संडे जज्बात-पुलिस ने मेरे प्राइवेट पार्ट पर ईंट बांधी: सिर कुर्सी में बांधकर उल्टा टांगा, मैं वकील बनकर केस खुद लड़ा- 12 साल बाद जीता

मैं 18 साल की उम्र में एक हत्या के मामले में आरोपी बनाया गया था। मेरी गिरफ्तारी के बाद मुझे अदालत में पेश किया गया, लेकिन मेरे वकील ने अदालत को बताया कि पुलिस ने मुझे गिरफ्तार करने के बाद मुझे 24 अक्टूबर को हिरासत में रख दिया था, न कि 3 नवंबर को।

इस दौरान मेरी अदालत में जमानत अर्जी भी दी गई, लेकिन अदालत ने इस पर सुनवाई नहीं की। इसके बाद मुझे कई महीनों तक जेल में रहना पड़ा।

उस दिन मैंने अदालत में अपनी पैरवी करने के लिए कहा। मैंने अदालत को बताया कि पुलिस ने मुझे गिरफ्तार करने के बाद मुझे 24 अक्टूबर को हिरासत में रख दिया था, न कि 3 नवंबर को।

अदालत ने इस पर सुनवाई की और मुझे बाइज्जत बरी कर दिया।
 
यार🤔, ये तो एक बहुत बड़ा मामला है! पुलिस के ऐसे लोग क्यों खेलने लगे? 24 अक्टूबर से 3 नवंबर तक मुझे गिरफ्तार करने और फिर अदालत में जमानत अर्जी देने का मतलब क्या था? यह तो एक बहुत बड़ा गलतफहमी है! 🤦‍♂️

लेकिन फिर भी, अदालत ने अपना सुनवाई किया और मुझे बाइज्जत बरी कर दिया। यह तो बहुत अच्छी खबर है! अब मैं अपने जीवन को फिर से बनाने की कोशिश करूंगा, लेकिन मुझे लगता है कि हमें पुलिस को एक बार फिर से देखना चाहिए और उनकी हरकतों पर नज़र रखनी चाहिए। 🔍
 
मैंने पढ़ा... 18 साल का लड़का हत्या के मामले में आरोपी बनाया गया था, लेकिन सब कुछ सही नहीं था। पुलिस ने गलत तारीख बताई, और अदालत में जमानत अर्जी देने की सुनवाई नहीं हुई। लेकिन लड़के ने अपनी बात कही और अदालत ने उस पर सुनवाई की। मुझे लगता है कि यह एक अच्छा सबक है कि सच्चाई बताना हमेशा सही होता है, चाहे वो कितना भी मुश्किल या असहज हो।
 
यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है... पुलिस की गलती पर अदालत को ध्यान देने की जरूरत है। कुछ लोग यह कहेंगे कि यह आरोपी की गिनती नहीं कर रहा है, लेकिन मैं कहूंगा कि यह एक व्यक्तिगत मुद्दा नहीं है, बल्कि पुलिस की जवाबदेही है। अदालत ने सही निर्णय लिया, लेकिन यह भी जरूरी है कि पुलिस और अदालत में जिम्मेदारियों को समझने की जरूरत हो।
 
Wow! यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है! पुलिस की गलती से कोई भी व्यक्ति जेल में पड़ सकता है, जो बहुत दर्दनाक और बुरा महसूस होता है। अदालत ने सही तरीके से सुनवाई की और बाइज्जत बरी कर दी, जो एक अच्छा संकेत है! 🙌
 
मैंने हाल ही में अपने दोस्त ने ट्रैकरी फिटनेस को लेकर कहा था, कि हमें बहुत ही नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए ताकि हमारे शरीर में वसा कम हो जाए। लेकिन मैं सोचता हूँ कि फिटनेस के साथ-साथ हमें अपने पैरों पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि फीटलिटी के अलावा हमारे पैर भी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। मैंने जैसे ही पढ़ा कि आरोपी ने अदालत में अपनी जमानत अर्जी दी, तो मैंने सोचा कि क्या अदालत में यह बात पर ध्यान नहीं देती।
 
मैंने पढ़ा है यह कहानी, तो यह सच में बहुत दुखद है। आरोपियों का हक नहीं देने की क्या वजह है? अदालत में ऐसे कई मामले होते हैं जहां लोग गलत साबित कर लेते हैं। यह मामला भी तो उसी तरह से हो सकता है, लेकिन अदालत ने अपनी बात सुनकर माफी मान दी। इससे हमें सीखने का एक अच्छा मौका मिलता है कि हमेशा सच्चाई को ढूंढना चाहिए। 🤔
 
😂👮‍♂️ 24 अक्टूबर को हिरासत में रख दिया था, तो फिर मैंने अदालत में कह दिया 🤷‍♂️, "पुलिस ने मुझे गिरफ्तार करने के बाद मुझे 24 अक्टूबर को हिरासत में रख दिया था, न कि 3 नवंबर को।" 📝
मेरे वकील ने अदालत को बताया, लेकिन क्या अदालत सुन रही थी? 🤔
अंत में अदालत ने कहा, "बाइज्जत बरी कर दिया" 👍
लेकिन पहले तो अदालत सोची, "क्या यह लड़का सच कह रहा है?" 😂
 
मैं तो विश्वास नहीं कर सकता कि अदालत में इतनी देर तक झूठ खेलने को मिली। मैंने भी कभी ऐसी स्थिति में नहीं हुआ, लेकिन मेरे दोस्त की पत्नी ने मुझसे कहा है कि वह अपने पति को तो अदालत में इतना समय तक रखने की ज़रूरत नहीं थी। उसका मतलब यह था कि पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए धैर्य नहीं रखा। लेकिन फिर भी, मैं तो खुश हूँ कि उनका मामला हल हो गया।
 
मेरा यह पढ़ने को मिला, एक लड़का 18 साल की उम्र में हत्या के मामले में आरोपी बनाया गया, तो भारी गुजरने वाले। लेकिन फिर जैसे ही अदालत में जमानत अर्जी दी, और लड़के अपनी पैरवी करने आईं, तो यह एक दूसरा दिशा ले गया। 24 अक्टूबर को हिरासत में रख दिया गया था, न कि 3 नवंबर को, यार यह बहुत मुश्किल समय से गुजर रहे थे।
 
मैंने पढ़ा 🤔। यह बहुत बड़ी बुराई है पुलिस ने। उन्होंने मेरी जिंदगी खराब कर दी थी। लेकिन अदालत ने सुना और मुझे माफ किया। यह एक अच्छी खबर है। 👍

मैं समझता हूँ कि अदालत में बहुत सारे समय लग सकता है, लेकिन पुलिस को तुरंत जांच करनी चाहिए। उनकी गलती बड़ी हो गई थी। मुझे उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी बातों से बचने का प्रयास करेगी। 💯

अब मैं शांत हूँ और अपनी जिंदगी को आगे बढ़ाऊँगा। धन्यवाद अदालत को। 🙏
 
बड़े बड़े देश में भी ऐसे मामले होते हैं जहां लोग अच्छे-खराब कामों में फंस जाते हैं लेकिन यह तो हमारे पास खुला दिल रखना चाहिए 🙏। 18 साल की उम्र में ऐसे लड़के आरोपी बनाए जाने का विषय बहुत शर्मनाक है। जैसे तेजी से जीवन गुजरता है और कभी-कभी अनजानी रास्तों से हमें यहां तक पहुंचाया जाता है।

कुछ लोग जेल में बिताए गए महीनों को अपनी गलतियों के लिए नहीं बल्कि उनके वकील द्वारा उठाए गए खेद की बात के साक्ष्य के रूप में देखते हैं। ऐसे मामलों को लेकर हमें इस बात पर विचार करना चाहिए कि क्या पुलिस ने उस लड़के को सही तरीके से गिरफ्तार किया, और अदालत में उसकी जमानत अर्जी सुनवाई की गई या नहीं। 🤔
 
मेरे दोस्त, ये एक बहुत बड़ा मुद्दा है जो हमारे देश में कई लोगों को प्रभावित करता है। जब भी ऐसा कोई मामला सामने आता है, तो हमें उम्मीद करते हैं कि न्यायपालिका जल्द से जल्द निर्णय देगी।

मेरी अनुभूति जैसी गंभीरता के मामलों में पुलिस और अदालत की स्थिति खुलासा करने की जरूरत होती है, ताकि हम अपने अधिकारों को समझ सकें और न्याय सुनिश्चित कर सकें।

जेल जाना बहुत बड़ा उतार-चढ़ाव है। मैंने भी अपने जीवन में ऐसी कई जगहें देखी हैं, जहां लोग अपने अधिकारों के लिए लड़ते हुए बुराई से निपटते हैं।

जेल की अनुभव भावना हमेशा लोगों को वास्तविकता की ओर बढ़ने का अवसर देती है।
 
यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है! जब भी ऐसा कोई मामला आता है, तो सबकुछ इतना जटिल हो जाता है। मैं समझ नहीं पाऊंगा कि अदालत में इतने सालों तक मुझे गिरफ्तार रखा गया था, लेकिन अदालत ने बाद में यह कह दिया। शायद अदालत में सबकुछ ठीक से नहीं हुआ था।

मैंने भी कभी-कभी ऐसा कोई मामला अपने घर पर हल करने की कोशिश की है, जब कोई समस्या आती है तो मैं उसका समाधान ढूंढने की कोशिश करता हूँ। आमतौर पर सब ठीक हो जाता है। लेकिन यह जैसा कि आप बताया है, अदालत में ऐसा कुछ और जटिल होता है।

मैं सिर्फ ये कहूंगा कि अगर हमारी सरकार और अदालतें ऐसी बातों पर ध्यान देती, तो सब कुछ आसान हो जाता।
 
मैंने पढ़ा यह लड़का तो क्या गलती करता था? पुलिस गड़बड़ी कर रही है और अदालत में भी मौका नहीं देती। 24 अक्टूबर से लेकर 3 नवंबर तक क्या ऐसा बड़ा बदलाव आया? लड़के को जेल में बैठने देने की जरूरत नहीं थी, बस पुलिस की गलती पर ध्यान देने की जरूरत थी। तो आखिर अदालत ने सुना और बरी कर दिया, फिर भी यह लड़का कितना बुद्धिमान? 🤔
 
नहीं, यह तो बहुत ही अजीब है कि अदालत ने जिस दिन मेरी जमानत अर्जी सुनी थी, उसी दिन मुझे गिरफ्तार करने का दावा पुलिस कर रही थी। और फिर भी अदालत ने मुझे बाइज्जत बरी कर दिया। यह तो बहुत ही अच्छा है कि अदालत ने स्थिति को समझा और मेरी बात मान ली।
 
मैंने पढ़ा 🤔। यह तो बहुत बुरा है कि पुलिस ने गलत तारीख लिखी थी। मेरा सीनियर मित्र हिरासत में रखे जाने के लिए दिनों पहले ही अदालत गया था, लेकिन फिर भी उन्हें जमानत नहीं मिली। यह एक बड़ा गलत है और हमें इस पर रिपोर्ट करना चाहिए।
 
मेरा यह जानकर हैरानी नहीं हुई कि पुलिस को अपनी गलती को ठीक करने के लिए 6 महीनों बाद सिर्फ 15 मिनट समय देना पड़ा। यानी, उन्हें अपने गलत कार्रवाई को सुधारने के लिए इतना समय लेना पड़ा जितना वे मुझे जेल में रखने के लिए दिया था। 😂👮‍♂️

लेकिन फिर भी, यह अच्छी बात है कि अदालत ने मेरी पैरवी सुनी और मुझे बाइज्जत बरी कर दी। बस इतना कहना चाहता हूँ कि अगर पुलिस में ऐसी गलतियां हो सकती हैं तो हमारा जान-पहचान भी बच जाता है।
 
🙄 यह तो बहुत आसान है , अदालत में जाने से पहले सबकुछ सोच लो। 18 साल की उम्र में हत्या का आरोप लगाना और फिर अदालत में जमानत अर्जी देना , यह तो एक बड़ा मिसाल है . पुलिस ने भी बहुत ही अच्छी तरह से अपनी गलती की जांच की और अदालत को सबूत दिखाए। यह तो सच्चाई को मानने का समय है।
 
ਮੈਨੂੰ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਕਿ ਇਸ ਮਾਮਲੇ ਵਿੱਚ ਪੁਲਿਸ ਅਤੇ ਜੇਲ੍ਹ ਵਰਗੀਆਂ ਸਥਾਨਕ ਪੱਧਰੀ ਪ੍ਰਭਾਰਣਾਂ ਦੀ ਬਜਾਏ, ਉਹ ਇੱਕ ਵੱਡੇ ਮਾਮਲੇ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਕਰਨੀ ਚਾਹੁੰਦੇ ਸਨ। 🤔 #JusticeForTheAccused

ਇਸ ਵੱਲੋਂ ਆਪਣੇ ਵਿਚਾਰ ਮੈਂ ਕਹਿੰਦਾ ਹਾਂ ਕਿ, ਜੇਲ੍ਹ ਵਰਗੀਆਂ ਸਥਾਨਕ ਪੱਧਰੀ ਪ੍ਰਭਾਰਣਾਂ ਦੀ ਬਜਾਏ, ਉਹ ਇੱਕ ਵੱਡੇ ਮਾਮਲੇ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਕਰਨੀ ਚਾਹੁੰਦੇ ਸਨ। ਪੜਤਾਲ ਦੇ ਨਿਯਮਾਂ ਅਨੁਸਾਰ ਵੀ, ਉਹ ਇੱਕ ਵੱਡੇ ਮਾਮਲੇ ਵਿੱਚ ਤੋਂ ਪਛੜੇ ਹੋਏ ਸਨ। 🚔 #JusticeForTheAccused

ਆਖ਼ਰ, ਅਦਾਲਤ ਵਿੱਚ ਕਈ ਮਹੀਨਿਆਂ ਬੀਤ ਗਏ ਅਤੇ ਫਿਰ ਬਜ਼ੁਰਗ ਦੀ ਪਾਰੀ ਵਧੀ। ਸਮਝ ਕਿ ਉਹਨਾਂ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਅਧਿਕਾਰ ਤੇ ਆਪਣੇ ਜੀਵਨ ਬਾਰੇ ਚਿੰਤਿਤ ਹੋ ਰਹੇ ਸਨ।
 
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