उत्तर प्रदेश के हापुड़ में एक अंधेरी घटना सामने आई है, जहां एक व्यापारी का अंतिम संस्कार करने के लिए जो दावा करता था, वह सिर्फ धोखाधड़ी के घोंसले में बैठा पाया गया। 26 नवंबर को, यह घटना गढ़मुक्तेश्वर गंगा श्मशान घाट पर हुई।
एक i20 कार हरियाणा से आयी थी, जिसमें चार लोग बिना किसी रस्म के अर्थी जलाने लगे। आसपास के लोगों ने यह देखकर शक किया कि क्या यहां कोई गैर-हिंदू व्यक्ति है। जब अर्थी का कपड़ा हटाया गया, तो स्वाभिमान के शिखर पर पहुंचकर सबको पता चला कि उसमें मुर्दा नहीं बल्कि प्लास्टिक का पुतला लगा हुआ था।
व्यापारी ने बताया कि वह अपने दादाजी का अंतिम संस्कार करने आये थे, लेकिन जब उन्हें पता चला कि उनका मुर्दा नहीं बल्कि प्लास्टिक का पुतला है, तो उनका मन कंप कर गया। वह ने बताया, 'मैंने कभी भी इस तरह की घटना सुनी नहीं और मुझे लगता है कि यह धोखाधड़ी की एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है।'
एक i20 कार हरियाणा से आयी थी, जिसमें चार लोग बिना किसी रस्म के अर्थी जलाने लगे। आसपास के लोगों ने यह देखकर शक किया कि क्या यहां कोई गैर-हिंदू व्यक्ति है। जब अर्थी का कपड़ा हटाया गया, तो स्वाभिमान के शिखर पर पहुंचकर सबको पता चला कि उसमें मुर्दा नहीं बल्कि प्लास्टिक का पुतला लगा हुआ था।
व्यापारी ने बताया कि वह अपने दादाजी का अंतिम संस्कार करने आये थे, लेकिन जब उन्हें पता चला कि उनका मुर्दा नहीं बल्कि प्लास्टिक का पुतला है, तो उनका मन कंप कर गया। वह ने बताया, 'मैंने कभी भी इस तरह की घटना सुनी नहीं और मुझे लगता है कि यह धोखाधड़ी की एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है।'