आज पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) बने आसिम मुनीर ने देश के परमाणु हथियारों पर भी अपना हाथ रख लिया है। यह एक बड़ा कदम है, जिसमें उन्हें पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेताओं द्वारा समर्थित होने वाले परमाणु कार्यक्रमों को भी अपनी जिम्मेदारी में लेना पड़ा है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के पास यह शक्ति नहीं थी, और यह बदलाव स्पष्ट रूप से एक मilitary जुटाई का हिस्सा है। यह दिखाता है कि पाकिस्तान के सैन्य बलों को वास्तव में अधिक शक्तिशाली नेतृत्व की आवश्यकता है, और शायद सिर्फ वे ही ऐसा कर सकते हैं।
इस नई जिम्मेदारी के साथ, आसिम मुनीर को अपने देश के परमाणु हथियारों पर सटीकता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की बहुत बड़ी जबरदस्ती होगी। यह एक विशेष जिम्मेदारी है, जिसमें गलती करने का कोई भी मौका नहीं है।
इसके अलावा, यह सवाल उठता है कि पाकिस्तान के सैन्य नेताओं के बीच कौन सी शक्तियां विभाजित हुई हैं। क्या आसिम मुनीर को अब प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से अधिक ताकतवर माना जाएगा? क्या यह एक नई शक्ति की शुरुआत है, और इसका असल में अर्थ क्या है?
इन सवालों के जवाब देने के लिए अभी भी समय है। लेकिन एक बात स्पष्ट है - आसिम मुनीर को अपने देश के परमाणु हथियारों पर नियंत्रण करने की यह जिम्मेदारी उनके लिए बहुत बड़ी है, और इसका सफल निपटारा उनके लिए एक बड़ा चैलेंज होगा।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के पास यह शक्ति नहीं थी, और यह बदलाव स्पष्ट रूप से एक मilitary जुटाई का हिस्सा है। यह दिखाता है कि पाकिस्तान के सैन्य बलों को वास्तव में अधिक शक्तिशाली नेतृत्व की आवश्यकता है, और शायद सिर्फ वे ही ऐसा कर सकते हैं।
इस नई जिम्मेदारी के साथ, आसिम मुनीर को अपने देश के परमाणु हथियारों पर सटीकता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की बहुत बड़ी जबरदस्ती होगी। यह एक विशेष जिम्मेदारी है, जिसमें गलती करने का कोई भी मौका नहीं है।
इसके अलावा, यह सवाल उठता है कि पाकिस्तान के सैन्य नेताओं के बीच कौन सी शक्तियां विभाजित हुई हैं। क्या आसिम मुनीर को अब प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से अधिक ताकतवर माना जाएगा? क्या यह एक नई शक्ति की शुरुआत है, और इसका असल में अर्थ क्या है?
इन सवालों के जवाब देने के लिए अभी भी समय है। लेकिन एक बात स्पष्ट है - आसिम मुनीर को अपने देश के परमाणु हथियारों पर नियंत्रण करने की यह जिम्मेदारी उनके लिए बहुत बड़ी है, और इसका सफल निपटारा उनके लिए एक बड़ा चैलेंज होगा।