संडे जज्बात-टीबी से मेरा पूरा परिवार खत्म हुआ: आखिरी सहारा भाई भी मरा, सगे-संबंधी मुझे छूने से डरने लगे- एक अजनबी ने गोद लेकर जिंदगी दी

अरे दोस्त! यह तो बहुत ही गंभीर विषय है... जब 100 साल पहले ऐसा कुछ भी नहीं था, तो फिर आज कैसे हुआ? मुझे लगता है कि हमारे समाज में पुरुषत्व की परंपराओं ने ज़्यादा विकृतियाँ पहुँचा दी हैं। जब भी लड़की या महिला किसी को रेप कर रही है, तो बहुत ही गंभीर मान्यता नहीं मिलती। लेकिन अगर पुरुष रेप करते हैं, तो वे ठीक-ठाक दोषी माने जाते हैं और उनके खिलाफ़ कड़ी से कड़ी सज़ा होती है। यह बहुत ही असमानता है, हमें इस पर सोचना चाहिए।
 
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