स्पॉटलाइट-सोनाली ने किया नैचुरोपैथी का समर्थन, डॉक्टर्स बोले झोलाछाप: क्या होती है ऑटोफैगी, क्या ये कैंसर ट्रीटमेंट में मददगार है, देखें वीडियो

अरे भाई, यह तो सोनाली बेंद्रे की एक नई फिल्म बना रही है! पहले वह अपने एक्स विवाही दोस्त को डॉक्टरों से भरोसेमंद बताती हैं और फिर नैचुरोपैथी का समर्थन करती हैं, तो अब वो ऑटोफैगी के बारे में भी बोल रही हैं। लगता है वह अपने जीवन में कुछ नया-नया करने की कोशिश कर रही हैं! लेकिन मुझे लगता है कि डॉक्टर्स सोनाली बेंद्रे से नाराज होंगे, नहीं तो ऑटोफैगी जैसी खतरनाक बीमारी पर चर्चा करने में क्या गलती होगी? और नैचुरोपैथी वास्तव में मददगार है या नहीं, यह तो देखने के लिए ही है। 🤣👍
 
ऐसा लगता है कि सोनाली बेंद्रे ने फिर से गलतियां की हैं... यह समय उसके लिए मुश्किल हो सकता है। नैचुरोपैथी वास्तव में मददगार नहीं है, इसके बजाय डॉक्टरों को जरूरी समझना चाहिए। और ऑटोफैगी क्या है? यह एक खतरनाक बीमारी है जिसे लेने से बचना चाहिए। मुझे ऐसी खबरें पढ़ने में खुशी नहीं होती, लेकिन फिर भी जरूरी है कि हम सबhi जानकारी प्राप्त करें।
 
ਇੱਥੇ ਬਹੁਤ ਸੰਭਵ ਨਹੀਂ ਕਿ ਡਾਕਟਰਾਂ ਦੀ ਸੋਨਲੀ ਬੰਦਰੇ ਦੇ ਉਮਮੇਦ ਪ੍ਰੋਫ਼ੈਸ਼ਨਲ ਡਾਕਟਰਾਂ ਦੁਆਰਾ ਵਿਗਿਆਨ ਅਤੇ ਬਹੁ-ਜਣਿਆ ਰੋਗ-ਪਸੰਦੀਆਂ ਦਾ ਡੌਲਟ ਕਰਵਾਉਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ। ਜਗਤ ਦੀ ਇੱਛਾ ਹੈ ਕਿ ਹਮ ਲੋਕ, ਸਿਹਤ, ਪਰ ਨਾਚੂਰਲ ਮੈਡੀਸ਼ਨ ਵੱਲ ਝੁਕਣ ਦੇ ਅਸੰਗਤ ਜੰਗਲ ਵਿੱਚ ਡਾਕਟਰਾਂ ਦਾ ਪੈੱਟਾ ਹੀ ਨਹੀਂ ਬਣਿਆ।

ਸੋਨਲੀ ਬੰਦਰੇ ਦੀ ਡਾਕਟਰ ਮੁਖਾਤਿਬ ਜਗਤ ਵਿੱਚ ਰਹੀ ਅਸਲ ਉੱਨਤੀ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਾਫ਼ੀ ਮਦਦ ਕਰਨ ਜੋਗਾ ਹੈ।
 
कौन सी बातें ऐसी हो सकती हैं? अगर मेरा एक्स-विवाही दोस्त वास्तव में डॉक्टरों से भरोसेमंद नहीं है तो फिर क्यों लोग उनके बयान पर इतना जोर देते हैं? और अगर नैचुरोपैथी वास्तव में मददगार है तो फिर डॉक्टर्स नाराज क्यों हुए? यह सोचते समय एक सवाल आ गया है - क्या हमारे समाज में सच्चाई और ज्ञान का मूल्य कभी बदलेगा? 🤔

कुछ लोग बात करने में रुचि रखते हैं और दूसरों से पूछताछ करते हैं, जबकि दूसरों अपनी बात रखने में रुचि रखते हैं और किसी को भी गलत समझने देते हैं। यह सब एक बड़ा मेला बन गया है जिसमें हर कोई खुद को सबसे बड़े बताता है। लेकिन वास्तविकता क्या है? 🤷‍♀️

मुझे लगता है कि अगर हम सच्चाई और ज्ञान पर ध्यान देते हैं, तो हमारे समाज में बदलाव आएगा। हमें अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की जरूरत है, न कि नकारात्मक बातों पर ध्यान देना। यही मेरा विचार है! 💡
 
नर्थ क्या कर रहे है! सोनाली बेंद्रे जी का बयान सुनकर मुझे थोड़ा अजीब लगा, और अब जब डॉक्टर्स नाराज हो गए हैं तो मुझे लगता है कि शायद उन्होंने अपने बयान को अच्छी तरह से सोचा नहीं था। ऑटोफैगी की बात करें तो यह एक जैसा ही है जिस पर डॉक्टर्स और विशेषज्ञ कहते हैं। लेकिन नैचुरोपैथी की बात करें तो मुझे लगता है कि इसके पीछे कुछ तर्क भी हो सकते हैं, लेकिन शायद इसकी सीमाएं भी होनी चाहिए।
 
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