दुनिया में फंस गए छात्रों की कहानी सुनकर हर समय आंखों डुबो लेता हूँ । ये बच्चे इतने तेज़ी से पढ़ाई करते हैं कि तनावपूर्ण हालातों में भी उन्हें रुकने का मौका नहीं मिलता। इसीलिए, जब वे अपने परिवारों को लिखने के लिए बैठते हैं, तो उन्हें खुद से पूछना पड़ता है कि क्या वे अपनी पढ़ाई अधूरी कर देना चाहते हैं? ।
इन बच्चों को पढ़ाई किसी भी विदेश की मेडिकल कॉलेज से पूरी करनी होगी, जिससे उनकी पढ़ाई बंद न हो। इसमें कुछ समय लगेगा और जरूरत पड़ने पर हम उन्हें जरूर सहारा दूंगा।
इन छात्रों की पढ़ाई ईरान में बंद होने से हमें यह सवाल करना चाहिए कि क्या हमारी शिक्षा नीति विदेशों में पढ़े गए डॉक्टरों को आकर्षित कर रही है? क्या हमने अपनी शिक्षा नीति में परिवर्तन लाने का समय नहीं है ताकि हम विदेशों में पढ़ने वाले छात्रों को आकर्षित कर सकें?
और यह भी सवाल उठता है कि क्या सरकार ने ऐसे छात्रों के लिए सहायता और समर्थन प्रदान नहीं किया जो अपनी पढ़ाई ईरान में कर रहे थे? उनकी पढ़ाई अधूरी होने से हमारी शिक्षा प्रणाली को खराब दिखने वाला है।
हमें अपनी शिक्षा नीति में बदलाव लाने का समय है, ताकि हम विदेशों में पढ़ने वाले छात्रों को आकर्षित कर सकें और उनकी पढ़ाई अधूरी नहीं हो।