Survey: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के प्रेत की दहशत... 31 फीसदी शहर छोड़ने की तैयारी में, जेब पर भी बढ़ गया बोझ

दिल्ली और आसपास के इलाकों में लगातार खराब हवा से लोगों की सेहत प्रभावित हो रही है, जिससे कई लोगों ने अपने घर बदलने का प्लान बनाना शुरू कर दिया है। एक सर्वेक्षण में पता चला है कि 31 फीसदी लोग इस पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं और शहर बदलने की तैयारी में हैं।

लक्षमी प्रभावित लोगों के बीच मुख्य रूप से थकान, खांसी, आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण देखे गए। 80 फीसदी से ज्यादा लोग स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।

इसी प्रकार, सर्वेक्षण में बताया गया है कि प्रदूषण ने लोगों की जेब पर भी बड़ा असर डाला है। 85.3 फीसदी परिवारों ने बताया कि घर के खर्च बढ़ गए हैं, इसमें एयर प्यूरीफायर, मास्क, दवाएं और डॉक्टर के चक्कर अब रोजमर्रा का हिस्सा बन गए हैं। 41.6 फीसदी लोग तो आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं।

सर्वेक्षण जारी करते हुए स्मिटेन पल्सएआई के सह-संस्थापक स्वागत सारंगी ने कहा कि लगातार खराब हवा सिर्फ पर्यावरण की समस्या नहीं रह गई है। यह अब जीवनशैली, स्वास्थ्य और रहने-जैसे फैसलों को प्रभावित कर रही है। ऐसे हालात में लगातार और मिलकर काम करने की जरूरत है ।
 
मुझे लगता है कि लोग शहर बदलने का प्लान बनाने से पहले अपने घर को और भी अच्छी तरह से साफ कर देना चाहिए 🚮। अगर तो शहर बदलने का निर्णय हमेशा सही होता, तो मुझे लगता है कि अब इसका समय नहीं आ गया है, क्या? पर, प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए हमें अपने घरों को और भी अच्छी तरह से साफ रखने की जरूरत है। मुझे लगता है कि हमें अपने शहर को छोड़कर प्रदूषण को खत्म करने की कोशिश करनी चाहिए, लेकिन फिर भी, घरों को अच्छी तरह से साफ रखना बहुत जरूरी है। मुझे लगता है कि लोग शहर बदलने का प्लान बनाते समय अपने बजट को और भी अच्छी तरह से सोच लेना चाहिए।
 
Wow 🤯 , आगरा वायु गुणवत्ता में सुधार के बाद मुंबई में भी हवा की समस्या बढ़ गई है। 31 फीसदी लोग अपने घर बदलने का प्लान बना रहे हैं , यह तो बहुत बड़ा संकेत है कि हमारी जिंदगी शिथिल हो गई है।
 
अरे, यह तो बहुत गंभीर मामला है, खराब हवा से लोगों की जान जोखिम में आ गई है। यह तो सरकार के लिए एक बड़ा सवाल है कि वे इस समस्या का समाधान कैसे ढूंढेंगे।

मुझे यकीन नहीं है कि एयर प्यूरीफायर और मास्क जैसी चीजें सिर्फ घर के खर्च बढ़ाने के लिए हैं। हमारे देश में कई जगहों पर सरकारी अस्पताल हैं जहां दवाएं और डॉक्टर की सेवाएं नि:शुल्क होती हैं, तो फिर लोगों को घर के खर्च बढ़ाने का इतना दबाव क्यों महसूस होता है?

मुझे लगता है कि सरकार को हमें इसके पीछे की वजह समझनी चाहिए और समाधान ढूंढने की जरूरत है। जैसे कि हमारे देश में कई जगहों पर ब्रिमर कंपनियां हैं जो शुद्ध हवा प्रदान करती हैं, तो फिर सरकार भी ऐसे साधनों को बढ़ावा दे सकती है और लोगों को इसके बारे में बता सकती है।

लेकिन यह तो सरकार का काम है, हमें अपने घर बदलने का विचार करने की जरूरत नहीं है, हमें प्रदूषण के खिलाफ लड़ने की जरूरत है और इसके समाधान ढूंढने की जरूरत है।
 
🤔 ye to sirf aapke घर banane ki baat hai, par yeh bhi hai ki aapko apni zindagi ko banaye rakhna hai. maine dekha hai ki logon ka man apne ghar ke saath hi nahin rehta, woh apni aawaaz sunana chahte hain. 🌳 toh humein pehle aapaat ko chunana hoga, phir humari soch. ab logon ko ek baar bhi thandi aavaaj sunane ki zaroorat padi, toh unhe jeevan mein ek nayi shuruat karne ka mauka diya gaya. 💨
 
हवा की गुणवत्ता बहुत खराब हो गई है तो हमें घर बदलने का सोच लेना चाहिए। 😔

मेरी तस्वीर 🎨 - दिल्ली में हवा से प्रभावित लोग 🤢
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| थकान |
| खांसी |
| आंखों |
| जलन |
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| सांस |
| लेने |
| में परेशानी |
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| आर्थिक |
| तंगी |
| घर का खर्च |
| बढ़ गया है |
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मुझे लगता है हमें अपने जीवनशैली में बदलाव लाना चाहिए। 🌟
 
मैंने यह सर्वेक्षण पढ़ा तो लगता है कि सरकार से बात करने का लोगों का हुआ है। प्रदूषण एक बड़ी समस्या नहीं बसी हुई, लगातार खराब हवा से जीवनस्तर बदल रहा है, यह तो दिलचस्प नहीं। 31 फीसदी लोग अपने घर बदलने की योजना बना रहे हैं, बिल्कुल भी सही है। लेकिन मुझे सवाल है कि सरकार से क्या उम्मीद करेंगे। पिछले कई वर्षों से यह समस्या है, और अबतक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
 
दुर्भाग्य से, हमारा दिल्ली शहर अब एक बड़ा घर खराब हवा से भर गया है 🤕। मेरे अनुसार, यह हमारे पास-जान जीवनशैली पर भी बहुत ही गंभीर प्रभाव डाल रही है। लोग अपने घरों को बदलने और अपने परिवार के स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए मजबूर होना चाहिए। मैं समझता हूं कि यह समस्या बहुत जटिल है लेकिन हमें एक साथ मिलकर इसका समाधान खोजने की जरूरत है। सरकार और नागरिक दोनों ही अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
 
मैंने बचपन में दिल्ली में खेला था, बस बाहर निकलने से ज्यादा शायद था। आजकल यह हवा इतनी खराब हो गई है कि घर छोड़ने का विचार भी करने लगे हैं। तीन साल पहले मेरी रिश्तेदारी की खांसी लग गई, तब से सिर्फ एयर प्यूरीफायर बंद नहीं हो सकता। मैंने अपने दोस्तों को भी ऐसा होने का डर दिखाया था, लेकिन आज सबके घर बदलने की तैयारी हो गई है। यह बहुत जरूरी है कि सरकार और पर्यावरण विभाग लगातार इस मुद्दे पर ध्यान दें।
 
मुझे लगता है यह देखकर बहुत दुख हुआ कि शहर की सेहत खराब होने से लोगों को खेद है। हमें एक-दूसरे पर ध्यान देने की जरूरत है, जैसे हमारी माँ और पापा हमेशा अपने परिवार की सेहत पर ध्यान देते हैं। अब यह शहर की सेहत भी खराब हो रही है तो फिर हमारी बेटियों की सेहत कहां? मैंने अपने घर में एक एयर प्यूरीफायर लगाया हुआ है, लेकिन लगता है यह पर्याप्त नहीं है।
 
अगर ये हवा तो खराब नहीं हो जाती, तो शहर बदलने की बात कहीं न कहीं सच्ची हो सकती है। लोगों को अपनी सेहत पर ध्यान देना चाहिए, इसके लिए पूरे परिवार का सहयोग जरूरी है

आज ये हमें तो हवा के बारे में बात करते हैं और कल कुछ और, हमारे बच्चों के भविष्य की बात करें। तो हमें सोच-समझकर काम करना चाहिए

कोई घर बदलने की बात कहें, लेकिन पैसे भी कम हैं। मेरे दादाजी ने कभी नहीं सोचा था कि अपना घर बदलना पड़े।
 
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