संडे जज्बात-टीबी से मेरा पूरा परिवार खत्म हुआ: आखिरी सहारा भाई भी मरा, सगे-संबंधी मुझे छूने से डरने लगे- एक अजनबी ने गोद लेकर जिंदगी दी

मुझे लगता है कि लोगों को अपने चाचा-भाई जैसे रिश्तेदारों के प्रति अधिक सहानुभूति और समझदारी की जरूरत है। दीपक रावत जी ने बिल्कुल सही कहा है कि लोग अपने सामाजिक ख्यालों पर ही नहीं, बल्कि देशवासियों पर ताना बनाते रहते हैं।

मुझे लगता है कि हमें अपने रिश्तेदारों के प्रति अधिक समझदारी और सहानुभूति की जरूरत है। जब हम अपने चाचा-भाई जैसे लोगों के साथ अच्छे संबंध बनाते हैं, तो वे हमें अपने जीवन में सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

अब देखें, दीपक रावत जी ने अपने सामाजिक ख्यालों पर ही नहीं, बल्कि देशवासियों पर भी ताना बनाया है। मुझे लगता है कि हमें अपने देश के लिए एक-दूसरे के प्रति अधिक सहानुभूति और समझदारी की जरूरत है।
 
🤔 तो दीपक रावत की बात सुनकर मुझे लगा कि वह अपने चाचा और भाई जैसे एक पारिवारिक संदर्भ को लेकर बहुत ही ज्यादा व्यक्तिगत बना रहे हैं। 😐 लगता है कि उन्होंने अपने विचारों को इतना रिश्तेदारी पर आधारित कर दिया है कि अब वह देश के लिए सोच पाने में असमर्थ हो गए हैं।

🤷‍♂️ अगर हम एक देश के निर्माण और समृद्धि को देखते हैं तो हमें अपने रिश्तेदारों जैसी छोटी-छोटी चीजों से परहेज नहीं करना चाहिए। 🌎 देश के विकास के लिए हमें हर क्षेत्र में सुधार करना होगा, न कि एक ही रिश्तेदार को लेकर ही बात करनी होगी। 💬
 
मुझे यह बात बहुत पसंद आ रही है कि लोग अपने विचार व्यक्त करें 🤔। दीपक रावत जी ने सच कहा है, उनके चाचा और भाई को ताना बनाना एक बड़ी गलती है। लेकिन मुझे लगता है कि अगर हम अपने परिवार के साथ खुलकर बात करें और समस्याओं का समाधान ढूंढने की कोशिश करें, तो सब कुछ आसान हो जाएगा 💬
 
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