‘राहुल के पास हमारे लिए वक्त नहीं, प्रियंका कमान संभालें’: कांग्रेस से सस्पेंड मोहम्मद मुकीम बोले- खड़गे नहीं हटे, तो कुछ नहीं बदलेगा

अरे, यह रही मोहम्मद मुकीम की बात, जो कांग्रेस से अलग हो गए थे। उन्होंने कहा है कि, “कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की लीडरशिप पर सवाल उठाने वाले हैं। मैंने सोनिया गांधी को एक लेटर लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि उम्र बढ़ने के कारण मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की लीडरशिप प्रभावी नहीं है। मैं चाहता था कि वे युवा नेताओं को आगे लाएं।”
 
मुझे लगता है की मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की युवा नेताओं से तुलना करना चतुराई से नहीं है। उम्र बढ़ने की बात कहकर देश भर में घूमने वाले युवा नेताओं को आगे लाने का तरीका कैसा होगा? मैं समझता हूँ कि मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी दोनों ही बड़े नेताएं हैं, लेकिन युवाओं को सही तरीके से आगे लाने के लिए हमें नए तरीके ढूंढने होंगे।
 
मालूम क्या, यह तो बहुत अजीब बात है कि अरेवन देश में कांग्रेस से अलग होने वालों की गिनती हुई है। मैं समझता हूँ कि उम्र बढ़ने का मतलब है कुछ बदलाव करना चाहिए, लेकिन यहाँ पर मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को अलग नहीं कर सकते। उन्होंने देश को बहुत कुछ दिया है, और फिर भी हमें उनसे विश्वास करना चाहिए। मेरा मानना है कि युवाओं को आगे लाने के लिए, हमें अपने अनुभवों को साझा करना चाहिए, न कि अलग-थलग होना चाहिए।
 
मुझे लगता है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर देर से प्रतिक्रिया देने की बात कहीं अच्छी नहीं है। जब तक हमें अपने नेताओं की अखंडता को लेकर चिंतित रहना चाहिए, तब तक हमारे समाज में भ्रष्टाचार की समस्या दूर नहीं होगी।
 
मुझे लगता है कि, यह सब तो मोहम्मद मुकीम की बड़ी खेल पूरी करने की जानबूझकर कोशिश है। वह ये दावा करते हुए लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं कि कांग्रेस वैसे भी एक व्यवस्थित संगठन नहीं है, तो फिर उन्हें लीडरशिप पर सवाल उठाने के लिए मिलेगा। मुझे लगता है कि, युवा नेताओं को आगे लाने के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी जैसे अनुभवी नेताओं की जरूरत है, न कि किसी नई चीज़ पर आधारित होना 🤔
 
मुकीम जी की बात सुनकर मुझे लगा कि कांग्रेस की नई दिशा में बहुत बड़ा बदलाव हुआ है 🤔. उनकी बात सुनकर लगता है कि उन्होंने सोनिया गांधी जी की सलाह मानी थी। लेकिन उम्र बढ़ने के कारण नेताओं की लीडरशिप पर सवाल उठाना तो एक अच्छी बात नहीं है 🙅‍♂️. यहाँ सरकार भी देख रही होगी, और नेताओं की उम्र बढ़ने से उनके दम पर युवाओं को आगे लाना बड़ा मुश्किल होता है। शायद मुकीम जी ने अच्छा काम किया है ,नए नेताओं को आगे लाने का प्रयास, लेकिन यह भी देखना होगा कि युवा नेताओं को वाकई स्थिरता और अनुभव मिल सकता है या नहीं 🤞.
 
अरे, यह तो मुझे बहुत दिलचस्प लगता है कि, क्यों मोहम्मद मुकीम ने कांग्रेस से अलग होकर अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की है। उनकी बात सुनकर लगता है, कि वे सचमुच उम्र बढ़ने की वजह से मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की लीडरशिप पर सवाल उठाना चाहते थे। लेकिन मैं सोचता हूँ, कि वे समझ नहीं गए कि, युवा नेताओं को आगे लाने के पीछे क्या सच्चाई है। क्या वे वास्तव में जानते हैं, कि युवाओं की जरूरत क्या है? क्या वे समझते हैं कि, राजनीति में सामाजिक मीडिया का महत्व क्या है?
 
मुझे लगता है की मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी जी की भलाई को देखकर तो मुझे खुशी होती, लेकिन उनकी वृद्धावस्था और अनुभव से भी कुछ लोगों को युवाओं की जरूरत महसूस हो रही है, जो भारत के भविष्य को सुधारने में मदद कर सकते थे। मुझे लगता है कि हमें अपने पार्टियों में बदलाव करना चाहिए और नए युवा नेताओं को आगे लाना चाहिए, जिन्हें राजनीति की नई चुनौतियों से खुद मिलकर तालमेल बैठाया हो।
 
मुझे लगता है की, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की इस दूसरी पीढ़ी में जोड़ी अच्छी नहीं लग रही। उम्र बढ़ने पर हमेशा सवाल उठते हैं, लेकिन शायद चुनावों से पहले इन्हें अपनी जगह मजबूत बनानी होगी। युवाओं को आगे लेने का प्रयास करना अच्छा है, लेकिन क्या वे सही राह पर चल रहे हैं? उनकी नेतृत्व शैली में कोई बदलाव आ सकता है या नहीं, यह देखना दिलचस्प होगा।
 
मोहम्मद मुकीम की बात सुनकर मुझे लगता है कि कांग्रेस को अपनी पार्टी की ज़रूरत क्या है? वे सोनिया गांधी ने ही उनकी पार्टी बनाई थी, लेकिन अब वे चाहते हैं कि युवाओं को आगे लाया जाए? मुझे लगता है कि मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी दोनों ही पार्टी की दिशा में तेजी से जा रहे हैं, बस कुछ समय की जरूरत होगी। 🤔

मैंने एक छोटा सा डायाग्राम बनाया है:

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| मल्लिकार्जुन खड़गे |
| राहुल गांधी |
| दोनों ही आगे बढ़ रहे |
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मुझे लगता है कि पार्टी को अपने पास ही रहना चाहिए, युवाओं को आगे लाने की जरूरत नहीं।
 
मुझे लगता है की यह बहुत ही बोरिंग बात है, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी जी की लीडरशिप पर सवाल उठाने वाले तो बस एक्सप्लेनेशन चाहते हैं, क्या वास्तव में कुछ बदलना चाहते हैं? 🤔
मुझे लगता है की उम्र बढ़ने का मतलब युवाओं को आगे लाना तो बिल्कुल सही है, लेकिन यह कहाँ से आ गए की मल्लिकार्जन खड़गे और राहुल गांधी जी इन उम्र में नहीं चल सकते, यह भी कुछ है जिस पर विचार करना चाहिए। 🤷‍♂️
 
मोहम्मद मुकीम की बात सुनकर मुझे खेद है 🤕, वह जैसे पुराने दिनों के नेता तेजी से चलने वाले समय में जगह नहीं बना सकते। उनकी बात मैं समझता हूँ, लेकिन मुझे लगता है कि मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी जैसे नेताओं को बदलने के बजाय हमें उन्हें नई चुनौतियों से मिलने देना चाहिए 🤔
 
मुझे लगता है कि मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की लीडरशिप पर सवाल उठाने से पार्टी में बदलाव आ सकता है, जिससे नई ऊँचाइयाँ और नए विचारों को आगे बढ़ाया जा सकता है
 
मेरी बात है की, यह बहुत दिलचस्प है! मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की लीडरशिप पर सवाल उठाना एक बड़ा निर्णय होगा, खासकर उम्र बढ़ने की बात में आ रही है। मैं समझता हूँ कि सोनिया गांधी ने उनकी जगह युवा नेताओं को आगे लाने का प्रयास किया था, लेकिन यह देखना रोचक है कि, क्या ऐसा करने में सफल रहेगा।
 
मुकीम जी की बात सही है, लेकिन उन्होंने कुछ भी स्पष्ट नहीं किया। मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी दोनों युवा नहीं हैं! 🙄 उम्र बढ़ने की बात में सब सहमत है, लेकिन मल्लिकार्जन खड़गे को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने से पहले बहुत से अनुभव हुए हैं। और राहुल गांधी ने भी बहुत जिम्मेदारियाँ संभाली हैं।
 
मुझे लगता है की, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी जैसे लीडरशिप में उत्तराधिकारी ढूंढना जरूरी है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ नई चुनौतियों का सामना करना भी पड़ता है, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि हमें उनकी उम्र पर ही निर्णय लेना चाहिए। युवा नेताओं को आगे आने देने से न केवल कांग्रेस मजबूत होगी, बल्कि हमारा राजनीतिक व्यवस्था भी मजबूत होगी।
 
मुकीम जी की बात सुनकर मुझे बहुत खुशी हुई 😊, वाह, वह तो सच्चे नेता हैं! मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की लीडरशिप पर सवाल उठाने वाले हैं? अरे, यह तो भ्रष्टाचार की बात नहीं है, बल्कि उनकी उम्र बढ़ने का स्वागत करने की बात है 🤔, जो कि सच्ची नेतृत्व की परिभाषा है। मुकीम जी ने सोनिया गांधी से लिखित पत्र पढ़कर मुझे बहुत प्रेरणा मिली है, वह तो युवाओं की बात करने वाले नेता हैं और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए हमेशा समर्थन करेंगे।
 
मुझे लगता है की, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी तो बिल्कुल फ़ायदा नहीं करते, वे दोनों का उम्र बढ़ने से कोई फ़ायदा नहीं है, मुझे लगता है की, वे दोनों थोड़े पुराने हैं, और युवाओं की बातें समझने में सक्षम नहीं हैं। मैं तो उनके साथ कुछ समय पहले एक कॉफ़ी की थी, वह ने मुझे बताया था कि, वे दोनों अपनी नौकरी छोड़ने जा रहे हैं, और अब कांग्रेस अध्यक्ष बनने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन मुझे लगता है, कि वे दोनों समझ नहीं पाए, कि, क्या तो युवाओं की समस्याओं से निपटने के लिए नए नेता चाहिए जो तेज़ी से सोचते हैं, और नई तकनीक का इस्तेमाल करें।
 
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