बिल्कुल भूल गए हैं कि कैसे साध्वी जी अपने प्रवचनों से लोगों का दिल छू जाता था, वो हमेशा नैतिक मार्गदर्शन और मानव सेवा की बात करती थी, जो आज भी हमें सिखाती है। उनकी मृत्यु से समाज में शोक की लहर आ गई है, लेकिन उनके जीवन के दौरान वे हमेशा गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करती थीं, जो आज भी हमें प्रेरित करती है।
मुझे लगता है कि हमारे समाज में अधिक से अधिक लोग ऐसे होने चाहिए जैसी थीं साध्वी प्रेम बाईसा। उनकी शिक्षाएं और उपदेश आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं और हमें सिखाते हैं कि सच्ची साधना मानवता और दूसरों की मदद करना है।
मुझे याद है जब मैं छोटा था, तो मेरी माँ हमेशा मुझे कहती थी, "सद्गृहस्थ" जैसे हो जाना, अर्थात साधारण जीवन जीना और दूसरों की मदद करना। साध्वी प्रेम बाईसा ने इसी गहरी समझ को अपने जीवन में लाया था और आज भी हम उनके उपदेश का हिस्सा बन सकते हैं।
मुझे लगता है कि हमें अपने समाज में अधिक से अधिक ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए जैसे थीं साध्वी प्रेम बाईसा। उनकी शिक्षाएं और उपदेश आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं और हमें सिखाते हैं कि सच्ची साधना मानवता और दूसरों की मदद करना है।