संडे जज्बात-ब्लास्ट में बेटा मरा, बहू ने लाश नहीं दी: नए कपड़े में उसके चीथड़े पड़े थे, हम इतने अभागे कि मिट्टी भी नहीं दे पाए

मैंने उसके हाथ जोड़े, मेरे जेठ ने अपनी पगड़ी तक उसके पैरों में रख दी। क्या पता था इस शाम तक घर में मातम छा जाएगा। हम लोग दिल्ली के लिए निकल गए। जब मोहसिन के घर पहुंचे तो वहां सभी रिश्तेदारों की भीड़ इकट्ठा थी। नए कपड़ों में लिपटी हुई मेरे बच्चे की लाश सामने रखी थी। उसके इंतकाल से पहले घर में एक शादी थी। उसके लिए ही मेरे बेटे ने कपड़े खरीदे थे, जो उसने मरते वक्त पहन रखे थे।

किसी ने बताया कि उसका एक हाथ 5 फीट दूर पड़ा था, उसे पोस्टमार्टम में जोड़ा गया है। मुंह तो ठीक था लेकिन हाथ और टांगों पर अनगिनत जख्म थे।

मय्यत का वक्त हो रहा था। मोहसिन की पत्नी और ससुर जिद करने लगे कि मय्यत दिल्ली में ही होगी। हम इसके लिए तैयार नहीं थे, क्योंकि मेरठ के कब्रिस्तान में ही हमारे पुरखों की कब्रे हैं। इसलिए हम चाहते थे कि मोहसिन की कब्र भी वहीं हो। उसकी पत्नी मानने को तैयार नहीं थी।

वह मेरे बच्चे को लेकर चली गई। मेरा मोहसिन बचपन से ही शरारती था। खाने में तो कुछ भी पकाकर दे दो कभी मना नहीं करता था, लेकिन हां कभी पैदल नहीं चलता था।

उसने मुझसे कभी कुछ नहीं मांगा, लेकिन हां कभी कहीं जाना होता तो कहता मैं नहीं जाऊंगा जब तक मुझे नई पैंट-शर्ट लेकर नहीं देते। इस हद तक शौकीन था कि उसका इंतकाल भी नए कपड़ों में हुआ।

यहां तक कि साधारण भी अगर किसी रिश्तेदारी में जाना होता था तो नए कपड़े पहने बिना नहीं जाता था। मजदूर लोग हैं हम लोग। मेरे पति लूम पर काम करते हैं। बच्चों को बहुत पढ़ा तो नहीं सके हम। बस जो बन पाता था उनके लिए करते थे।

मोहसिन ने छोटी उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था। घर में ही पावर लूम था। बच्चे ने बचपन से अपने अब्बू को ये काम करते हुए देखा थ। इसलिए बच्चे भी यही काम करने लगे।

मोहसिन की शादी को लगभग 14 साल हो चुके थे। तीन साल पहले हमें बेटियों की शादी के लिए घर बेचना पड़ा। जैसे ही हम किराए के घर में शिफ्ट हुए उसकी पत्नी कहने लगी कि मैं तो दिल्ली जाउंगी। दरअसल, वो दिल्ली की रहने वाली थी। इसलिए तीन साल पहले मोहसिन को साथ लेकर दिल्ली चली गई। अगर वो मेरे बेटे को दिल्ली न ले गई होती तो आज मेरा बेटा जिंदा होता।

जब वो पहली बार दिल्ली गया था, तो मुझसे कुछ पैसे भी लेकर गया था। कहने लगा कि कपड़े का काम करुंगा। उसने चांदनी चौक मे चादरों का काम किया लेकिन चला नहीं। तब वो कहने लगा कि दो छोटे बच्चे हैं मेरे, कम से कम उनके कपड़े लत्ते और खाने का इंतजाम तो करना ही होगा। इसलिए पिछले साल यहां आकर फिर से लूम पर काम करने लगा।

मोहसिन की पत्नी नहीं चाहती थी कि वो लूम पर काम करे। इसलिए एक महीने बाद ही मेरा बच्चा फिर से दिल्ली चला गया। वहां उसने बैट्री रिक्शा लिया।
 
🤕 मुझे यह सब बहुत दुखद लग रहा है! क्या हमारी समाज में भाई-बहनों को साथ छोड़कर चलना एक आसान गम्भीरता नहीं है? 🤔 पूरी तरह से सही सोच रही हूँ, जब वो अपने पति के साथ दिल्ली आ गई थी, तो मोहसिन ने अपने बच्चों की जरूरतों को पूरा करने के लिए लूम पर काम करना शुरू कर दिया था। लेकिन फिर भी उसकी पत्नी ने उसे छोड़कर चला गया और वहां से अपने बच्चों को लेकर चली। 🌟 यह बहुत ही सख्त बात है कि जब हमारे बच्चे बड़े होते जाएं, तो वह अपने पति को छोड़कर चले जाएंगे। उनका दुःख भी हमारा दुःख होगा। 🌹
 
दिल्ली के बुरे हिस्सों में गरीबी और अनाथता की समस्या बहुत ज्यादा है। यह देखकर मुझे बहुत दर्द होता है कि कैसे गरीब परिवार अपने बच्चे को खोने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

मेरे अनुसार, शिक्षा और रोजगार के अवसरों में सुधार करने से हम अकेली समस्याओं से नहीं बल्कि कई समस्याओं का समाधान कर सकते हैं।

शादियों में नए कपड़े पहनने का यह परंपरागत मुद्दा, एक और गरीबी का संकेत है।

इसलिए, हमें इस विषय पर जागरूकता फैलाने की जरूरत है ताकि लोग अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकें।
 
😔 यह तो बहुत दर्दनाक किसी की जान जाने की खबर है। मोहसिन जी की शादी को लगभग 14 साल हो चुका था, और वह अपने परिवार के लिए बहुत प्यार करता था। उसकी पत्नी की कहानी भी बहुत दुखद है, वह तो दिल्ली की रहने वाली थी, लेकिन उसने मोहसिन को साथ लेकर आंकहिंल किया था, फिर जब उसे अपनी पत्नी की बेटियों की शादी के लिए घर बेचना पड़ा तो वह दिल्ली निकल गई और वहां पर ही जीवन छोड़कर चली गई। यह तो बहुत भयानक है। मोहसिन जी के बच्चे की कहानी भी बहुत दुखद है, वह तो अपने पिता से खेलता-फिरता, अब उसके लिए सब कुछ समाप्त हो गया है। 😢 मैं इस समाचार से बहुत दुखी हूं, लेकिन यह भी सच है कि हमें कभी भी अपने परिवार की खुशियों और शादियों में खुश रहना चाहिए।
 
😔 इस दुखद घटना ने हमें सोचने पर मजबूर किया है कि कैसे एक छोटे से इंसान की जिंदगी इतनी कमजोर हो सकती है। मोहसिन की कहानी हमें यह दर्शाती है कि गरीबी और लिमिटेड ओप्शन्स के बंधन में फंसना बहुत मुश्किल होता है। 💔

हमें यह सोचने पर मजबूर करना चाहिए कि जैसे-जैसे हम अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं, वैसे-वैसे उनके जीवन में सुख-समृद्धि का दर्वा खुलता है। लेकिन जब हम ऐसे नहीं कर सकते, तो कमजोर और असहाय होने की कितनी आसानी होती है! 😕

इस घटना ने मुझे यह सोचने पर मजबूर किया है कि कैसे हम अपने बच्चों को सही रास्ते पर चलने में मदद कर सकते हैं। उन्हें शिक्षित करना, उनके भविष्य के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करना, और उनकी जरूरतों को समझना - यह सब हमें अपने बच्चों के साथ जुड़ने और उनकी सुरक्षा के लिए कड़ी मेहनत करने का मौका देता है। 💪
 
मोहसिन की कहानी बहुत दुखद लग रही है 🤕😔। मैं समझ नहीं पाया कि क्यों उसकी पत्नी ने दिल्ली को चुना। हमारे मठरे की तीन साल पहले भी घर बेचकर दिल्ली चले गए थे। तब मेरे बच्चे और उनके जेठ भाई बहुत दुखी हुए थे। वहां लोगों ने उन्हें शादियों को मनाने के लिए कहा था।

अब यह सोचकर खेद होता है कि मोहसिन की पत्नी और उसका जेठ चालू थे, इसलिए वो दिल्ली नहीं चल पाये। अगर उन्हें शांति मिलने निकल गया तो आज वह भी जिंदा होता। 😢
 
मुझे यह तो बहुत दुखद है 🤕। मोहसिन की शादी को लगभग 14 साल हो चुके थे, और उसकी पत्नी अब भी दिल्ली में रहना नहीं चाहती। लेकिन जब मेरे बेटे को यहाँ आना पड़ा, तो उसने अपने पति के साथ चले गए। मोहसिन एक मजदूर था, जो अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए काम करता था। वह अपने बेटे को बहुत प्यार करता था, और अब उसका पता चलने से मैं बहुत दुखी हूँ।

मुझे लगता है कि हमें अपने परिवारों की जरूरतों को समझना चाहिए और एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए। मोहसिन ने अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए बहुत कुछ सacrificed था, और अब उसका इंतकाल हो गया है।
 
जानवर मरने की तरह तो देखो, यह लड़का तो खुद जिंदगी नहीं जी पाया, उसके बच्चे तो अभी भी हैं लेकिन मेरे बेटे जिंदा नहीं हैं। मोहसिन ने अपने परिवार के लिए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन शादी और रिश्तों के खिलाफ लड़ते समय, उनकी जान गई। यह दुर्घटना तो एक पूरे समाज की जिम्मेदारी है। मैं चाहता हूँ कि सरकार इस तरह की दुर्घटनाओं से निपटने के लिए कुछ बेहतर करने की कोशिश करे। हमें अपने परिवारों और समाज के प्रति जिम्मेदारी बनानी होगी। 💔
 
🤕 यह तो बहुत ही दुखद विषय है मोहसिन की। उसकी शादी की तरह ही उसकी मृत्यु भी सोचते ही दिल्ली जाने लगी। उसके बच्चों की परवाह किए बिना पति ने अपने रिश्तेदारों को सब कुछ बताया। मैं तो हमेशा कहाता हूँ कि जिंदगी में भी खुशियाँ और दुख होते हैं, लेकिन यह मामला बहुत ही दिलचस्प है। मोहसिन ने अपने रिश्तेदारों को बताया था कि उसकी पत्नी चाहती है कि वह दिल्ली जाए, परन्तु वो नहीं चाहती थी। यह तो बहुत ही संदेश देता है कि जिंदगी में हमें अपने परिवार और रिश्तेदारों का ख्याल रखना होता है।
 
मोहसिन की कहानी बहुत ही दर्दनाक है 🤕। उसकी जिंदगी में इतने बदलाव आए, फिर भी वह अपने परिवार को खुश रखने की कोशिश करता रहा। और उसके बच्चों को लेकर, वह बहुत प्यार करता था, लेकिन उनकी शिक्षा और भविष्य की तैयारी के लिए उसे अपने सपनों को नापना पड़ा। मुझे लगता है कि अगर हम सब इसी तरह काम पर बैठकर अपने परिवारों को खुश रखने की कोशिश करते, तो जिंदगी बहुत ही कठिन हो जाएगी। लेकिन फिर भी, हमें अपने बच्चों को अच्छा जीवन देने के लिए कुछ करना चाहिए 🙏
 
😔 यह तो बहुत दुखद समाचार है। मैंने भी ऐसे कई दोस्तों को जानता हूं जिनके बच्चे विवाहित होने पर दिल्ली चले गए। मोहसिन की कहानी तो एक बड़ा संदेश है कि हमारे समाज में गरीबी और बेरोजगारी की समस्या बहुत गंभीर है। यह दुखद घटना सिर्फ मोहसिन पर नहीं बल्कि हमारे समाज और राष्ट्रीय विकास पर भी पड़ रही है। 🤕

अगर सरकार ने वास्तव में गरीबों की मदद करनी शुरू कर दी, तो इन जैसी घटनाओं की संख्या कम होती। हमारे प्रधानमंत्री जी को इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए। हमें अपने पुरुषों और बच्चों के कल्याण के लिए काम करना चाहिए। 🙏
 
अरे, यार, तुमने देखा कि मोहसिन की पत्नी ने तो नई पैंट-शर्ट लेकर अपने बच्चे को भेज दिया था, इसीलिए वहां उसकी लाश सामने रखी गई। यह बात खैर, लेकिन इतनी बड़ी परिस्थिति में घर से निकलने से पहले तो शादी होनी चाहिए। और फिर वाह, उनके बच्चे का हाथ 5 फीट दूर पड़ा था, उसे पोस्टमार्टम में जोड़ दिया गया था। ये तो बहुत ही दुखद बात है।
 
बेटियों की शादी करने के पहले तो हमें घर बेचना पड़ता है। मोहसिन की पत्नी तो दिल्ली की रहने वाली थी। ऐसे में कैसे पूरा परिवार आ सकता? 🤔

मेरे भाई ने उसके हाथ जोड़े और रिश्तेदारों को शादी की मांग ली, लेकिन मोहसिन की पत्नी नहीं चाहती थी। वह तो दिल्ली जाना पसंद करती थी। मैं समझता हूँ। हम भी मेरठ से दिल्ली आ गए, इसलिए क्यों ना? 🚂

मोहसिन की शादी के बाद मेरे बेटे को कपड़े खरीदने के लिए कहा गया। वह तो जैसे ही मरता था, नए कपड़ों में पहन लेता था। यह देखकर मुझे खेद हुआ। 🤕

मैंने सोचा कि मोहसिन ने अपनी पत्नी की इच्छाओं को समझ लिया था। लेकिन लगता है वह समझ नहीं पाया था। शादी में तो दिल्ली जाना चाहिए, परिवार की स्थिति समझनी भी चाहिए। 🤝

मोहसिन के बच्चों ने उसे लूम पर काम करने के लिए देखा, वही उन्हें भी ऐसा ही करने का मौका देना चाहिए। हमारी संस्कृति में मजदूरी की बात नहीं होती, फिर क्यों? 🤔
 
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