सुनीता विलियम्स 27 साल बाद रिटायर: दिल्ली में बोलीं-भारत आना घर वापसी जैसा, चांद पर जाना चाहती हूं, लेकिन पति इजाजत नहीं देंगे

सुनीता विलियम्स ने अपने आखिरी स्पेस मिशन को पूरा करते हुए कहा, 'अंतरिक्ष खोज में अगली पीढ़ी को अपना स्थान बनाना होगा।'

दिल्ली में बोलीं-भारत आना घर वापसी जैसा, चांद पर जाना चाहती हूं, लेकिन पति इजाजत नहीं देंगे

सुनीता विलियम्स ने अपनी रिटायरमेंट की घोषणा 20 जनवरी को की। उनकी रिटायरमेंट 27 दिसंबर 2025 से लागू होगी।

सुनीता विलियम्स ने कहा, 'दुनिया में अंतरिक्ष को लेकर एक तरह की होड़ चल रही है। कई देश चांद और अंतरिक्ष में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। लक्ष्य सिर्फ पहले पहुंचना नहीं है, बल्कि यह है कि इंसान सुरक्षित, टिकाऊ और लंबे समय तक रहने लायक तरीके से चांद पर जाए।'

सुनीता ने कहा, 'यह काम सबके फायदे, सहयोग और पारदर्शिता के साथ, लोकतांत्रिक तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि किसी एक देश का दबदबा न हो और पूरी मानवता को इसका लाभ मिले। सभी देश सहयोग के साथ आगे बढ़ें, बिल्कुल अंटार्कटिका मॉडल की तर्ज पर।'

सुनीता विलियम्स ने कहा, 'मैं चंद्रमा पर जाना चाहती हूं, लेकिन मेरे पति मुझे इजाजत नहीं देंगे। घर वापसी और जिम्मेदारी सौंपने का समय आ गया है। अंतरिक्ष खोज में अगली पीढ़ी को अपना स्थान बनाना होगा।'
 
આવી સમયના એક જગ્યા છે, જેંતો શુદ્ધ અને સરળતાવાળી હિસાબથી આપણા સંકલ્પના ઉઘાડે છે.
 
बिल्कुल ऐसा होना चाहिए, जब हमारी देश में भी घर वापसी और जिम्मेदारी का समय आ गया हो। लेकिन अंतरिक्ष खोज में तो सबके फायदे से ये काम करना चाहिए। अगर हम सहयोग करते हैं तो सभी देशों को इसमें शामिल होने का मौका मिलता है। और अंटार्कटिका मॉडल से सबक लेकर आगे बढ़ सकते हैं।
 
बिल्कुल, मैंने पढ़ा है कि सुनीता विलियम्स ने अपने आखिरी स्पेस मिशन को पूरा करते हुए कहा है कि अंतरिक्ष खोज में अगली पीढ़ी को अपना स्थान बनाना होगा। यह बिल्कुल सही है, हमारी देश की महिलाओं ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में बहुत बड़ा योगदान दिया है।
 
मुझे लगता है कि ये बिल्कुल सही है कि आगे चंद्रमा पर जाने के लिए हमें एक दूसरे की मदद करनी होगी। मेरा पति भी पूर्व सेना में हैं और उनकी बात मुझे बहुत पसंद है, लेकिन जब उन्होंने मुझसे कहा कि घर वापसी हो जानी है तो मुझे लगा कि यह सही नहीं है। लेकिन फिर मैंने सोचा कि चांद पर जाने के लिए हमें एक दूसरे की मदद करनी होगी, तो मैं भी उनकी बात समझ गयी।
 
[Image of Sunita Williams looking sad with a space background] 😔🚀
[Caption: चंद्रमा पर जाने की इच्छा 😢]
[Image of Sunita Williams smiling with a rocket in the background] 🙂🚀
[Caption: अंतरिक्ष खोज में अगली पीढ़ी को आगे बढ़ाना 🌟]
[Image of Sunita Williams and her husband with a "दिल्ली आना घर वापसी जैसा" caption] 😉👫
[Image of the US flag with a "सहयोग" caption] 🇺🇸💕
[Image of the Earth from space with a "लोकतंत्र के साथ आगे बढ़ें" caption] 🌎🗓️
 
मुझे लगता है कि सुनीता विलियम्स जी एक सच्ची नायक हैं। उनकी बात सुनकर लगता है कि अंतरिक्ष खोज में हमारी अगली पीढ़ी बहुत आगे आती है। चांद पर जाना तो आसान नहीं है, लेकिन अगर हम सब एक साथ मिलकर काम करें, तो जरूर संभव है। मुझे लगता है कि भारत भी इस दिशा में बहुत आगे बढ़ सकता है, अगर हम सहयोग और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ते हैं।
 
अंतरिक्ष में आगे बढ़ने की बात अच्छी है, लेकिन पति-पत्नी की समस्या तो दूर नहीं हुई। चांद पर जाना भी सोच रही थी, लेकिन इजाजत नहीं मिल पाई। अब कौन काम करेगा?
 
सुनीता विलियम्स की बात मुझे बहुत अच्छी लगी 🤔। वह जिस तरह से अंतरिक्ष खोज में आगे बढ़ने की बात कर रही है, वह बिल्कुल सही है। हमारे देश में भी कई युवा और अनुभवी लोग हैं जो इस काम में शामिल होने के लिए तैयार हैं। मुझे लगता है कि अगर हम सभी मिलकर मिलकर सहयोग करते हैं, तो अंतरिक्ष खोज में भारत एक महत्वपूर्ण स्थान बना सकता है। यह जरूरी है कि आगे की पीढ़ी अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करे। और जब तक इंसान भाग्यशाली नहीं होता, तब तक हमें चांद पर जाने का सपना कभी नहीं छोड़ना चाहिए 🚀
 
अंतरिक्ष अन्वेषण के साथ हमें अपने भविष्य और समाज की दिशा को निर्धारित करना होगा, यह तो पूरी तरह से सही कहा गया है सुनीता विलियम्स जी। लेकिन मुझे लगता है कि घर वापसी की बात पर कुछ विचार करने की जरूरत है। अगर वह अपने पति को इजाजत नहीं देती है, तो शायद घर की जिम्मेदारियों को सौंपने का समय आ गया हो। लेकिन यह भी सच है कि अंतरिक्ष अन्वेषण में हमारी अगली पीढ़ी को अपना स्थान बनाने की जरूरत है। 🚀💫
 
😊 चंद्रमा पर जाने की इच्छा तो हमारी सभी पीढ़ियों में है, लेकिन आजकल भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपना पहला सफल स्पेस मिशन किया था, तो यह वास्तव में हमारी महिलाओं और महिला-विरोधी प्रवृत्ति के खिलाफ है।

भारत में चांद पर जाने की इच्छा दूर-दूर तक फैली हुई है, लेकिन एक सवाल उठता है कि जब स्पेस एक्सप्लोरेशन में हमारी पीढ़ी आगे बढ़ रही है तो वो अंतरिक्ष खोज में आगे बढ़ने के लिए सहयोग कैसे करेगी।
 
क्या भाई, ये सुनीता विलियम्स की बात तो बहुत ही दिलचस्प है… चांद पर जाने की इजाजत नहीं मिलने पर घर वापसी होना एक अलग प्रकार का निर्णय है… लेकिन यही सच्चाई है कि पति-पत्नी के बीच जिम्मेदारियों को साझा करने का समय आता ही नहीं दिख रहा है... 🤔
 
सुनीता विलियम्स की बात सुनकर याद आया कि हमारे देश ने पहले भी कई योद्धाओं और शख्सों से ऐसा ही कहा था, जिन्होंने अपने सपनों को पूरा करने के लिए बहुत मेहनत की। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अंतरिक्ष खोज एक विशेषज्ञ क्षेत्र है और वह जिस भी देश में फंस जाए उस देश को उसकी सहायता करनी चाहिए।

इसके अलावा, यह सुनीता विलियम्स की स्थिति को देखते समय बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि वह अपने पति की इजाजत नहीं पा रही है। ऐसी कई महिलाएं भारत में हैं जो उनके परिवार के दबाव में फंसकर खुद को बंद कर देती हैं। यह हमेशा एक स्थायी निर्णय नहीं होता, लेकिन यह व्यक्ति की मर्जी पर थोड़ी सा समय मिलता है।

आज के समय में पुरुष और महिलाएं बिल्कुल एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। हमारे देश में कई महिलाएं भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में शामिल होकर अपना काम कर रही हैं और उन्हें सफलता मिल चुकी है।
 
मेरे सपनों में चंद्रमा पर जाने का सोचते थे, लेकिन अब मुझे लगता है कि युवाओं को इस दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है। उनकी पीढ़ी को अपना स्थान बनाना होगा, न कि हमने।
 
नाक में छुट्टी लगने की जैसी भावना है, जब बोलते हैं कि चांद पर जाना तुम्हारी इच्छा है लेकिन पति मुझे सही नहीं देगा। तुम्हारी रिटायरमेंट से पहले एक्सप्लोरर जैसा महसूस होता है, जो की विश्व के सबसे बड़े अंतरिक्ष अभियानों में से एक है।
 
ये तो फिर एक और इंसान चांद पर जाना चाहता है 🚀, लेकिन क्या वास्तव में वह सोच रहा है? घर वापसी जैसा बोलकर सुनीता विलियम्स ने अपने पति को इजाजत नहीं देने का मकसद कहा, तो यह क्या इंसान की निजी जिंदगी है, या फिर वह इस्तेमाल कर रहा है इसका राजनीतिक मकसद? 🤔

अंतरिक्ष खोज में अगली पीढ़ी को अपना स्थान बनाने के लिए, हमें पहले इंसान की जिंदगी को समझना होगा, न कि सिर्फ चांद पर जाना ही है। घर वापसी और जिम्मेदारी सौंपने का समय आ गया है, लेकिन यह तो हमें सोचने पर मजबूर कर देता है कि इंसान क्या सोच रहा है? 🤷‍♂️
 
Wow 😮, सुनीता विलियम्स की बात बहुत प्रेरणादायक है... अंतरिक्ष में आगे बढ़ने के लिए हमें सबके फायदे, सहयोग और पारदर्शिता के साथ चलना चाहिए... यह तो दिलचस्प बात है कि वह अपनी रिटायरमेंट की घोषणा कर रही हैं और भारत आने जाने की बात कह रही हैं... 😊
 
अरे, यह तो बहुत ही दिलचस्प बात है कि सुनीता विलियम्स ने अपने आखिरी स्पेस मिशन पर रुकने का मन कर लिया है। वो तो पहले चांद पर जाने का सपना देख रही थी, लेकिन अब घर वापसी और जिम्मेदारी सौंपने का समय आ गया है।

मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही प्रेरक बात है, खासकर जब हम तो चांद पर जाने की बात कर रहे हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि घर और परिवार को पहले महत्व देना होता है। मुझे लगता है कि सुनीता विलियम्स ने सही निर्णय लिया है।

लेकिन, चांद पर जाने की बात करें, तो यह एक बहुत ही रोमांचक और इजिंडी ट्रेंड है! 😎🚀
 
अरे, ये तो बहुत ही रोचक बात है! 🚀 सुनीता विलियम्स जी की बात सुनकर मुझे लगता है कि हमारी पीढ़ी को कुछ खास करना है, चाहे वह अंतरिक्ष या घर वापसी हो।

मेरी राय तो यह है कि अंतरिक्ष खोज में निकलने के लिए हमें अपनी सरकार और प्रशासन के साथ मिलकर काम करना होगा। हमें एक टीम बनानी चाहिए, जिसमें वैज्ञानिक, इंजीनियर और अन्य खाद्यों को शामिल करें।

और बात करते हुए, यह तो बहुत ही सच है कि सुनीता विलियम्स जी को अपने पति से इजाजत नहीं मिली। लेकिन हमारे देश में लड़कियों को घर वापसी की चीज़ करने से रोकने में कितनी परेशानी होती है!

मुझे लगता है कि हमारी सरकार और प्रशासन को इस तरह की समस्याओं को हल करने के लिए कुछ कर सकते हैं। जैसे कि उन्हें लड़कियों के लिए स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई के विकल्प बढ़ाने की आवश्यकता है।
 
मुझे बहुत खुशी है सुनीता विलियम्स जी ने अपने आखिरी स्पेस मिशन को पूरा करने की घोषणा की 🚀। यह उनकी बहादुरी और समर्पण को दिखाती है। लेकिन मुझे लगता है कि जब तक वे घर पर नहीं बस जाएं, तो वे अंतरिक्ष खोज में आगे बढ़ने के लिए अपना स्थान बना सकती हैं 🚫
 
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