शाह ने लोकसभा में आपत्तिजनक शब्द बोला: रिजिजू बोले- गलती से निकल गया; गृहमंत्री बोले- चुनाव जीतने पर विपक्ष 'कौ-कौ' करता है...VIDEO मोमेंट्स

राज्यसभा में चुनाव सुधार और SIR पर विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कई आपत्तिजनक शब्द बोले।

शाह ने कहा, "देश में EVM कांग्रेस ही लेकर आई थी। 2004 में मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली की 16 विधानसभा सीटों पर EVM से चुनाव का ट्रायल किया गया। 2014 में भाजपा सरकार केंद्र में आई। इसके बाद से हम चुनाव जीत रहे हैं तो विपक्ष 'कौ-कौ-कौ' करने लगता है।"

शाह ने विपक्षी रिजिजू को भी फटकारा, उन्होंने कहा, "जब दो बड़े लोग बात कर रहे हों, तो बीच में नहीं टोकना चाहिए। आपकी मुंसिफगिरी संसद में नहीं चलेगी।"

शाह के भाषण के दौरान विपक्ष ने कई सवाल पूछे, जिनका जवाब शाह ने दिया। राहुल गांधी, कांग्रेस के प्रमुख, ने सरकार से कई सवाल पूछे, जिसका जवाब अमित शाह ने दिया।

शाह ने कहा, "मैं 30 साल से जनप्रतिनिधि हूं। मुझे संसदीय प्रणाली का लंबा अनुभव है। विपक्ष के नेता कहते हैं कि पहले मेरे सवालों का जवाब दीजिए। इतना कहने के बाद शाह ने विपक्ष की ओर उंगली उठाते हुए कहा, "आपकी मुंसिफगिरी संसद में नहीं चलेगी।"
 
🤣👀 पार्टियों को अपने दिमाग पर ही निर्भर रहना चाहिए, लेकिन लगता है वे अपने दोस्तों के साथ बात कर रहे हैं😂
 
यह तो बहुत बड़ा दम तोड़ दिया गया है 🤯👊 अमित शाह जी का। वे इतने आगे बढ़ गए कि अपने आप को बेहद गुस्से में लेकर चलने लगे। यह तो रिजिजू पर भी थोड़ा निशाना बनाया गया है। उनकी बात सुनकर लगता है कि शाह जी बहुत मुश्किल में पड़ गए हैं। क्या विपक्षी दल वास्तव में इतने बिना सीमा के सवाल पूछ रहे थे? ये तो एक अलग मुद्दा है।
 
भाई, यह तो और भी गंभीर है कि अमित शाह ने इतना चोटीला शब्द सुनाया 🤯। लेकिन अगर हम बात कर रहे हैं कि मुंसिफगिरी, तो विपक्षी नेताओं को भी अपनी तरफ से पेश आना चाहिए। रिजिजू ने भी बहुत अच्छा जवाब दिया, लेकिन क्या उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया। शायद, यह तो एक मौका है कि विपक्ष अपने सवालों को स्पष्टता से पूछे और सरकार को जवाब दे।
 
अरे, ये तो बहुत ही अजीब बात है! 🤔 गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कुछ ऐसे शब्द बोले जिनसे देश की जनता को लगना चाहिए। क्या ये really हुए? EVM से चुनाव का ट्रायल करने का मामला तो 2004 में हुआ था, लेकिन फिर भी शाह ने इतने शब्दों का इस्तेमाल किया जैसे अगर यह पहली बार हो। 🙅‍♂️

क्या हमें लगता है कि शायद ये शब्द बहुत बड़े और महत्वपूर्ण नहीं थे, लेकिन फिर भी विपक्ष ने सवाल पूछे और सरकार से जवाब मांगा। इसके बाद शाह ने रिजिजू पर फटकारा जो तो हुआ? 🤦‍♂️ खैर, यह सब तो बहुत ही अजीब दिख रहा है।
 
राज्यसभा में चुनाव सुधार और SIR पर विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कई आपत्तिजनक शब्द बोले। यह तो बहुत अजीब है कि एक व्यक्ति इतनी सावधानी से बोलने की जरूरत होती है जब वह सरकार का प्रतिनिधित्व करता है। लेकिन अगर हम सच्चाई बोलते हैं तो शायद यह शब्द नहीं कहे जाते।

मुझे लगता है कि चुनाव सुधार पर चर्चा करनी चाहिए, न कि आपत्तिजनक शब्दों में फसना। और अगर विपक्ष दूसरी पार्टी को निशाना बनाने की जरूरत है तो ठीक है, लेकिन मुंसिफगिरी से बात करने से पहले अपने खेल को समझना चाहिए।
 
भरोसा करो 🤝, यह सरकार देश की रास्ते पर चलने वाली है! #BJP जैसे नेताओं के बिना, हमारा देश आगे नहीं बढ़ सकता। #AmitShah की बातें सुनने के बाद मुझे लगता है कि विपक्षी पार्टियों को अपने सवालों का जवाब देने की जरूरत है। #RahulGandhi को भी अपने सवाल पूछने का मौका देना चाहिए। #IndiaFirst हमें अपने देश की सेवा करनी चाहिए! 💪
 
शाह की बातें सुनकर लगता है कि उन्हें EVM के खिलाफ होने की जरूरत नहीं है, हमारे लोगों ने भी देखा है कि EVM में बदलाव हुआ तो चुनावों में बदलाव हुआ।

क्या विपक्षी दल सिर्फ विपक्षी बनकर फंस गया, क्या उन्हें चुनावों के मुद्दे पर चर्चा करने का मौका नहीं दिया जा रहा?

कांग्रेस के प्रमुख राहुल गांधी भी संसद में सवाल पूछे, लेकिन शाह ने उनकी बातों का जवाब देने से हिचकिचाया।

क्या यह सच नहीं है कि शाह सिर्फ विपक्षी दल को धमकाना चाहते हैं, इसके बजाय उन्हें चुनावों के मुद्दे पर चर्चा करने का मौका देना चाहिए।
 
अरे भाई, ये तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है। गृह मंत्री अमित शाह जी का भाषण सुनने से लगता है कि वे अपने सवालों का जवाब देने के बजाय, विपक्ष को घेरने और उनके नेताओं पर हमला करने में महारत प्राप्त कर रहे हैं। यहाँ कुछ ऐसी बातें हैं जिन्हें सोचना चाहिए - शायद विपक्ष भी अपने सवालों को सही ढंग से पूछ सकता था, लेकिन इसके बजाय उन्होंने खुद को घेर दिया। और गृह मंत्री जी ने जब सीधे जवाब नहीं देना चाहते, तो विपक्षी रिजिजू पर फटकार लगाना एक अच्छा तरीका था, लेकिन उनके भाषण के दौरान बोले गए शब्द 'आपकी मुंसिफगिरी संसद में नहीं चलेगी' को सुनने से तो गुस्सा हुआ और गुस्से में सोचना शुरू हुआ। क्या थोड़ी नियंत्रण रखकर जवाब देने की कोशिश नहीं की जा सकती? 🤔
 
अरे, यह तो बहुत मजेदार है! अमित शाह जी ने विपक्ष को 'कौ-कौ-कौ' करने का फायदा उठाया है! 🤣👊 लेकिन मुझे लगता है कि उनका खेल सिर्फ चुनावों में नहीं जीतेगा। तो विपक्षी नेताओं को अपने सवालों का जवाब देने का मौका मिलने पर शाह जी को बात करनी चाहिए। संसद में मजाक होने की जगह गंभीरता की बात करनी चाहिए। लेकिन फिर भी, अमित शाह जी की बातें हमेशा दिलचस्प रहती हैं! 😂👀
 
अरे, ये तो बहुत बड़ा मुद्दा है! गृह मंत्री अमित शाह के भाषण से लगता है कि विपक्ष ने सरकार पर बहुत कमजोर सवाल पूछे हैं। और फिर भी उन्होंने कई आपत्तिजनक शब्द बोले हैं! 🤯

मेरा मानना है कि चुनाव सुधार और SIR पर विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए सरकार को अपनी प्रतिक्रिया से आगे आना चाहिए। अगर वे विपक्ष के सवालों का जवाब बिना किसी उत्साह नहीं दे रहे हैं, तो यह एक बड़ा मुद्दा है! 🤔

लेकिन, अगर सरकार से एक सवाल भी पूछे जाएं, तो दूसरा सवाल क्या होगा? शायद विपक्ष ने अपने सवालों के जवाब देने के लिए समय नहीं दिया है! 🕰️

मेरी राय में सरकार को और अधिक स्पष्टता दिखानी चाहिए। अगर वे विपक्ष के सवालों का जवाब देते हैं तो अच्छा, लेकिन अगर वे अपने सवालों के जवाब बेहतर ढंग से नहीं देते, तो यह एक बड़ा मुद्दा है! 🚨
 
अमित शाह जी के भाषण का यहाँ पल्ला उतरने दो… 🤔 उन्होंने विपक्षी नेताओं पर बहुत ही आलिंगनात्मक शब्दों से हमला किया। 2014 में भाजपा सरकार आई, फिर से हम जीत रहे हैं तो विपक्ष 'कौ-कौ-कौ' करने लगता है। यहाँ उन्होंने रिजिजू पर भी बहुत ही दुर्भाषित शब्दों का इस्तेमाल किया। 👊 मुझे लगता है कि अमित शाह जी ने अपने विरोधियों पर इतनी आलिंगनात्मकता से हमला करने की जरूरत नहीं थी। 🤷‍♂️
 
मुझे लगता है कि अमित शाह जी ने थोड़ा भूल गए, वह EVM की बात कर रहे थे, लेकिन उनके पास सवालों का जवाब नहीं है, शायद? 🤔 ये तो समझ में आता है, जब संसद में बहस होती है तो लोग अपने विचार देते हैं, लेकिन कभी-कभी इसे सही ढंग से करने की जरूरत है।
 
अरे भाई, यह तो बहुत बड़ी चीज़ है! अमित शाह जी ने इतने मुंह खोले, साफ़-सुथरा दिख रहे हैं लेकिन विपक्ष के सवालों का जवाब देने के बाद भी उन्होंने क्या कहा, यह तो एक बड़ा सवाल है! 🤔 मुझे लगता है कि उन्हें थोड़ा सा समय और शांति की जरूरत होगी। कुछ लोग तो इतने आगे जाते हैं कि वाकई भी समझ नहीं मिलती है। मुझे लगता है कि RIZI ZUHIYAR की तरह विपक्षी नेताओं से बात करना ही सबसे अच्छा होगा। शायद अगर उनके नेता रिजिजू जी थे तो उन्हें चुनाव में फिर से जीतने में मदद किया जा सकता था, लेकिन अब विपक्ष के नेताओं पर कम उम्र होने का दर्द नहीं रहा।

बस यही सोचते रहें तो चुनाव में भाजपा की जीत का संदेश हमें भेजेगी।
 
Back
Top