तिरुपति लड्डू- जानवर की चर्बी, मिलावटी घी से हवाला तक: मंदिर को 250 करोड़ का नुकसान, जगनमोहन के सांसद और मंदिर कमेटी पर सवाल

तिरुपति लड्डू प्रसाद में मिलावटी घी का मुद्दा आंध्र प्रदेश में तेजी से चर्चा में है। इस मामले में अब CBI जांच चल रही है और इस दौरान कई सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि TTD में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी, जिससे करोड़ों रुपयों के इस महाघोटाले का समय रहते पता चल पाता।
 
लड्डू प्रसाद में मिलावटी घी का मुद्दा तो बहुत ही गंभीर है 🤔। अगर TTD में ऐसी व्यवस्था नहीं थी, जिससे पता चल पाता, तो यह सवाल उठता है कि क्या इन दिनों के लोग भूल गए हैं? चोरी, दुर्घटनाएं, घोटाले सब समय रहते नहीं पता चलते। ऐसी स्थितियों में तो कोई अच्छा नेतृत्व नहीं होता। इस मामले में CBI जांच चल रही है, लेकिन यह जांच कितनी पूरी होगी, यह देखना भी रोचक है 🤞
 
तिरुपति लड्डू प्रसाद की बात करते हैं तो यह तो सारे देश में चर्चा में है 🤣, लेकिन जब हम चालाकी और धोखाधड़ी की बात करते हैं तो तिरुपति लड्डू प्रसाद की ऐसी व्यवस्था का सवाल उठना स्वाभाविक है। तीर्थयात्रियों के लिए इतनी अच्छी और मीठी लड्डू तैयार करने का तरीका तो कौन सा जान सकता है? 🤔

लेकिन यहाँ सबसे बड़ा सवाल यह है कि TTD में ऐसी व्यवस्था नहीं थी, जिससे इस महाघोटाले का समय रहते पता चल पाता। मुझे लगता है कि इसके पीछे कुछ बड़े-बड़े नेताओं और अधिकारियों को भी उसका हिस्सा मिल गया होगा। यह तो एक बहुत बड़ा मुद्दा है जिसका समाधान जल्द से जल्द होना चाहिए। 😡
 
[Image of a puzzled face with a thought bubble]

क्या तो तिरुपति लोग तडपने में माहिर हैं? 😂
[Image of a laddu with a big "मिलावटी" stamp on it]

कोई सोचता है कि जांच नहीं होने से सब कुछ छुप जाता है? 🤔
[Image of a blindfolded person with a red "X" marked through it]

इस तरह की घोटालों में देश की छप्पर पूरी हो गई? 😱
[Image of a broken bridge with a red "जहर" label on it]
 
तिरुपति लड्डू प्रसाद में मिलावटी घी का मुद्दा हुआ तो बहुत अजीब लगा, जैसे कि कोई बड़ा खेल खेल रहा था। यहां तक कि CBI भी इस मामले में जांच कर रही है, लेकिन अभी भी कई सवाल साफ नहीं हो पा रहे हैं। सबसे बात तो यह है कि TTD में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी, जिससे इतने बड़े इस खेल का पता नहीं चल पाया। इससे लगता है कि कुछ लोग ऐसा करने की सोच रहे थे, जो उन्होंने कभी सोचा नहीं था। और अब यह सवाल उठता है, कि अगर एक बार ऐसी गड़बड़ी होती, तो कैसे उसे रोका गया?
 
बिल्कुल भी समझ नहीं आ रहा है कि TTD में ऐसी तेजी से गड़बड़ी कैसे हो सकती है। लड्डू प्रसाद में मिलावटी घी का मुद्दा तो एक बड़ा मामला है, लेकिन यह तो समझना मुश्किल है कि इस तरह की गड़बड़ी कैसे हो सकती है। अगर TTD में ऐसी व्यवस्था नहीं थी, जिससे इस महाघोटाले का पता चल पाता, तो इसका मतलब यह होगा कि somewhere में बहुत बड़ा अंधविश्वास हुआ होगा।
 
बिल्कुल तो यह भी सच है कि हमारे देश में बहुत सारी बड़ी-बड़ी चीजें शुरू होने से पहले उनकी योजना और व्यवस्था नहीं होती। यह लड्डू प्रसाद घोटाला तो एक अच्छा उदाहरण है कि हमारे देश में जैसे जैसे लोग धन जमा करते हैं वहां के बावजूद उनकी परवाह नहीं करते।
 
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