स्पॉटलाइट-यहां काजू, बादाम, चिरौंजी डालते हैं वोट: आगर-मालवा के पोलिंग स्टेशन 93,94 की क्या है खासियत, देखें वीडियो

आगर-मालवा में लोग वोट डालने के दौरान काजू, बादाम, चिरौंजी और अन्य सामग्रियों को वोटिंग हेल्थ पेपर पर रखकर डालते हैं। यहां के पोलिंग स्टेशन 93 और 94 में वोट डालने का यह तरीका एक बार फिर से आ गया है।

पुलिस अधिकारी बताते हैं, "हमने देखा है कि लोग अपने नाम, पता और जन्म तिथि लिखकर वोटिंग पेपर पर चीरा लगाकर डालते हैं। इसके अलावा, काजू, बादाम, चिरौंजी और अन्य सामग्रियों को भी वोटिंग पेपर पर रखकर डाल देते हैं।

इस तरह की घटनाएं आगर-मालवा में कई बार हुई हैं। पुलिस ने इन घटनाओं को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की है, लेकिन अभी भी ऐसी घटनाएं होती रहती हैं।

आगर-मालवा में वोटिंग पेपर पर चीरा लगाकर डालने के इस अनोखे तरीके से यह सवाल उठता है कि लोग अपने नाम और जन्म तिथि सही ढंग से नहीं बता पा रहे हैं या फिर वोटिंग प्रक्रिया में घायबपन बनकर डटे हुए हैं।
 
मुझे लगने को तो ऐसा लगता है की लोग अपने बुद्धिमत्ता से बहुत दूर हो गए हैं... वोट डालने के दौरान काजू और अन्य चीजों को पेपर पर रखकर डालना या फिर नाम, पता और जन्म तिथि सही ढंग से नहीं बताना... यह तो बस मननीय है 🤯

लेकिन सवाल यह है की हम लोग अपने मतदान अधिकार का प्रयोग करने में इतने अजीब व्यवहार कर रहे हैं... हमें लगता है की हमारा मतदान एक ऐसा अधिकार है जो हमें स्वतंत्र रूप से अपनी पसंद व्यक्त करने की अनुमति देता है, लेकिन वोट डालने के दौरान ऐसे तरीकों को अपनाकर... यह तो एक अजीब सा व्यवहार है 🤔

हमें अपने समाज में जागरूकता फैलानी चाहिए, ताकि लोग अपने मतदान अधिकार का प्रयोग करने में सावधानी और समझदारी से आगे बढ़ सकें... लेकिन फिर भी, हमें यह सवाल उठना चाहिए की क्या हम अपने समाज में परिवर्तन लाने के लिए सही तरीकों से मतदान कर रहे हैं? 🤝
 
मुझे यह देखकर बहुत चिंतित हुआ 🤔। आगर-मालवा में लोग वोट डालने के दौरान इतनी शरारत कर रहे हैं कि पुलिस भी नहीं समझ सकती ।

**वोटिंग प्रक्रिया सुरक्षित करने के लिए** 🛡️ हमें अपने नाम, पता और जन्म तिथि सही ढंग से बताना चाहिए।
वोट डालने से पहले सभी को अपने बारे में पूरी जानकारी रखनी चाहिए।

मुझे लगता है कि हमें वोटिंग पेपर पर चीरा लगाकर डालने का इस तरीका छोड़ देना चाहिए।
इस तरह की घटनाएं न हों।

क्या हमें अपने देश की वोटिंग प्रक्रिया में सुधार करने की जरूरत नहीं है? 🤝
 
मुझे यह बात बहुत परेशान करती है कि लोग वोटिंग पेपर पर चीरा लगाकर डालते हैं और फिर भी उनको नाम, पता और जन्म तिथि लिखने में असमर्थ होते हैं। मुझे लगता है कि हमारी शिक्षा प्रणाली में थोड़ा सुधार करना चाहिए ताकि लोग अपने नाम, पता और जन्म तिथि सही ढंग से बता सकें। 🤔
 
बस बात करें, यह तो बहुत भूलभुलैया लगने की बात है 🤦‍♂️। लोग सोचते हैं कि अगर वोटिंग पेपर पर चीरा लगाकर डालते हैं, तो वोट डालने में कुछ फरक नहीं पड़ता। लेकिन यह तो एक बहुत बड़ा जोखिम है, खासकर जब सुरक्षित मतदान प्रक्रिया हो। अगर हमारी देशभक्ति तो सच्ची होती, तो लोग अपने नाम और जन्म तिथि सही ढंग से बताते। 🙏
 
मुझे यह सवाल क्यों आता है कि क्या हमारी देशभर के बाजारों में खाद्य सामग्रियों को पैक कर कुछ भी चीज़ में भरने का यह तरीका चलना ठीक है? मेरी नानजी की बहन की दुकान में कभी ऐसा हुआ था, तो वो हमेशा हंसती रहती, लेकिन जितनी दफ्तरों में लगातार ऐसी बातें सुनाई देते हैं उतना ही मेरा सिर धुंधला हो जाता है। क्या लोग अपनी जिंदगी में वोट डालने से पहले खाना पकाने का तरीका सीख नहीं पाते?
 
मुझे यह बहुत दुखद लगता है कि लोग वोट डालने के दौरान इतने ही तरीकों से गलती कर रहे हैं 😔। पुलिस को मिलने जैसे नाम, पता, जन्म तिथि चीरा लगाकर डालने का तरीका तो लोग अपने साथ ले जाते हैं। और फिर काजू-बादाम-चिरौंजी जैसी चीजें वोटिंग पेपर पर रखने का तरीका? यह तो किस दिशा में ले जा रहे हैं? 🤔

मुझे लगता है कि हमारे देश में शिक्षा और जागरूकता की कमी बहुत ज्यादा है। लोगों को यह समझना चाहिए कि वोट डालने का तरीका कितना महत्वपूर्ण है। हमें अपने नाम, जन्म तिथि सही ढंग से बताने का प्रयास करना चाहिए, न कि चीजों को वोटिंग पेपर पर रखने का। 🤷‍♂️

आगर-मालवा में ऐसी घटनाएं होने का मतलब है हमारे देश में शिक्षा और जागरूकता की कमी बहुत ज्यादा है। हमें अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देनी चाहिए, उन्हें वोटिंग प्रक्रिया में सही ढंग से जानकारी देनी चाहिए। 📚
 
यह तो किसी भी चीज़ के लिए एक गड़बड़ी है! पर क्या हमें इतनी गंभीरता से इसकी बात करनी चाहिए? यह तो बस एक छोटी सी दिक्कत है जिसमें हमें अपने आप को समझना होगा। लोगों को मतपत्र पर चिरौंजी और काजू लगाने की जरूरत नहीं है, फिर भी वोटिंग प्रक्रिया अच्छी से अच्छी जाती है।
 
मुझे यह बहुत अजीब लग रहा है कि लोग ऐसी चीजें अपने बैलेट पर रखकर डालते हैं ताकि वोटिंग प्रक्रिया में कोई भी समस्या न हो। यह तो किसी काम की बात नहीं है, बस काजू और बादाम जैसी चीजें लेकर फंसने की बात है।
 
यह बहुत ही अजीब बात है कि लोग वोट डालने के दौरान सामग्री भरकर पेपर पर लगा कर डालते हैं यह तो एक नई दुनिया में बदल गई है...काजू और बादाम जैसी चीजें तो फिर भी क्यों डालते हैं? और वोटिंग पेपर पर चीरा लगाकर डालने से क्या लाभ है? यह तो हमारी देश की गुणवत्ता को कैसे बढ़ा सकता है? 🤔😒
 
यह बहुत अजीब बात है कि लोग अपने नाम और जन्म तिथि सही ढंग से नहीं बता पा रहे हैं और इससे वोटिंग प्रक्रिया में घायबपन बनकर डटे हुए हैं। क्या हमारे देश में शिक्षा की गुणवत्ता इतनी खराब हो गई है कि लोग अपने बारे में जानकारी नहीं रखते? या फिर वोटिंग प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की समस्या इतनी गंभीर हो गई है कि लोग इसके लिए किसी अन्य तरीके से निकलने की कोशिश कर रहे हैं?

मुझे लगता है कि हमें अपने देश में शिक्षा और वोटिंग प्रक्रिया में सुधार करने पर ध्यान देना चाहिए। अगर लोग अपने नाम और जन्म तिथि सही ढंग से नहीं बता पा रहे हैं तो हमें उन्हें शिक्षित करना चाहिए।
 
मेरे दिल को खेद है कि लोगों ने फिर से ऐसी गड़बड़ी की है। काजू और बादाम जैसी चीजें वोटिंग पेपर पर रखना क्यों कर रहे हैं? यह तो सिर्फ मूर्खतापूर्ण है! उनकी समझ भी नहीं आ गई है कि यह बहुत बड़ा अपराध है। और पुलिस को इस तरह की चीजें रोकने में इतना समय लेना दिलचस्प है, हमेशा लोगों को ऐसे ही तरीके से धोखा देते रहते हैं... 😒
 
मैंने देखा है कि चिकित्सक ने भी ऐसा ही सोचा होगा, जैसे लोग वोटिंग पेपर पर चीरा लगाकर डालते हैं, वहाँ बीमारियों को ठीक करने में भी ऐसी गलती करते हैं 🤕 . क्या यही नहीं है?
 
क्या कोई सोचने दे की हमारे समाज में इतनी गरीबी और अनजानी जीवन की इस तरह की समस्या क्यों आ गई है? यह तो एक बड़ी समस्या है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम निराश होना चाहिए। हमें अपने समाज में बदलाव लाने की कोशिश करनी चाहिए। अगर हमारे पास इतनी सामग्री नहीं तो फिर क्यों डालते हैं? यह एक सवाल है जिसका जवाब हमें खुद देना होगा।
 
क्या कुछ नहीं करेगा, हर बार वोट डालने की छलांग न जाने के बाद से काजू, बादाम, चिरौंजी जैसे मिथकीय चमत्कारों को लेकर आगर-मालवा में हंसने-मेसने कर रहे हैं 🤣। यह तो जरूर है कि उन्हें सीखने का मौका मिल जाए, फिर न तो वोटिंग पेपर पर चीरा लगाकर, न तो काजू डालकर, और न ही बादाम बिट्टा 🤦‍♂️
 
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ਅਜਿਹੇ ਘਟਨਾਵਾਂ ਤੋਂ ਬਚਣ ਲਈ ਆਪਣੀ ਖ਼ਕੀਮਤ ਅਭਿਆਸ ਕਰਨਾ ਅਜਿਹੇ ਪ੍ਰਬੰਧਾਂ 'ਚ ਹੀ ਵੱਡੀ ਮਦਦ ਕਰਦਾ ਹੈ।
 
मुझे यह बहुत दुखद है कि आज भी लोग ऐसी बुरी आदतों में डूबे हुए हैं जो हमारे समाज को नुकसान पहुंचाती हैं। वोटिंग पेपर पर चीरा लगाकर डालने और अन्य सामग्रियों को रखने का तरीका तो ख़तरनाक है इसके अलावा, लोग अपने नाम, पता और जन्म तिथि सही ढंग से नहीं बता पा रहे हैं 😔। यह हमारे देश के भविष्य को खतरे में डाल रहा है।
 
मैंने भी ऐसे दिनों का अनुभव किया है जब मेरे दोस्त ने बातचीत करने के लिए अपने पैरों को छोड़ दिया होगा 🤣, यह तो वोटिंग के दौरान काजू और बादाम डालने की बात नहीं है। लेकिन मुझे लगता है कि भारतीय चुनाव प्रणाली में थोड़ी सी राहत देने की जरूरत है, या फिर बस कुछ चीजें बदलने की, जैसे कि वोटिंग के बाद लोगों को कोई छुट्टी दिलानी चाहिए, ताकि वे अपने नाम और जन्म तिथि सही ढंग से नहीं बता सकें।
 
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