स्कैन कर बांग्लादेशी बताने वाली मशीन का सच क्या: SHO बोले- मजाक था, लोगों ने कहा- बिहार से हैं, पुलिस बार-बार कागज मांग रही

गाजियाबाद पुलिस ने बिहारी मार्केट में रहने वालों से पूछताछ की, जिसमें उनका सत्यापन किया गया। दो लोगों ने बताया कि उन्हें बांग्लादेशी कहने का सवाल पूछा गया, लेकिन जब उनके आधार कार्ड और पहचान पत्र मांगे गए तो वे बोले, 'हम बिहार से हैं।'
 
🤔 जो भी हो रहा है यहां, पुलिस के साथ संवाद करने की तरीका कभी काम नहीं करता। पहले कोई बात पूछता है, फिर उसका जवाब मांगने लगता है और फिर जांच शुरू कर देता है। तो अगर वे लोग यहां से हैं तो क्यों उनकी पहचान पत्र चाहते हैं? 🤷‍♂️
 
बात कुछ अजीब लग रही है... लगता है कि कुछ लोग अपने निवास को छुपाकर रहते हैं और जब पुलिस उनके पास आती है, तो उन्हें पता चलता है कि वे कहाँ से आए हैं?
 
मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण दृश्य है जो गाजियाबाद में घटित हुआ। भारतीय पुलिस को अपने नागरिकों की सुरक्षा और पहचान का ध्यान रखना चाहिए, लेकिन यह तो ऐसा लग रहा है कि उन्हें पता नहीं था। अगर वे सचमुच बांग्लादेशी लोगों को ढूंढना चाहते हैं, तो उनके आधार कार्ड और पहचान पत्र मांगने से पहले उन्हें यह जानने की जरूरत थी कि वे कहाँ से आए हैं। और अगर वे बिहार से आए हैं तो फिर भी उन्हें अपनी नागरिकता का कोई सवाल नहीं उठाना चाहिए।
 
ਮैं ਸोचਦੀ ਹਾਂ, ਯਕੀਨਨ ਇਹ ਭਾਰਤ ਦੀ ਸਥਿਰਤਾ ਲਈ ਗੁੱਝਣਪੂਰਨ ਅਵਸਥਾ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ। ਬਿਜਲੀ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਘਾਟ ਦੇ ਮਾਮਲਿਆਂ ਵਿੱਚ ਕਈ ਰਸਤੇ ਬਿਮਾਰ ਹੋ ਗਏ ਹਨ। ਜਿਵੇਂ ਜੋ ਉਹ ਲੋਕ ਆਪਣੀ ਪਛਾਣ ਦੁਖੀ ਹਨ ਤੇ ਅਸਥਾਈ ਹੋ ਗਏ ਹਨ, ਉਹ ਅੱਜ ਵੀ ਸਬਰ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ।
 
बात ये तो बहुत ही अजीब लग रही है 🤔। गाजियाबाद पुलिस ने बिहारी लोगों को बांग्लादेशी कहने पर पूछताछ किया, और फिर उनका सत्यापन करने के बाद उन्हें बताया कि वे बिहार से हैं। तो सवाल यह कि क्या वे पुलिस ने गलत मान रहे थे? या फिर कुछ और ऐसा था जिसकी वजह से वे इस तरह पूछताछ किया गया? https://www.ndtv.com/india-news/bih...policing-society-according-to-gurgaon-1277775
 
बात तो ये है, गाजियाबाद में ऐसी चीजें होना अच्छी नहीं है। पुलिस को तो अपने दम पर लोगों को सवाल करना चाहिए, न कि उनके आधार कार्ड और पहचान पत्र पर ध्यान देना। अगर वो बिहार से हैं तो फिर भी उन्हें कोई सवाल नहीं पूछना चाहिए। हमें अपने देश में जाने का अधिकार है, लेकिन उसके साथ-साथ हमें अपने नागरिकता के बारे में जागरूक रहना भी चाहिए।
 
बात बिल्कुल हैरत जानपद की . गाजियाबाद पुलिस ने क्या कर रही है , यह तो कुछ और दिखने लगी है । अगर वो लोग बिहार से हैं तो फिर क्यों उनसे बांग्लादेशी कहने का सवाल पूछ रही है ? यह तो सरकार द्वारा किया जाने वाला एक काम है , जिसमें गरीबों और अनाथों को मुह लेकर चुपक कर दिया जाता है .
 
बिल्कुल ये तो बहुत मजेदार है 😂, गाजियाबाद पुलिस ने बिहारी लोगों को बांग्लादेशी कहने पर जबरदस्त सवाल कर दिए। और फिर वे लोग अपनी पहचान पत्र मांगने से भी तैयार नहीं हुए! 😂 यह तो सरकार द्वारा बनाई गई पहचान कार्ड की जांच करने का तरीका कितना मजेदार है? 🤔
 
अरे यह बहुत अजीब है 🤔 कि गाजियाबाद पुलिस ने बिहारी लोगों से पूछताछ की। तो ये कैसे हुआ? उनका आधार कार्ड और पहचान पत्र मांगने पर वे बोले, 'हम बिहार से हैं'। यह समझ नहीं आ रहा कि क्या उन्हें लगता है कि बिहार और बांग्लादेश एक-दूसरे से अलग नहीं हैं 🤷‍♂️। हमारी देशभक्ति और सम्मान कैसे कम होता है? यह बहुत शरमाता है 🙏
 
ਇਹ ਤੋ ਕਿਸੀ ਚੀਜ਼ ਨਾ ਹੈ? ਗਾਜੀਆਬਾਦ ਪੁਲਿਸ ਨੂੰ ਵੀ ਇਹ ਮਾਹੌਲ ਅੱਚਾ ਲੱਗ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਕੋਈ ਬਿਆਨ ਜਾਂ ਪੁਸ਼ਟੀ ਤੋ ਦੂਰ ਹੀ ਨਾ, ਮਰਦ ਅਤੇ ਔਰਤ ਉਹੀ ਲੋਕ ਜਿਸ ਵਰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ। ਆਪਣੀਆਂ ਡਾਊਨ ਟਰੈਂਡਿੰਗ ਮੁਸਲਮਾਨ, ਬਹੁਜਨਤੀ ਅਤੇ ਬਚਵਾਸ ਦੇ ਖ਼ਿਆਲ ਕਰਦੇ ਹਨ।
 
मैंने देखा है कि गाजियाबाद की पुलिस कितनी सख्त है 🚨, लेकिन यह तो मुझे थोड़ा दुख देता है। जैसे ही बिहार के लोग अपना राज्य बताते हैं और आधार कार्ड/पहचान पत्र दिखाते हैं, तो उन्हें लगता है कि वह सुरक्षित हैं। यहाँ पर एक सवाल उठता है, जैसे ही हमारे देश में लोग अपनी पहचान बताते हैं और साबित करने की कोशिश करते हैं, तो फिर भी उन्हें बांग्लादेशी कहने का सवाल पूछना चाहिए? नहीं, यह तो गलत है। हमें अपने देश और पहचान का सम्मान करना चाहिए।
 
मुझे ये बात बहुत परेशान कर देती है 🤦‍♂️, क्या लोग अभी भी अपनी पहचान को गलत बताते हैं? गाजियाबाद पुलिस ने बिहारी लोगों से बातचीत की और उनसे पूछा गया कि वे कहाँ से आये हैं, तो दो लोगों ने बताया कि वे बांग्लादेशी हैं 🤷‍♂️, लेकिन जब पहचान पत्र मांगे गए तो उन्हें अपनी सच्चाई बतानी पड़ी। यह बहुत शरमाता है कि लोग अपनी जिंदगी को गलत दिखाने की कोशिश करते हैं। हमें अपनी पहचान को सिर्फ़ सिर्फ़ बिल्कुल सही बताना चाहिए और इस तरह की चीज़ों को रोकना चाहिए।
 
मैंने देखा है कि गाजियाबाद पुलिस ने बिहारी लोगों से पूछताछ की तो क्या उनका कोई अपराध किया था। इसके पहले तो मुझे लगा कि वे कुछ गलती करने वाले लोग खोज रहे हैं और फिर बात बदल गई जब उन्हें पहचान पत्र मांगने पड़े। यहाँ बिहार से लेकर गाजियाबाद तक हर जगह कोई भारतीय है तो क्या उनसे पूछताछ की जरूरत थी।
 
मुझे यह बात बहुत असहज लगती है... कैसे पुलिस लोगों को बंगाली कहने का सवाल करती है, फिर उनसे पहचान पत्र मांगती है? यह तो बिल्कुल न्याय नहीं है। उनका सत्यापन किया गया, लेकिन पूछताछ कैसे हुई? यह तो बहुत अजीब लग रहा है... और क्या ये लोग कुछ गलत कर रहे थे? क्या उन्हें ऐसा सवाल करने की जरूरत थी?
 
मैंने देखा है कि गाजियाबाद पुलिस ने ऐसी कई मामले खोले हैं, जहां लोगों को अपनी जाति-धारा के बारे में सवाल पूछे गए। यह तो बहुत ही संवेदनशील विषय है, और लोगों को अपनी पहचान बताने से पहले खुद को थोड़ा डर भी लगता है। लेकिन सरकार ने ऐसी योजनाएं बनाई हैं जहां लोगों को अपनी पहचान बताने के लिए कहा जाता है, ताकि उन्हें अपने अधिकारों के बारे में पता चल सके।
 
मुझे यह जानकारी बहुत परेशान कर रही है, भाई। अगर तुम्हें अपना आधार कार्ड और पहचान पत्र लेकर न आने से मुश्किल हुई तो यह तो बुरा ही है... लेकिन यह देखकर बेचैनना नहीं चाहिए, क्या? अगर तुम्हें अपने घर से कहीं भी जाने की जरूरत है तो कम से कम अपना पहचान पत्र और आधार कार्ड ले जाओ। यह तो हमारी सुरक्षा के लिए ही है। मैं समझता हूं जब बात कर रहे होते हैं तो गलतफहमी हो सकती है, लेकिन सच्चाई चाहे कितनी भी कठिन हो उसे तय करना ही चाहिए... 🙏
 
ਬਾਰੇ ਇਹ ਖ਼बरਤ ਵੀ ਦੱਸਦੀ ਹੈ ਕਿ ਗਾਜੀਆਬਾਦ ਪੁਲਿਸ ਨੇ ਬਿਹਾਰ ਦੇ ਮਾਰਕੀਟ ਵਿੱਚ ਰਹਿਣ ਵਾਲਿਆਂ ਨਾਲ ਗੱਲ ਕਰਨ ਲੱਗੀ। ਇਸ ਦੌਰਾਨ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਬਾਂਗਲਾਦੇਸ਼ ਕਿਹਣ ਦਾ ਵੀ ਪ੍ਰਸ਼ਨ ਪੁੱਛਿਆ, ਤਾਂ ਜਿਵੇਂ ਉਹ ਅਸਲ ਵਿੱਚ ਬਾਂਗਲਾਦੇਸ਼ੀ ਨਹੀਂ ਹਨ।
 
बिल्कुल सही किया गया 🤦‍♂️, गाजियाबाद पुलिस ने बिहार से रहने वालों को बांग्लादेशी कहने का सवाल पूछा, यह तो बहुत ही शर्मनाक है 🙅‍♂️। मैंने अपने दोस्त के चाचा की पहचान पत्र देखी है, वह बिहार से हैं, लेकिन फिर भी उन्हें बांग्लादेशी कहने का सवाल पूछा गया। यह तो एक बड़ा मुद्दा है और पुलिस को इस पर अधिक जानकारी इकट्ठा करनी चाहिए।
 
नहीं समझ, यह तो एक बड़ा झूठ है! पुलिस ने बांग्लादेशी कहने का सवाल तो पूछ रही थी, लेकिन जब पहचान पत्र मांगे, तो वे बोले, 'हम बिहार से हैं'। यह तो एक बड़ा राज़ है! क्यों नहीं उन्हें पहचान पत्र चाहकर माफ कर दिया जाता? शायद वे लोग सच्चे बिहारी हैं और उनकी ज़िंदगी में कुछ भी गलत नहीं है। लेकिन पुलिस ने उनसे ऐसा सवाल पूछा, जैसे अगर उन्होंने कहा, 'मैं बांग्लादेश से आया हूँ'। यह तो एक बड़ा भेदभाव है! 🙄
 
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