सुनीता विलियम्स 27 साल बाद रिटायर: दिल्ली में बोलीं-भारत आना घर वापसी जैसा, चांद पर जाना चाहती हूं, लेकिन पति इजाजत नहीं देंगे

अगर चांद पर जाने की दोस्ती आपके पति से नहीं मिल सकती, तो आप क्या करेंगी? 🤔
मुझे लगता है कि इंसान को अपनी खुशियों और लक्ष्यों के लिए लड़ना चाहिए। अगर आपको चांद पर जाने की इच्छा है, तो आप पूरी मेहनत करके उसे प्राप्त कर सकती हैं।
अगर यह सिर्फ एक दोस्ती है तो आपको पति से बात करनी चाहिए। भारत आना घर वापसी जैसा है, तो क्यों नहीं आप चांद पर जाने की इच्छा? 🚀
 
🚀💔 चांद पर जाने की सुनीता विलियम्स की इच्छा दुखद है, वह अपने पति की इजाजत नहीं मिल पाई। उनकी रिटायरमेंट ने उनके सपनों को फाड़ दिया है। इस समय बाकी देश कैसे आगे बढ़ेगा, यह देखना दुखद है कि हमारे देश ने भी अंतरिक्ष खोज में अपना स्थान बनाने की कोशिश कब करेगी। 🤔
 
मैंने इस बात पर खुशी है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपनी सफलताओं का प्रदर्शन दिखाया है, लेकिन चांद पर जाने की सोच में बहुत सारे लोगों को अभी तक इजाजत नहीं मिल रही है 🚀

मेरे विचार में, यह एक अच्छी बात है कि सुनीता विलियम्स ने अपनी रिटायरमेंट की घोषणा की है और आगे की पीढ़ी को इसके लिए तैयार करना शुरू कर दिया है। लेकिन मुझे लगता है कि हमें पहले खुद को अच्छी तरह से तैयार करना चाहिए, ताकि हम जानबूझकर अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें।

मैं भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के प्रयासों की बधाई देता हूं और उम्मीद करता हूं कि जल्द ही हम चांद पर पहुंचेंगे।
 
अरे बेटी, यह तो बहुत दिलचस्प है कि सुनीता विलियम्स ने अपनी आखिरी स्पेस मिशन को पूरा करने का फैसला किया है। उनकी बात बिल्कुल सही है, अंतरिक्ष खोज में अगली पीढ़ी को अपना स्थान बनाना होगा। लेकिन, यह तो थोड़ा दुखद है कि वह घर वापसी नहीं कर सकती है क्योंकि पति इजाजत नहीं दे रहे हैं।

मैं सोचता हूँ कि अगर हम सभी एक साथ मिलकर सहयोग करते हैं और अंटार्कटिका का मॉडल अपनाते हैं, तो शायद हम चांद पर जाने में सफल हो सकेंगे। लेकिन, यह तो बहुत जरूरी है कि वह सुरक्षित और टिकाऊ तरीके से चले।

बिल्कुल सही कहा कि लक्ष्य सिर्फ पहले पहुंचना नहीं है, बल्कि यह है कि हम इंसान सुरक्षित, टिकाऊ और लंबे समय तक रहने लायक तरीके से चांद पर जाएं।
 
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