स्पॉटलाइट-जब शराब को जूस समझ बैठे सुप्रीम कोर्ट के जज: किस मामले में कोर्ट में पेश हुई शराब, क्या कोर्ट लगाएगा रोक, देखें वीडियो

अरे, यह मामला तो क्या सोचिएगा, एक वकील व्हिस्की का टेट्रापैक पेश कर देता है, जजों की चौंकाने वाली बात! लेकिन थोड़ा सोचते हैं तो यहाँ पर कई राज्यों में शराब की कीमतें अलग-अलग होती हैं, अरे तो यह तो सरकार का नियम ही है कि शराब की कीमतें एक जगह पर लिखी हुई होंगी, नहीं तो यह बिल्कुल भ्रमपूर्ण होगा!

लेकिन जजों की बात सुनते हैं तो यह सवाल उठता है कि शराब की बिक्री पर नियंत्रण की आवश्यकता है, और सरकार ने ऐसा क्यों नहीं कहा है? खैर, यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले की ओर बढ़ रहा है, और हम देखेंगे कि क्या जजों की चिंताएं वास्तविकता में बदल जाती हैं? 🤔
 
यह तो बहुत अजीब है कि क्यों कोई वकील सुप्रीम कोर्ट में व्हिस्की का टेट्रापैक पेश कर देता है? जैसे कि यह मामला कुछ बड़ी बातचीत का हो तो ठीक है, लेकिन बस इसलिए नहीं कि शराब टेट्रापैक में भी बिकती है... यह तो सरकार के पास एक गुप्त सौदा होने की तरह लगता है। और जजों ने भी तुरंत इसकी जांच करने का फैसला किया, तो ये तो उनकी अच्छाई का हिस्सा है... लेकिन क्या यह मामला वास्तव में बातचीत के लिए था या बस एक छोटा सा निंदक था? 🤔
 
शायद सुप्रीम कोर्ट में व्हिस्की का टेट्रापैक पेश करने का यह तरीका थोड़ा अजीब लगेगा, लेकिन जजों ने भी अच्छी बात कही है कि शराब की कीमतें राज्य-राज्य में अलग-अलग हो सकती हैं तो सरकार को अपनी नीतियों पर सोचना चाहिए। शायद सरकार को शराब के प्रतिबंध और बिक्री पर अधिक ध्यान देना चाहिए, लेकिन इस मामले में यह सवाल है कि क्या व्हिस्की का टेट्रापैक किसी नियम के अनुसार आया था या नहीं?
 
ये सुप्रीम कोर्ट में क्या हो रहा है? पहले तो मुझे लगता है कि यहां पर वकीलों की जिम्मेदारी है, लेकिन जब वे कुछ अजीब चीजें पेश करते हैं तो मेरा संदेह बढ़ जाता है। और आज की बात है शायद उस वकील ने कोई बहाना बनाया था ताकि वह अपनी चाल अकेली कर सके। शराब टेट्रापैक में भी बिकती है, यह बिल्कुल सही है, लेकिन यहां पर सरकार से पूछने की जरूरत नहीं थी।

और सबसे बड़ी बात, ये सुप्रीम कोर्ट है, जहां हमारा न्यायिक प्रणाली अपना मुख्य मंच बनाती है। और फिर जब वकील तुरंत सरकार से जुड़कर सवाल पूछने लगता है तो यह वहीं अच्छा नहीं है। क्योंकि इससे हमें लगता है कि यहां पर न्यायिक प्रणाली कोई दूसरी चीज के लिए काम कर रही है, जैसे कि सरकार की द्वारा बनाई गई बाजार की खिड़की।
 
मुझे यह मामला थोड़ा अजीब लग रहा है, चाहे तो जजों की सोच कुछ समझ में नहीं आती। शराब की कीमतें अलग-अलग राज्यों में होना तो एक पक्का विषय है लेकिन कोर्ट में टेट्रापैक पेश करने का मतलब यह कि हमारे देश में शराब की बिक्री पर कोई नियंत्रण नहीं है? यह तो एक बड़ा सवाल है और सरकार को अपनी नीति पर rethink करने की जरूरत है।
 
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