्ति भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को छोड़कर अन्य पार्टियों में शामिल होने का फैसला कर रहा है? 🤷‍♂️

मेरी राय है कि अगर उन्हें संगठन बदलना है, तो फिर भी वो एक साथ ही नहीं चल सकते, उनकी राजनीतिक दृष्टि अलग-अलग होगी, जिससे पार्टियों के माध्यम से काम करना मुश्किल हो जाएगा। मैं समझता हूं, अगर उन्हें लगता है कि वो अपनी राजनीतिक यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए एक नए दिशा में चलने की जरूरत है, तो फिर अच्छा, जैसे शाहरुख खान ने करियर के अंतिम चरण में एक स्टारर फिल्म बनाई, भी उन्हें अपने राजनीतिक करियर को एक नया दिशा देने में सक्षम होना चाहिए।
 
बताओ क्या हुआ? राहुल-जी और प्रियंका-जी दोनों ही एक साथ थे, लेकिन अब तो लगता है कि वे अलग-अलग दिशाएँ पर चल रहे हैं। मुझे लगता है कि अगर उन्हें अपने संगठन को बदलना है, तो वह समझौता कर सकते थे। लेकिन मुझे ऐसा नहीं लग रहा है। राहुल-जी और प्रियंका-जी दोनों ही एक ही रास्ते पर चल रहे हैं, लेकिन अब वे अलग-अलग संगठन बनाने की बात कर रहे हैं। मुझे लगता है कि यह बहुत ही अजीब है। 😕

मैं समझता हूँ कि बदलाव की जरूरत है, लेकिन अगर हमें बदलाव की जड़ नहीं ढूंढनी है, तो फिर इससे कुछ भी निकल नहीं सकता। मुझे लगता है कि राहुल-जी और प्रियंका-जी दोनों ही एक साथ मिलकर बदलाव लाने की बात कर सकते थे। लेकिन अब वे अलग-अलग दिशाएँ पर चल रहे हैं। 🤔
 
😂 ये तो बहुत ही रोमांचक बात है! राहुल और प्रियंका के अलावा भी कई लोगों ने संगठनों में बदलाव करने पर विचार किया है, जैसे कि शल्य सिंह चौहान, मनिश थपरा आदि।

मैं तो सोचता हूं कि अगर राहुल और प्रियंका अपने संगठन में बदलाव करना चाहती हैं, तो उन्हें पहले अपने विचारों को स्पष्ट कर लेना चाहिए। जैसे कि अगर वे नेतृत्व में बदलाव करना चाहते हैं, तो उन्हें दूसरों पर भरोसा करना चाहिए और अपनी टीम को मजबूत बनाना चाहिए।

लेकिन अगर वे संगठन की रणनीति में बदलाव करना चाहते हैं, तो उन्हें अपने पूर्व अनुभवों से सीखना चाहिए और नए तरीकों को लागू करना चाहिए। यही दिलचस्प है कि राजनीति में हर चीज़ की तरह ही यहां भी हर चीज़ बदलने की जरूरत होती है, तो क्या नहीं बदलना चाहिए! 😊
 
बात तो बिल्कुल, राहुल और प्रियंका जी के लिए यह जरूरी है कि वे अपने संगठन को फिर से देखें और बदलाव लें। दिल्ली में उनकी पार्टी की स्थिति बहुत ही खराब है, लोगों को लगता है कि यहां कुछ भी नहीं हो रहा है। राहुल जी ने कई बार बदलाव की बात कही है, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। प्रियंका जी के लिए इससे भी बदतर है, वह अपने संगठन में खल्लारी है और लोग उस पर खर्च करते हैं। अगर वे अपने संगठन को बदल देंगे तो शायद लोगों को उम्मीद मिलेगी।
 
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