स्पॉटलाइट- ‘चाय बोलो चाय’ वाले AI वीडियो पर घिरी कांग्रेस: कभी ‘नीच’, कभी ‘रावण’; कांग्रेस को कैसे उल्टे पड़ते हैं पीएम मोदी पर निजी हमले

कांग्रेस का यह वीडियो पोस्ट करना एक नया रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन इसका यह पहली बार है जब इस तरह से पीएम मोदी को दिखाया गया है। चायवाले की भूमिका निभाते हुए पीएम को AI-जनरेटेड वीडियो में दिखाया गया है, जिसमें उन्हें एक सामान्य आदमी की तरह दिखाया गया है।

इस तरह का हमला अक्सर कांग्रेस पर आलोचना के लिए करते हैं। यह वीडियो पोस्ट करने से पहले यह सवाल उठता है कि चायवाले की भूमिका क्यों निभाई गई, और इसका उद्देश्य क्या था।

कांग्रेस ने इस वीडियो में पीएम को एक सामान्य आदमी की तरह दिखाया है, लेकिन यह सवाल उठता है कि कांग्रेस ने ऐसा करने का क्यों किया।

इस तरह के हमलों से निकलने वाली जानकारी अक्सर गलत और झूठी होती है, जो कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंचाती है।
 
ये बात तो देखकर ही समझ में आती है कि चायवाले की भूमिका क्यों निभाई गई। कांग्रेस से लड़ने वाले लोग अक्सर ऐसे हमले करते हैं जिनसे विरोधी को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। लेकिन जब यह वीडियो पोस्ट किया गया तो लगता है कि कांग्रेस का दावा सही नहीं था - यह वीडियो पोस्ट करने से पहले भी कई सवाल उठते थे।
 
क्या ये तो प्म मोदी पर कांग्रेस का फैक्ट-चेक नहीं है? तो वीडियो पोस्ट करने से पहले उन्होंने चायवाले की भूमिका क्यों निभाई? और वीडियो में दिखाए गए उस पीएम की बात क्या सच्ची थी? तो कांग्रेस को अपने खिलाफ कुछ नया नहीं लेकर आया, बस फेक न्यूज़ देने की कोशिश कर रही है।

जानकारी को सत्यापित करने से पहले हमलों पर ध्यान देना जरूरी है, न कि नकारात्मकता में खुशी लेना।
 
पोस्ट करने वाले लोग क्या सोचते थे कि पीएम मोदी की चायवाली दिखाई गई? यह तो उनके खिलाफ कुछ नहीं करेगा। लेकिन सच्चाई यह है कि ऐसे हमलों से निकलने वाली जानकारी अक्सर गलत होती है। मैंने अपने पिताजी के दोस्त को एक बार ऐसा वीडियो देखा था जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को एक रोजगारशाला में दिखाया गया था। उस समय यह वीडियो बहुत हिट हुआ था, लेकिन बाद में पता चला कि वह वीडियो पूरी तरह से फیک था।
 
मुझे लगता है कि यह वीडियो पोस्ट करना एक बड़ा मुद्दा हो सकता है, लेकिन यह सवाल उठता है कि इसका उद्देश्य क्या था। क्या यह तो बस एक मजाक था, या फिर कांग्रेस ने वास्तव में कुछ साबित करने की कोशिश की थी। पीएम को AI-जनरेटेड वीडियो में दिखाना एक बड़ा कदम है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमें उसकी छवि पर सवाल उठाए जाए। 🤔
 
मैं समझ गया कि यह चायवाले की भूमिका तो बिल्कुल मजाक था, लेकिन पूछना मुश्किल नहीं कि क्यों ऐसा किया। मुझे लगता है कि यह वीडियो पोस्ट करने से पहले चायवाले की भूमिका निभाने वाले लोगों ने बहुत सोचा था, लेकिन मुझे लगता है कि उनकी सोच से पहले बहुत से लोगों को फायदा नहीं हुआ। और यह सवाल है कि अगर पीएम को एक सामान्य आदमी की तरह दिखाया गया तो इसका मतलब क्या है?
 
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