थ्री-लेयर सिक्योरिटी में रहने वाला नक्सली हिड़मा कैसे फंसा: मुखबिर से खबर मिली, ग्रेहाउंड फोर्स ने घेरकर मार गिराया; एनकाउंटर की इनसाइड स्टोरी

छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश बॉर्डर पर मरेडुमिल्ली जंगल में 18 नवंबर की सुबह हुए एनकाउंटर में 1 करोड़ के इनामी हिड़मा समेत 6 नक्सली मारे गए।
 
तो यह हाल ही में हुआ होगा, लेकिन मुझे लगता है कि यह बात भी छुपी हुई है कि जंगल में शूटआउट कितना साजिश की तरह लग रहा था। एक जगह पर नक्सलियों का घेरा बनाने वाले लोगों को तीन दिन पहले यही कहीं गोली चलाने की चिट्ठी मिल जाती, और फिर 18 नवंबर की सुबह ही ऐसा घटित हुआ। बहुत अजीब, नाहीं।
 
अगर नक्सली वालों को इतनी दूर तक पहुंचाने के लिए हमें अपनी भूमि को नुकसान नहीं पहुंचाना पड़ता, तो ये सब चीजें नहीं होतीं। उनके मारे जाने से फायदा होगा न कि सरकार, न ही आम आदमी। बस इतना कहूंगा - अगर हम अपने देश को एक नई दिशा देना चाहते हैं तो हमें अपनी भूमि की खपत कम करनी होगी, नहीं तो नक्सली जैसी गलतियाँ होने की कोई बात नहीं।
 
ਕੀ ਸोਚਿਆ ਤੇ ਦੱਸਾ, ਅਜੋਕੇ ਨਕਸਲਵਾਦ ਦੀਆਂ ਗੱਲਾਂ ਬਹੁਤ ਮੌਡੀ ਰਹੀਆਂ, ਪਰ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਪਿੰਡਾਂ 'ਚ ਇਸ ਦੀਆਂ ਗੱਲਾਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ, ਉਥੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਪਾਰਟੀਆਂ 'ਚੋਂ ਲੋਕ ਬਹੁਤ ਦੁਖੀ ਹੋਏ ਹਨ।

ਅਸੀਂ ਇਹ ਵੀ ਗੱਲ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਕਿ ਇਹ ਮਾਰਡਰ ਵੀ ਡਰ-ਪਰੇਸ਼ਾਨ ਪਰਿਵਾਰਾਂ 'ਚ ਬੜਾ ਖੋਲ੍ਹ ਛੱਡ ਗਿਆ ਹੈ।

ਮੈਨੂੰ ਤਾਂ ਇਸ 'ਤੇ ਵਧੁਤਾ ਜਾਣ ਦੀ ਡਿਸ਼ਾ ਨਹੀਂ, ਲੇਕਿਨ ਉਸ ਮਾਰਡਰ 'ਤੇ ਅੱਗੇ ਵਧਣ ਦੇ ਬਾਅਦ ਹੋਏ ਪ੍ਰਭਾਵ 'ਤੇ ਸੋਚਿਆ ਜਾਵੇ।

ਕੁਝ ਲੋਕ ਖੇਡਣ-ਮਨੋਰੰਜਨ ਦੀ ਗੱਲ 'ਚ ਮੂੰਹ ਠੀਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਨ, ਪਰ ਅਸੀਂ ਕੀਤੇ-ਵਿਖੇਤ ਲਈ ਡਾਊਣਜ ਸੱਟ ਮਾਰਦੇ ਹਾਂ।
 
बड़ा खेद है जो घटित हुआ। ये एनकाउंटर तो बहुत बड़ी घटना है। मुझे लगता है कि पुलिस ने सही कदम उठाए हैं। नक्सलवादी समूहों से लड़ना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन अगर हमारी सरकार सही रणनीति बनाती है तो हम उन्हें हरा सकते हैं।

मुझे लगता है कि इनामी जैसे नक्सलवादी व्यक्तियों को सजा मिलनी चाहिए। उनके ऐसे कार्यों ने बहुत से लोगों को प्रभावित किया है। हमें उन्हें सजा दिलानी चाहिए और अपने समाज को सुरक्षित रखना चाहिए।

मैं पुलिस और सरकार की बधाई देता हूं। वे निर्दोष लोगों की जिंदगी बचाएंगे। मुझे उम्मीद है कि ऐसे ही अन्य एनकाउंटर होंगे जहां नक्सलवादियों को सजा मिलेगी। 🚔💪
 
वाह वाह, यह बहुत बड़ी बात है! नक्सली देश को इतना नुकसान नहीं पहुंचा सकते. मुझे लगता है कि पुलिस ने बहुत अच्छी तरह से काम किया और नक्सलियों को पकड़ने में सफल रहे। यह एक अच्छा संदेश है कि सरकार राज्य की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। मुझे यकीन है कि यह घटना देश को और भी सुरक्षित बनाने में मदद करेगी। नमस्ते! 🙌
 
न्यूमनिक्स की दुनिया में बहुत कुछ घट रहा है, लेकिन तभी तो यह जानकारी आ गई कि मरेडुमिल्ली जंगल में हुए एनकाउंटर में न्यूनतम 6 नक्सली समेत इनामी हिड़मा सहित लगभग एक करोड़ के लोग मारे गए 😱। यह तो बहुत ही दुखद खबर है, और मैं केवल इतना कह सकता हूं कि जंगलों की रक्षा करने वाले हमारे जवानों की बहादुरी की बात करना थोड़ा कम है। उनकी शहादत को हम सभी के दिल में बसा लेना चाहिए।
 
बुरी बात हुई है यह... नक्सली जैसे लोग जंगल में घूमते समय मेरे भाई-बहनों को पागलपन नहीं करना चाहिए... सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत है, लेकिन उनके लिए भी राहत की जरूरत है... परिवार की देखभाल, खान-पान, शिक्षा, रोजगार... ये सब मिलकर नक्सली बनने की जरूरत नहीं है।
 
जानकर खुशी हुई मुझे ये जानकारी 🤩, लेकिन यह बहुत दुःखनाक भी है कि इतने निर्दोषों पर हमला किया गया। मरेडुमिल्ली जंगल में सुरक्षा बढ़ाना बेहद जरूरी है, ताकि ऐसी घटनाएं कभी नहीं हो सकें। नक्सली समूहों के खिलाफ हमेशा से लड़ना चाहिए, लेकिन इस तरह की बहुत बड़ी गोलीबारी में शामिल न होना चाहिए। पुलिस और सेना को अपनी ताकत बढ़ाकर नक्सलियों को जवाब देने में सक्षम होना चाहिए, लेकिन इसके लिए हमें आर्थिक सहायता भी देनी चाहिए ताकि उनकी सुरक्षा और शिक्षा में सुधार हो सके।
 
બહુ કષ્ટનો અનેક છે. એક પાર્ટીમાં સૌ શાનદાર વધું, જ્યાં બીજી પક્ષએ અચાનક હિલાળા મારી દીધા.

તે છે, ઝઘડા બન્યાં, એવા થઈને 1000નો મુલ્યની કિરણ અચાનક દેશના સૌ ઉપર વહાળી ગઈ. એ લાંબો, આક્રમણ અચાનક શાંતિને છોડી દીધી.
 
पहले तो यह देखकर आश्चर्यचकित हुआ कि पुलिस और सेना ने इतनी जानकारी इकट्ठा कर ली, फिर भी नक्सलियों को पकड़ने में इतनी देर लगी। मुझे लगता है कि नक्सली आंदोलन को समझने के लिए हमें अपनी इतिहास पाठbooks में पढ़ी गई जानकारी से आगे बढ़ने की जरूरत है, ताकि हम इनमें शामिल लोगों की समस्याओं को समझ सकें।
 
नक्सली आंदोलन की जिंदगी तो दिल को छू जाती है... मरेडुमिल्ली जंगल में हुए एनकाउंटर में नक्सली सेना के अंदर से भेजी गई 6 व्यक्तियों की जान गंवाई है, और उनमें केवल 1 करोड़ के इनामी हिड़मा हिदायतगाह में उनका मुंह नहीं देखने को मिला।

आज की युवावस्था नक्सली आंदोलन के लिए बहुत संवेदनशील है। युवाओं ने अपने खून, अपने परिवारों को और अपने समुदायों को यहां तक कि मृत्यु की ताकत दिखाई है।

जंगल जानवरों के समान नक्सलियों का भी व्यवहार कैसे किया जाता है?
 
जंगल में विरोध करने वाले लोग, वो भी जो अपने अधिकारों के नाम पर लड़ते हैं... उनके पास संघर्ष का एक नया आयाम देखना पड़ा है। 18 नवंबर की सुबह मेरेडुमिल्ली जंगल में ऐसी घटनाएं कभी नहीं सोचा था, यह तो किसान आंदोलन, या किसी अन्य आंदोलन के बाद से एक नई पीढ़ी की संघर्षों की तरह है। जब हमारे पास इतनी भीड़बूजी और जंगल में शांति की जगह लड़ाई की हिम्मत हो जाती है... तो यह सोचने लायक है कि क्या हम अपने देश की समस्याओं के साथ खेल रहे हैं या कुछ और?

कोई भी ऐसी बात नहीं कह रहा हूँ जिससे किसी को गुस्सा आ जाए, बस यह एक सवाल था।
 
पहले तो यह बात समझ में नहीं आई कि मरेडुमिल्ली जंगल में एनकाउंटर तो बस एक नजारा है, लेकिन लगता है कि यहाँ पर नक्सलियों के बारे में फाइनल रिपोर्ट आ गई। मुझे लगता है कि यह 18 नवंबर की बात तो सही है और यानी 1000 करोड़ इनामी हिडमा समेत 6 नक्सली मारे गए तो फिर भी कुछ सवाल उठते हैं। जैसे कि नक्सलियों की संख्या कितनी थी, उनके नेताओं की पहचान कैसे हुई, और यह सब कैसे संभव हुआ?

और फिर याद आता है कि चंद्रशेखर आज़ाद को किसने मारा था, लेकिन उसके बाद नक्सलियों ने अपनी संख्या बढ़ाई तो अब यहाँ पर 18 नक्सली मारे गए हैं। इसका मतलब तो यह नहीं है कि नक्सलियों की शक्ति पूरी तरह से खत्म ह गई है, बल्कि हमें बस उन्हें और भी मजबूत देखना चाहिए।

क्या यह तो फाइनल रिपोर्ट है? मुझे लगता है कि इसके बाद और जानकारी आ सकती है।
 
बस यह तो स्वागत योग्य है कि भारत की सुरक्षा किसी भी बात पर पूरी तरह नियंत्रित हो गई है। नक्सलियों को मारने वाले पुलिस का रिकॉर्ड देखना मुझे बहुत पसंद नहीं है 🤔। लेकिन अगर यह सोचकर कि नक्सलियों ने देश की शांति और सुरक्षा पर खतरा बनाए रखा है, तो फिर उनकी मौत स्वीकार्य है। जानबूझकर पुलिस की गलती या राजनीतिक दबाव के कारण नक्सलियों को मारना उचित नहीं है ✖️
 
नाक में देखा तो ये बहुत बड़ा झटका है! 18 नवंबर को मरेडुमिल्ली जंगल में ऐसा सड़क परिसर मिलना नहीं था कल, न ही कल से। मुझे लगा कि हमारे देश की पुलिस और सेना को नक्सलवादियों से लड़ने में बहुत कठिनाई होती है, लेकिन यह तो बिल्कुल भी नहीं थी। जानबूझकर या अनजाने में इन नक्सलियों को मारा गया है। मुझे लगता है कि सरकार और पुलिस ने अपनी रणनीति बदलनी चाहिए।

अगर हमारे देश की पुलिस और सेना को नक्सलवादियों के खिलाफ लड़ने के लिए सही तरीके से तैयारी नहीं की गई, तो यहाँ क्या हुआ? 1 करोड़ के इनामी हिडमा समेत 6 नक्सली मारे गए। यह बहुत बड़ा नुकसान है।
 
ਮेरੇ ਦिनों ਵਿੱਚ ਕੀ ਹੋਇਆ? ਜੰਗਲ ਵਿੱਚ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਛਤਤੀਸਘੜ ਦਾ ਜੰਗਲੀ ਜੀਵ ਭੀ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰ ਹੈ।

ਬੁੱਧਵਾਰ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਗਰਲਫ੍ਰੈ memories aati hain... mara dushmani kaafi hai, lekin kabhi-kabhi aage badhne ki zarurat hoti hai.

ਮੈਨੂੰ ਉਸ ਪੜਾਅ 'ਚ ਮੁੱਖ ਦੇਸ਼ ਵੀ ਹੋਣਾ चाहੀਏ , kyonki 🤔 'ਕਿ ਅਜਿਹੇ ਘਟਨਾਵਾਂ ਦੇ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਭਰੋਸਾ ਮਿਲਣਾ, 🤝 'ਕਿਉਂ ਨਹੀਂ?

ਪਰ ਅਜਿਹੇ ਵੇਲੇ 'ਤੇ ਮੈਨੂੰ ਥੋੜ੍ਹਾ ਸਮਾ' (ਆਈ ਕੁਝ) , kisi ek bade dushman ko haraane ke liye...
 
बड़े बड़े देश को लेकर बोलते समय हमें कुछ विचार करना चाहिए। एनकाउंटर में जिन 6 नक्सलियों को मार डाला, उनके पीछे क्या कारण था? किसी को भी ऐसा होने का मौका देने से पहले हमें समझना चाहिए कि वे कहां से आए हैं और वहां क्यों गए। नक्सलवाद जैसी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा सकता है अगर हम उनके बारे में न समझें।
 
😒 ये क्या कर रहे हैं लोग? एक हफ्ते पहले से ही मरेडुमिल्ली जंगल में नक्सलियों के सामने चलने वाले जवानों ने शांति बनाए रखने की कोशिश की, तो अब 1 करोड़ रुपये का इनामी भी मारा गया! इसके लिए देश भर में गर्व होना चाहिए, लेकिन लगता है कि हम अपने जवानों की जान बाजी में लगाते हैं और फिर उन्हें शहीदों की सूची में रख देते हैं। 🤦‍♂️
नक्सलियों को खत्म करने के लिए हमें अपने जवानों को सही उपकरण, अच्छा प्रशिक्षण और पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए। अगर हम ऐसा करते हैं, तो नक्सलियों को खत्म करने में हम सफल हो सकते हैं। लेकिन यहाँ हमें अपने जवानों की जान बचाने पर भी ध्यान देना चाहिए। 💡
 
बड़ा बुरा हुआ ये! क्यों ऐसे जंगल में खेलने को मिल गया? नक्सलियों को इतनी सुविधाएं देनी चाहिए, ना तो जंगल में खट्टे-मeerते पानी पीने को मिल जाए, ना ही खाली हाथों से आग लगाने की धमकी।

और ये तो लोग कहेंगे, "देश की सुरक्षा है"। बोल लो! यह तो देश की सुरक्षा का अर्थ है अपने बच्चों को जंगल में खेलने की छुट्टी, न कि खतरे में।

मैं समझता हूँ, नक्सलियों को रोकने की जरूरत है, लेकिन ऐसे तरीकों से नहीं। तो फिर भी सरकार दोषी है क्या?
 
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