मैं 18 साल की उम्र में एक हत्या के मामले में आरोपी बनाया गया था। मेरी गिरफ्तारी के बाद मुझे अदालत में पेश किया गया, लेकिन मेरे वकील ने अदालत को बताया कि पुलिस ने मुझे गिरफ्तार करने के बाद मुझे 24 अक्टूबर को हिरासत में रख दिया था, न कि 3 नवंबर को।
इस दौरान मेरी अदालत में जमानत अर्जी भी दी गई, लेकिन अदालत ने इस पर सुनवाई नहीं की। इसके बाद मुझे कई महीनों तक जेल में रहना पड़ा।
उस दिन मैंने अदालत में अपनी पैरवी करने के लिए कहा। मैंने अदालत को बताया कि पुलिस ने मुझे गिरफ्तार करने के बाद मुझे 24 अक्टूबर को हिरासत में रख दिया था, न कि 3 नवंबर को।
अदालत ने इस पर सुनवाई की और मुझे बाइज्जत बरी कर दिया।
इस दौरान मेरी अदालत में जमानत अर्जी भी दी गई, लेकिन अदालत ने इस पर सुनवाई नहीं की। इसके बाद मुझे कई महीनों तक जेल में रहना पड़ा।
उस दिन मैंने अदालत में अपनी पैरवी करने के लिए कहा। मैंने अदालत को बताया कि पुलिस ने मुझे गिरफ्तार करने के बाद मुझे 24 अक्टूबर को हिरासत में रख दिया था, न कि 3 नवंबर को।
अदालत ने इस पर सुनवाई की और मुझे बाइज्जत बरी कर दिया।