'सर, क्या मैं आपसे मिल सकता हूं', भारत ने खारिज किया ट्रंप का दावा, कहा- PM मोदी के उनसे...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आपसी सम्मान पर आधारित दोस्ताना संबंध साझा करते हैं, इस बात पर विदेश मंत्रालय (MEA) खुलकर कह रहा है कि पीएम मोदी और ट्रंप 'सर' नहीं कहकर एक-दूसरे से बात करते हैं।

ट्रंप ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री मोदी ने हेलीकॉप्टर से सामान पहुंचाने की धीमी गति के मुद्दे को उठाने के लिए उनसे मुलाकात की इच्छा जताई थी। लेकिन MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'प्रधानमंत्री और ट्रंप आपसी सम्मान पर आधारित दोस्ताना संबंध साझा करते हैं, और उन्होंने हमेशा राजनयिक मानदंडों के अनुसार एक-दूसरे को पारस्परिक सम्मान के साथ संबोधित किया है।'

ट्रंप ने आगे कहा था कि भारत ने 68 अपाचे हेलीकॉप्टर का ऑर्डर दिया था, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, भारत ने अमेरिका से कुल 28 AH-64E अपाचे गार्जियन हेलीकॉप्टरों का ही ऑर्डर दिया था।
 
मुझे लगता है कि ये रिश्ता दोनों देशों के लिए फायदेमंद है, अगर हम एक-दूसरे पर निर्भर नहीं होते तो बाजार में ज्यादा सस्ती चीजें मिल सकती हैं 🤑
 
अमेरिकी ट्रंप से पीएम मोदी कैसे दोस्त? 😐 भारत ने तो फिर से 68 अपाचे हेलीकॉप्टर क्यों ऑर्डर किए? 🤔 प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कितने बोलते हैं? 📢
 
अमेरिकी प्रेस में ये बात कह देने पर ज्यादा भार नहीं पड़ता, लेकिन भारत में तो हमेशा कुछ और खेलने की चाह होती है। पीएम मोदी और ट्रंप के बीच वास्तव में कौन सी दोस्ती है, यह पता नहीं चलता। तो फिर क्यों इन्होंने इस मुद्दे पर खुलकर बोल दिया? ज्यादातर लोग बोल रहे थे कि पीएम मोदी ने हेलीकॉप्टर से सामान पहुंचाने का मुद्दा उठाया था, लेकिन अब यह तो कहीं नहीं गया।
 
मुझे लगता है कि PM मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की बातचीत में थोड़ी सच्चाई छुपी हुई है। जो विदेश मंत्रालय ने बताया है, वह सही है, लेकिन यह तो कहीं भी सीमित है। PM को पता है कि ट्रंप की बातें अक्सर गंभीरता से नहीं लेनी चाहिए। और फिर भी, प्रधानमंत्री की तरफ से कहा गया कि हमारे दोस्ताना संबंध में 'सर' नहीं कहकर बातचीत होती है, तो यह तो एक छोटी-छोटी चीज है। लेकिन मैं पूछना चाहता हूं, क्या PM ने वास्तव में ट्रंप से हेलीकॉप्टर से सामान पहुंचाने की धीमी गति को उठाने के बारे में बात किया था, या फिर यह तो पूरी तरह से झूठ था? 🤔
 
मुझे लगातार सोचता रहता हूँ कि युवाओं को भले में दुनिया के बड़े नेताओं से बात करने का अवसर मिल जाए तो वे समझ लें, हम सब एक दूसरे की परवाह करें। पीएम मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेताओं से बात करने से युवाओं को बहुत कुछ सीखने का मौका मिलता है।
 
मुझे लगता है कि पीएम मोदी और ट्रंप जी की बातचीत सुनकर मुझे याद आया कि मेरे दादाजी ने कहा था, 'किसी भी दोस्त को जब भी आप में संदेह आए तो उसकी बात सुननी चाहिए।' पीएम मोदी और ट्रंप जी ने एक-दूसरे की बात सुनकर समझौता कर लिया है, यह अच्छा दिखता है।
 
अरे, तो ये सचमुच है पीएम मोदी और ट्रंप का दोस्ताना संबंध 🤝, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे आपसी सम्मान पर आधारित राजनयिक संबंध न बनाएं। ट्रंप को अपनी बात कहकर खुश रखना जरूरी है, लेकिन मुझे लगता है कि पीएम मोदी और ट्रंप दोनों ने भारतीय विरोधी सेना के हिस्से को प्रभावित करने वाली चीजें करानी चाहिए।
 
मुझे लगता है कि पीएम मोदी और ट्रंप के बीच की दोस्ती बहुत ही प्रभावशाली होगी, वो दोनों अपने आप में बहुत ही समझदार लोग हैं और वो अपने संबंधों को खूब सम्मानपूर्वक रखते हैं। लेकिन, मुझे लगता है कि ट्रंप के दावे पर प्रश्नचिह्न है, अगर भारत ने केवल 28 AH-64E अपाचे गार्जियन हेलीकॉप्टरों का ऑर्डर दिया है तो यह साबित करना मुश्किल होगा कि पीएम मोदी ने हेलीकॉप्टर से सामान पहुंचाने की धीमी गति के मुद्दे को उठाने के लिए उनसे मुलाकात की इच्छा जताई थी। मुझे लगता है कि विदेश मंत्रालय का कहना सही होगा, पीएम मोदी और ट्रंप आपसी सम्मान पर आधारित दोस्ताना संबंध साझा करते हैं।
 
मुझे लगता है कि यह दोस्ताना संबंध ज्यादातर मीडिया पर ध्यान भटका रहा है। प्रधानमंत्री और ट्रंप एक-दूसरे को 'सर' कहकर बात करते हैं या नहीं, इसका फायदा तो दोनों पक्षों को मिल जाएगा। लेकिन चिंताजनक बात यह है कि अमेरिकी निर्यात सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने की बात कहीं मत छोड़ो। भारत को 28 AH-64E अपाचे गार्जियन हेलीकॉप्टरों का ऑर्डर देना तो अच्छा है, लेकिन इसके निजी में क्या हुआ, यह स्पष्ट नहीं है। और ट्रंप की बात पर अमेरिकी सरकार का भी खुलकर जवाब देना चाहिए। 🤔
 
मोदी-ट्रंप की दोस्ती को लेकर तो मुझे लगता है कि यह तो बहुत अच्छा है कि दोनों नेताओं ने आपसी सम्मान पर आधारित दोस्ताना संबंध साझा किया है। लेकिन, मुझे थोड़ा अजीब लग रहा है कि ट्रंप जी ने इतनी जल्दी बात की है और पीएम मोदी ने उनकी बातों पर भरोसा क्यों कर दिया। 🤔

और, यह तो बहुत अच्छा है कि भारत ने अमेरिका से कम से कम गार्जियन हेलीकॉप्टर का ऑर्डर लिया है, इससे हमें अपनी रक्षा प्रणाली पर थोड़ा ध्यान देने का मौका मिलेगा। 🚁
 
मैंने पढ़ा है प्रधानमंत्री को लेकर बातें होने लगी हैं, पर मुझे लगता है कि उन्हें गंभीरता से नहीं समझा जा रहा है। क्योंकि दोनों नेताओं ने आपसी सम्मान पर आधारित दोस्ताना संबंध साझा किया है, तो यह बात जरूरी है कि हम उन्हें ध्यान से सुनें। ट्रंप की बात पर ध्यान देने से पहले, मैं कहूंगा कि भारत ने अमेरिका से 28 ही ऑर्डर दिया, जो 68 का आधार है, तो यह तो एक बात है। लेकिन अगर हमें लगता है कि प्रधानमंत्री की बात सही नहीं है, तो फिर उसके पीछे क्या कारण है? मुझे लगता है कि हमें स्थिति को समझने की जरूरत है और फिर कोई निर्णय लेना चाहिए। 🙏
 
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