शाह ने लोकसभा में आपत्तिजनक शब्द बोला: रिजिजू बोले- गलती से निकल गया; गृहमंत्री बोले- चुनाव जीतने पर विपक्ष 'कौ-कौ' करता है...VIDEO मोमेंट्स

नई दिल्ली, 20 दिसंबर: लोकसभा में बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव सुधार और SIR पर संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष को जमकर फटकार लगाई। भाषण के बीच बोलने वाले विपक्षी सांसद को नसीहत दी।

शाह ने अपने भाषण में कहा कि चुनाव सुधार पर चर्चा से बीजेपी के लोग भागते नहीं है। इस पर सदन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी अपनी सीट से खड़े हुए और शाह से कहा कि मैं SIR पर अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर डिबेट के लिए आपको चैलेंज करता हूं।

इस दौरान दोनों के बीच तीखी बहस भी हुई।

शाह ने विपक्ष को जमकर फटकार लगाया, "चुनाव सुधार पर चर्चा से बीजेपी के लोग भागते नहीं हैं।"

इस दौरान शाह ने अपने भाषण में कहा कि विपक्ष के चुनाव आयोग की कार्य प्रणाली पर लगातार उठाए जा रहे सवाल पर जवाब दिया। उन्होंने कहा- मैं भी बहुत सोचता हूं ये चुनाव आयोग कहता है कि ***** कुछ नहीं हो रहा। तो ये विपक्ष क्यों सवाल करता है।

शाह ने असंसदीय शब्द का इस्तेमाल किया। विपक्ष ने इस पर हंगामा किया। संसदीय मंत्री रिजिजू ने कहा- गलती से यह निकला है। सदन के पटल से हटेगा।

शाह ने भाषण में कहा कि 2014 के बाद से भाजपा की जीत पर विपक्ष 'कौ-कौ' करता है।

इस दौरान शाह ने अपने भाषण में कहा कि मैं भी बहुत सोचता हूं ये चुनाव आयोग कहता है कि ***** कुछ नहीं हो रहा। तो ये विपक्ष क्यों सवाल करता है।

शाह ने अपने भाषण में विपक्ष के आरोपों पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मैं 30 साल से जनप्रतिनिधि हूं। मुझे संसदीय प्रणाली का लंबा अनुभव है। विपक्ष के नेता कहते हैं कि पहले मेरे सवालों का जवाब दीजिए।

इस पर शाह ने विपक्ष की ओर उंगली उठाते हुए कहा- आपकी मुंसिफगिरी संसद में नहीं चलेगी।
 
अरे, इस चुनाव सुधार और SIR पर तो हमेशा बहुत बहस होती है दिल्ली। लेकिन मैं सोच रहा हूं कि सिर्फ विपक्ष ही नहीं बल्कि बीजेपी के पास भी कई सवाल हैं। जैसे कि चुनाव आयोग की तारीफ नहीं हो सकती, हमें चुनाव में भ्रष्टाचार का मुकाबला करने के लिए सख्त नियम बनाने चाहिए। फिर भी विपक्ष दोनों पक्षों पर सवाल उठाता रहता है। 🤔
 
अरे, ये बहुत ही गंभीर मुद्दा है जिस पर चर्चा हो रही है। चुनाव सुधार और SIR पर इतनी तीखी बहस करना दिल को दरद देता है। हमें यह सोचना चाहिए कि चुनावी प्रक्रिया में सुधार कैसे हो सकता है, ताकि हर कोई सम्मानित महसूस करे। #चुनावसुधारकी zarurat

मैं भी लगता हूं कि हमें अपने नेताओं को अच्छाई-दुराई का अंतर समझने की जरूरत है। #नेताओंकाबढ़ाई #संसदीयजीवन

हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर व्यक्ति, चाहे वह जिस नेता पर वोट दे या उसका समर्थन करे, हमारी सरकार में सम्मानित हो। #समाजिकसंतुलन

शायद हमें अपने नेताओं को और भी जवाबदेह बनाने की जरूरत है, ताकि वे अपने प्रतिनिधियों और मतदाताओं के बीच अधिक संवाद कर सकें। #नेताओंकाजवाबदेह
 
मैंने सुना तो यार चुनाव सुधार और SIR पर बहुत बड़ी बहस हो रही है ना, लेकिन मुझे लगता है कि विपक्षी राहुल गांधी जी ने सही बात कही है, भले ही शाह जी ने थोड़ा असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल किया हो।

मैंने सोचा तो यह बहस चुनाव आयोग के सुधार पर होनी चाहिए, लेकिन लगता है कि दोनों पक्षों में खलल पड़ने वाली बातें हैं। शाह जी ने कहा है कि विपक्षी लोग भागते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि यह बात सही नहीं है।

मैं तो सोचता हूं कि चुनाव सुधार पर चर्चा से देश के लिए अच्छा कुछ निकल सकता है, खासकर जब चुनाव आयोग की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाए जाते हैं।
 
बेटा, ये चुनाव सुधार और SIR पर बहुत ज्यादा बोल रहे लोग हो गए हैं 🤦‍♂️। कुछ दिनों पहले, जब मैंने टीवी देखा था तो कोई भी ऐसी बात नहीं बोलता था। अब यह साबित होता है कि लोग चुनाव सुधार पर इतना ज्यादा बेचैन हुए हैं।

मुझे लगता है कि 2014 में कुछ भी नया और अच्छा नहीं बदला, बस हमारे देश की स्थिति और समस्याएं अलग-अलग हो गई हैं। 🤔

अब जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेताओं पर विपक्षी दलों की आलोचना कर रहे हैं, तो मुझे लगता है कि यह सब चुनाव सुधार और SIR के लिए मुसीबत है 🤷‍♂️

मैंने अपने बड़े भाई की कहानी सुनी थी, जब वह 20 साल पहले अपनी प्राथमिक शिक्षा की परीक्षा दे रहा था। उस समय, हमारे पास इतनी तकनीक नहीं थी, लेकिन हमारे माता-पिताजी ने उसको अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए कड़ी मेहनत की।

आजकल, जब हमारे बच्चों को स्कूल जाने के लिए बस ट्रांसफर और सेमेस्टर ही परीक्षण करने की जरूरत है, तो मुझे लगता है कि यह भी एक प्रकार की शिक्षा है। 📚
 
क्या तो अमित शाह का भाषण देखकर बिल्कुल भागने की जरूरत थी 😒। विपक्ष को जमकर फटकार लगाने के साथ-साथ नसीहत भी देना एक अच्छा तरीका है। लेकिन जब उन्होंने अपने स्वयं के सवालों का जवाब दिया, तो याद आया कि चुनाव आयोग में कुछ 'अचानक' बदल गया है 😜
 
अरे, राहुल गांधी साहब को तो लोकसभा में नसीहत देने की तो कोई बात नहीं, लेकिन जमकर फटकार लगाना थोड़ा भी अधिक है 🙄। शाह जी को अपने भाषण में कहीं सुधार करना चाहिए, न कि विपक्षी सांसद पर. और इस दौरान जो असंसदीय शब्द कहा गया वह तो बिल्कुल नहीं होना चाहिए 🙅‍♂️। सदन में यह हंगामा करने का मतलब विपक्षी पार्टी का रणनीतिक फैसला होना चाहिए, न कि शाह जी के भाषण में।
 
मुझे लगता है यह तो बहुत जरूरी है कि हम सभी छात्रों को पता होना चाहिए कि चुनाव सुधार और SIR पर बोलने वाले लोग हमेशा अपने सवालों का जवाब देने की कोशिश करते हैं ताकि वह सच्चाई जान सकें 🤔

मुझे लगता है कि गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष को जमकर फटकार लगाया है, लेकिन उन्होंने अपने भाषण में कहा कि चुनाव सुधार पर चर्चा से बीजेपी के लोग भागते नहीं हैं यह तो एक दिलचस्प बात है 🤷‍♂️

मुझे लगता है कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपनी सीट से खड़े होकर शाह से चैलेंज लिया है, और दोनों के बीच बहस भी हुई है 🗣️

मुझे लगता है कि यह सब एक अच्छा मौका है कि हम सभी छात्रों को अपने देश की राजनीति में सकारात्मक भाग लेने की आवश्यकता है, और हमें अपने सवालों का जवाब देने की कोशिश करनी चाहिए 📚
 
बिल्कुल! 😊 मुझे लगता है कि लोकसभा में ऐसी बहस तो हमेशा होती है, और यही चुनाव सुधार पर चर्चा से बीजेपी के लोगों को प्रभावित नहीं करती। राहुल गांधी ने सीरियस डिबेट करने का मौका देने के लिए अच्छी बात कही, और शाह जी ने भी बहुत ही आक्रामक तरीके से अपने वाक्यों का चयन किया, तो यही देखना रोचक है 🤔
 
मुझे लगता है कि यह बहुत ही दिलचस्प और जटिल मुद्दा है। SIR पर चर्चा करने की बात करते समय तो हमें यह समझना चाहिए कि चुनाव सुधार का मतलब हर किसी के लिए अलग-अलग होगा। अगर हमारा देश इतना विविध और समृद्ध है तो सिर्फ एक ही विचार नहीं हो सकता, ये तो लोकतंत्र की नींद है। 🤔

इसके अलावा मुझे लगता है कि चुनाव आयोग के पास हमेशा कुछ नया और उत्कृष्ट होना चाहिए। उनकी कार्य प्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है, तो भी हमें विपक्षी पक्ष की बातों पर ध्यान देने की जरूरत है। क्या हमें वास्तव में चुनाव आयोग की आलोचना करनी चाहिए या हम इसे सुधारने की पूरी कोशिश कर सकते हैं? 🤝

मुझे लगता है कि अगर हम लोकतंत्र के बारे में अधिक समझदारी और संवेदनशीलता दिखाते हैं, तो हम अपने देश की राजनीति और चुनावों को और भी सुधारने की ओर बढ़ सकते हैं। 🌟
 
अरे भाइयों, ये तो कुछ नया नहीं दिख रहा है। सरकार द्वारा सिर्फ विपक्ष पर फटकार लगाना और सवाल पूछने वालों को नसीहत देना एक पुरानी गली में चाल चलने जैसा है। 🙄

शाह जी, आप लोगों से कहने की जरूरत नहीं है कि बीजेपी वोट के लिए क्या करने को तैयार है, आपके पास इसके जवाब भी नहीं हैं। 🤦‍♂️

और राहुल गांधी जी, आप अपनी सीट पर खड़े रहें और सवाल पूछें, सरकार को यह अच्छी तरह से समझना चाहिए कि विपक्ष भी उनके खिलाफ है। 😒

सरकार द्वारा SIR पर चर्चा करने से पहले इसके आधारशिला को अच्छी तरह से जानने की जरूरत थी। लेकिन शायद इसे इसलिए नहीं समझा गया क्योंकि यह तो उनके हिसाब से बोलाना आसान है। 😂
 
मुझे लगता है कि जैसे-जैसे चुनावों की तारीखें निकलने लगी हैं वहीं से सभी दल अपनी राजनीतिक बुद्धिमत्ता दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन क्या हमें यह नहीं पता है कि चुनाव सुधार पर वास्तव में गंभीर चर्चा कैसे हो सकती है? 🤔

आजकल सभी दल चुनाव आयोग और SIR जैसे मुद्दों पर बहस करते हुए दिखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मुझे लगता है कि वास्तविक समस्या और इसका समाधान कहाँ है? 🤷‍♂️
 
બીજ પાર્ટીને સમજવા દો, એટલું અમીત શાહ કહે છે 🙄. ચોરાવ છેડિયા ઉઠવા બદલ સમજનીય અભિપ્રાય કહો? 🤔

ચુંટણીમાં વધારે સરળતા લાવવી છે, એટલે બીજે ચોરાવનું કિસ્સુ ન હોય? 🤷‍♂️

મને લાગે છે, બીજ પાર્ટી કહે તો અમીત શાહને દવા લાગે! 💉
 
वाह! अमित शाह की बोली सुनकर तो बहुत उत्साह हुआ 😊। उनका भाषण विपक्ष के प्रति जमकर फटकार लगाने का था। लेकिन जैसे ही मैंने सोचा कि वे कुछ ऐसा कह रहे हैं जिससे विपक्षी सांसद पर नसीहत दें, तो बदला देने के लिए राहुल गांधी ने चुनाव सुधार और SIR पर डिबेट के लिए चैलेंज किया। यह बहुत रोमांचक है! 🤔💥
 
आज बोलते समय भागने का भी मतलब नहीं है। चुनाव सुधार पर चर्चा करना तो जरूरी है, लेकिन जमकर फटकार लगाना भी गलत। राहुल गांधी ने जो सवाल उठाए, वो थोड़ा कमजोर लग रहा है। 🤔

चुनाव सुधार पर चर्चा करना तो जरूरी है, लेकिन जमकर फटकार लगाना भी गलत। राहुल गांधी ने जो सवाल उठाए, वो थोड़ा कमजोर लग रहा है। मुझे लगता है कि संसद में बहस करना एक कला है, लेकिन उसे करने वाले दोनों की बातें सुननी चाहिए।
 
मुझे लगता है कि अमित शाह जी का भाषण बहुत ही पेचीदा था। मैंने उसके दौरे पर बैठकर एक-एक करके समझने की कोशिश की। तो सबसे पहले उन्होंने विपक्षी सांसद को नसीहत दी, जिसे मुझे बहुत दुर्भाग्यपूर्ण लगता है। लेकिन फिर भी वहाँ पर अमित शाह जी ने अपने भाषण में कहा था कि चुनाव सुधार पर चर्चा से बीजेपी के लोग भागते नहीं हैं। यह बहुत ही अजीब लगता है, क्योंकि चुनाव सुधार एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है।

मुझे लगता है कि अमित शाह जी ने अपने भाषण में बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बातें कही थीं। उन्होंने विपक्ष को जमकर फटकार लगाया, लेकिन यह भी विपक्षी पार्टियों के लिए एक अच्छा मौका था। क्योंकि जब कोई विपक्षी पार्टी अपने विरोधी के खिलाफ बोलती है, तो वह अपने समर्थकों को एक साथ लाने का अच्छा मौका देती है।

मुझे लगता है कि अमित शाह जी को अपने भाषण में बहुत ही मुश्किल परिस्थितियों में खड़ा होना पड़ा। लेकिन फिर भी उन्होंने विपक्ष को जमकर फटकार लगाया, जो एक अच्छा तरीका था। लेकिन मुझे लगता है कि अमित शाह जी ने अपने भाषण में बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बातें कही थीं।
 
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