सेंट्रल विस्टा जैसी बनेगी ओडिशा विधानसभा, 3600 करोड़ बजट: 100 साल की तैयारी, 300 विधायकों के लिए जगह, लेकिन क्यों हो रहा विवाद

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने ओडिशा में नए विधानसभा भवन को अपनी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बनाने का फैसला किया है। इस प्रोजेक्ट पर 3,623 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है, जिसमें न केवल विधानसभा भवन को बनने दिया जाएगा, बल्कि इसके साथ ही लोक सेवा भवन यानी सचिवालय का भी निर्माण किया जाएगा।
इस प्रोजेक्ट पर सरकार का कहना है कि यह भविष्य में 50 साल तक चलने वाली रणनीति है, ताकि आने वाले समय में ओडिशा को फिर से बनाने की जरूरत न पड़े। इस प्रोजेक्ट पर सरकार ने आरोप लगाया है कि इससे विपक्षी दलों के लिए अपनी राजनीतिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी।
 
नहीं तो ये सचमुच एक बड़ा प्लान है। 50 साल तक चलने वाली रणनीति? अरे वाह! ओडिशा की सरकार तो बस अपने भविष्य को सुनिश्चित करना चाहती है, लेकिन क्या यह भविष्य वास्तव में 50 साल तक चलेगा या नहीं? और इसके लिए इतनी बड़ी राशि खर्च करने का क्या मतलब? कोई जवाब नहीं दिया गया, बस प्लान बनाकर चलना। और फिर विपक्षी दलों को अपनी राजनीतिक गतिविधियों में रुचि बढ़ाने का आरोप लगाया जा रहा है? यह तो बस एक चाल है।
 
ओडिशा में नए विधानसभा भवन पर 3,623 करोड़ की लागत... यारे, यह तो बहुत बड़ा पैसा है! सरकार ने कहा है कि यह भविष्य में 50 साल तक चलने वाली रणनीति है, लेकिन मुझे लगता है कि यह तो बहुत ही देर से किया जा रहा है। हमारे देश की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है, तो फिर 3,623 करोड़ कैसे बचाया गया? और विपक्षी दलों के लिए रुचि बढ़ने के बारे में क्या सरकार सोच रही है? यह तो बस चुनाव में पैसे डालने की बात है।
 
ओडिशा में नए विधानसभा भवन का प्रोजेक्ट बहुत बड़ा है, लेकिन मुझे लगता है कि यह कितनी सुस्त दृष्टि से बनाया गया है? 3,623 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही हैं और फिर भी भविष्य में 50 साल तक चलने वाली रणनीति है? इसके लिए इतना पैसा क्यों खर्च किया जा रहा है? मुझे लगता है कि सरकार अपनी राजनीतिक गतिविधियों में अधिक रचनात्मकता लानी चाहेगी।
 
मेरे अनुसार यह बहुत ही बड़ा व्यय है, जो हमारे देश के आर्थिक संतुलन पर बहुत प्रभाव डालेगा। ओडिशा में भी इतना पैसा खर्च करना फायदेमंद नहीं होगा, खासकर जब हमारे देश के अन्य राज्यों में ज्यादा जरूरतें हैं।
 
बस ओडिशा में बहुत बड़ा प्रोजेक्ट हो रहा है 🤔, 3 साल के बाद तक चलने वाला इसे बनाने की योजना तय हुई है। मुझे लगता है कि यह भविष्य में राजनीति में बदलाव लाने का एक तरीका हो सकता है, लेकिन कुछ सवाल भी उठते हैं। क्या 50 साल तक चलने वाली रणनीति में वास्तव में बदलाव आएगा या यह बस एक प्रोजेक्ट की तरह ही रहेगा।
 
नया ओडिशा विधानसभा भवन तो बिल्कुल बिल्कुल, सरकार की इस प्लान से ओडिशा को फिर से बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वहां के लोगों को स्थानिक प्रोजेक्ट में रुचि न हो।

सरकार द्वारा लगाए गए आरोप विपक्षी दलों को अपनी राजनीतिक गतिविधियों में रुचि बढ़ाने के लिए तय कर रही है, लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि विपक्षी दल भी अपनी-अपनी राजनीतिक रणनीति से खेलते रहते हैं।

इस प्रोजेक्ट पर 3,623 करोड़ रुपये खर्च करना तो बहुत बड़ी मुनाफे की बात है, लेकिन हमें यह भी सवाल उठाना चाहिए कि ओडिशा के वास्तविक जरूरतों का ध्यान इस प्रोजेक्ट में रखा गया है या नहीं।
 
ओडिशा में नए विधानसभा भवन को बनाने का यह प्रोजेक्ट बहुत बड़ा है, लेकिन मुझे लगता है कि इसमें कुछ और हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। सरकार ने कहा है कि यह भविष्य में 50 साल तक चलने वाली रणनीति है, लेकिन मुझे लगता है कि यह भी एक बहुत बड़ा प्रयास है।

मेरी बात हो तो, अगर इसमें थोड़ा अधिक विस्तार हुआ, तो यह सचमुच भविष्य की रणनीति बन जाएगा। लेकिन अगर हम देखें, तो इसे सिर्फ एक राजनीतिक प्रयास माना जा सकता है।

कोई भी विशेषता इसमें नहीं जोड़ी गई है, जैसे कि यह भवन ऊर्जा-अपभोगी बनाया गया, या इसकी सुरक्षा को बढ़ाया गया। मुझे लगता है कि अगर सरकार ने ऐसा कुछ भी इसमें शामिल किया, तो यह प्रोजेक्ट और भी बेहतर हो जाता।
 
ओडिशा में नए विधानसभा भवन की बात सुनकर मुझे लगता है कि यह सरकार की बहुत बड़ी राजनीतिक खेल है। 3,623 करोड़ रुपये जो इस प्रोजेक्ट पर खर्च करने जा रहे हैं, वह तो सिर्फ लोकसेवा भवन बनाने में नहीं लगेगा, बल्कि यह सरकार की अपनी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी है। मुझे लगता है कि विपक्षी दलों को फिर से ऐसी बड़ी राजनीतिक खेल में शामिल करने के लिए, सरकार ने यह प्रोजेक्ट बनाने का फैसला किया है।
 
बहुत बड़ा खर्च हो रहा है इस नए भवन के लिए। 3 सालों तक मुनाफा नहीं कर पाएगा, फिर भी इतना पैसा खर्च किया जा रहा है। और यह तो बस शुरुआत है, दो-तीन साल बाद इसके बजट में बदलाव आ सकता है तो क्या होगा। और किसने ऐसा सोचा, ओडिशा की समस्याओं पर कोई हल निकलेगा या नहीं। यह पैसा विपक्षी दलों को राजनीति में मदद करने के लिए दिया जाएगा तो कुछ भी होगा।
 
ओडिशा में नए विधानसभा भवन को बनाने का यह प्रोजेक्ट तो बहुत बड़ा है, लेकिन मेरे मन में एक सवाल है... 3,623 करोड़ रुपये की इतनी बारात क्यों? हमारे देश की आर्थिक स्थिति तो अभी भी बहुत खराब है, और सरकार इतनी पैसे का इस्तेमाल करने के लिए तैयार है? मुझे लगता है कि यह रणनीति तो विपक्षी दलों को आकर्षित करने के लिए होगी, लेकिन मैं सोचता हूँ कि इससे हमारे देश की आर्थिक स्थिरता पर भार नहीं पड़ेगा। और यह सवाल भी है... आने वाले 50 साल तक चलने वाली रणनीति में ओडिशा को फिर से बनाने की जरूरत तो नहीं? हमारे देश की राजनीति में ऐसी बहुत सी बातें होती रहती हैं जिनमें सच्चाई और वास्तविकता नहीं होती।
 
ओडिशा के भविष्य को देखने पर मुझे लगता है कि हमारे नेताओं को यह सोचना चाहिए कि हमारी सरकार की योजनाएं कितनी लोकप्रिय और उपयोगी होंगी, या फिर वे केवल अपनी राजनीतिक रणनीति को बढ़ावा देने के लिए हैं। 3,623 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट तभी सफल होगा, जब हमारे नागरिकों को यह महसूस हो कि ये धन उनके भविष्य को बेहतर बनाने में लगाया जा रहा है।
 
😂🏛️ ओडिशा में नए विधानसभा भवन को बनाने का फैसला करने वाली सरकार तो पूरी तरह से खिलखिलाती है 🤣, लेकिन क्या ये भवन 50 साल तक चलेगा? 💁‍♀️🕰️ मुझे लगता है कि यह भविष्य में भी सरकारों को नए-नए खेल खेलने का मौका देगा। 🤹‍♂️
 
बात करो तो ये नया सीटी भवन और सचिवालय कितनी बड़ी बात है 😒। हमारे देश की अर्थव्यवस्था इतनी खराब है कि 3,623 करोड़ रुपये लेने में कैसे फंस गए? यह तो बस विपक्षी दलों को अपने पक्ष सुनाने का एक तरीका है। और 50 साल तक चलने वाली रणनीति? बिल्कुल, जैसे हमेशा के लिए देश को फिर से बनाने की जरूरत होगी, ताकि विपक्षी दल अपने गुब्बारे भर सकें 😂
 
बहुत दिलचस्प, यह प्रोजेक्ट बहुत बड़ा होगा, लेकिन क्या हम वास्तव में भविष्य के लिए तैयार हैं? 3,623 करोड़ रुपये से भी ओडिशा को फिर से बनाने की जरूरत पड़ेगी, तो फिर क्या यह वास्तव में भविष्य की योजना नहीं है, बल्कि इसका सिर्फ एक निवेश होगा। और विपक्षी दलों के लिए रुचि बढ़ने की बात, शायद यह तो सरकार की खुद की रणनीति है।
 
मुझे लगता है कि यह बहुत बड़ा निवेश है, और यह देखकर उत्साहित हूँ कि ओडिशा को फिर से बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन 3,623 करोड़ रुपये इतने पैसे में तो क्या गलत होगा?
 
नया ओडिशा विधानसभा भवन बनाने की योजना तो अच्छी है, लेकिन 3,623 करोड़ रुपये इतने पैसे से क्यों खर्च करने पड़ेंगे? मुझे लगता है कि इस परियोजना में कम से कम एक छात्र दखल देना चाहिए। हमारी नई दिल्ली विश्वविद्यालय ने भी ऐसी ही प्रोजेक्ट्स में बहुत अच्छे परिणाम दिखाए हैं। शायद इसे भी सीखकर अपने भविष्य को बनाना चाहिए।
 
मुझे यह जानकारी बहुत दिलचस्प लगती है 🤔, ओडिशा में नए विधानसभा भवन को बनाने की योजना पर सरकार ने तीन साल का समय लिया है, और इस प्रोजेक्ट पर 3,623 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। यह तो बहुत बड़ा पैसा है 🤑, और मुझे लगता है कि इससे ओडिशा की वित्तीय स्थिति थोड़ी बेहतर हो सकती है। लेकिन सरकार ने दावा किया है कि यह भविष्य में 50 साल तक चलने वाली रणनीति है, ताकि आने वाले समय में ओडिशा को फिर से बनाने की जरूरत न पड़े। मुझे लगता है कि इससे सरकार अपनी प्रतिद्वंद्विता की चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत आधार बना सकती है।
 
इस तरह से बीजेपी ओडिशा में भी अपनी पावर खेलने लगी है 🤯, 3 साल का भविष्य में कितना चलेगा इसका मतलब तो यह नहीं पता कि सरकार तय कर दी है या कुछ और ? किसानों के बैंक खाते से पैसे निकालने में भी इतनी देर लगती है लेकिन ओडिशा विधानसभा भवन पर 3 अरब रुपये खर्च करने में सरकार तो तुरंत चली जाएगी 🤑
 
बिल्कुल सही करने की जरूरत नहीं है, जो भी बन रहा है कम से कम दिनचर्या बदलने की जरूरत है। तीन साल बाद खट्टा पानी चलेगा, इसे किसी और का फायदा नहीं होगा। सच्चाई यह है कि सरकारी सड़कें कभी भी परिवहन को सही बनती नहीं।
 
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