TOP News: दिल्ली समेत मैदानों में बारिश से बढ़ेगी ठंड, UGC के नए नियमों पर 'सुप्रीम' रोक; चांदी चार लाख के पार

उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों पर गैर सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगी है। यमुनोत्री, बदरी-केदार और गंगोत्री में आम प्रवेश फिलहाल बंद रहेगा।

बादलों की आवर्ती छाया में दिल्ली समेत मैदानों में ठंड बढ़ सकती है। साथ ही, पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और तेज हवाएं से प्रभावित होने की आशंका है।

पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सीधी फ्लाइटें 14 साल बाद फिर से शुरू हुई हैं।

चांदी की कीमतों में बड़ा इजाफा हुआ है। चांदी ₹19,500 प्रति किलो पर पहुंच गई है, जबकि सोना ₹1.83 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है।
 
मैंने सुना है कि उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों पर प्रवेश रोक दिया गया है। तो अब हमें कहीं भी भगवान को प्राप्त नहीं कर सकते है, लेकिन चांदी को घर तक ले जाने में फंस गए! 🤑👀

मुझे लगता है कि यह एक अच्छा अवसर है कि हम अपने पर्यटन से पैसे कमाएं, लेकिन खुद यमुनोत्री और बदरी-केदार जैसे जगहों पर जाने में फंस गए! 😂

चांदी की कीमत बढ़ गई है, तो अब हमें अपने सोने की खरीदारी करने का इंतज़ाम कर लेना चाहिए। शायद हमें दिल्ली में ठंड के लिए एक गर्म कपड़ा पहनना चाहिए! ☕😅
 
नरम तUNDRA में भी पावर बैंक की जरूरत है! चांदी की कीमतों में इतना इजाफा हुआ है, मुझे लगता है कि हमारे देश में हर व्यक्ति को अपना सोना तय करना चाहिए। लेकिन फ्लाइटें शुरू होने से पहले, क्या हमारी हवाई परिस्थितियां इतनी सुधर गईं? उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों पर प्रवेश पर रोक लगने से तो कुछ नहीं होता, लेकिन यह एक अच्छा अवसर है कि हम अपने यात्रा इंस्टाग्राम्स पर और भी खूबसूरत तस्वीरें खींच सकें।
 
अरे बhai, ये तो उत्तराखंड की जगह- जगह छोटी सी समस्या है🤷‍♂️। धार्मिक स्थलों पर प्रवेश रोकने की बात ही, लेकिन यहाँ के लोग तो सबकुछ समझदार हैं 🙏, समझेंगे कि कौन से लोग किस स्थान को जाना चाहते हैं। और फिर भी, पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और तेज हवाएं आ सकती हैं, तो हम दिल्ली में ठंड की बात कर रहे हैं? 🤣

और पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच फ्लाइटें शुरू करने से तो कोई अच्छा नहीं होगा, लेकिन चांदी की कीमतों में इतना बड़ा इजाफा? ₹19,500 प्रति किलो?! मैं तो सोचता था कि यह तो कल्पना की बात है 💸
 
अरे वाह! उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों पर गैर सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगना तो बहुत दुखद बात है 🤕। क्या ऐसी रुकावटें ने कभी फैलाएंगे भाई-भाई के अहसान? और लोग कहाँ जा सकते थे वहीं पर मंदिरों से पवित्र पानी पीने के लिए? 🤔

और चांदी की कीमतें बढ़ जानी तो बिल्कुल नहीं सही है! ना कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था में ऐसी चीजें फंसनी चाहिए। कुछ लोग अपने पैसों को सोने और चांदी में लगाते हैं तो क्या? 🤑
 
એવો રહેવું, પ્રાકૃતિક નૈશાનમુખી લોકો સાચવીએ અને ધર્મ, જાતિ અથવા ભાષાનું પદ કરીને એક-અખબાર છે...આ ઉઘાડણ સમજવા લો, તેનું મહત્વ શોધીએ.
 
🌫️ मुझे लगता है कि उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों पर गैर सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाना तो थोड़ा ज्यादा ही मंदिरों जैसा लग रहा है। 🤔

चांदी की कीमतें बढ़ गई हैं! 19,500 रुपये प्रति किलो... यह तो बहुत अधिक है! 💸 सोने की कीमत भी बढ़ गई है, लेकिन वह तो थोड़ी कम है। 🤑

पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच फ्लाइटें शुरू हुई हैं... यह तो अच्छा समाचार है! 😊 हमें दुनिया भर में जुड़ने का मौका मिलता है।
 
क्या वास्तव में तय नहीं कर सकते यमुनोत्री जैसे धार्मिक स्थलों को भी स्थानीय भारतीयता की चिन्ह बना देना? 🤔 तो गैर सनातनियों को प्रवेश पर रोक लगाना और फिर बाद में खुलवाना जैसे ही बहुत असमंजस पैदा कर रहा है। क्या हम अपने ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित नहीं कर सकते? 🏯

लेकिन जब ऐसी बड़ी बातें होती हैं तो विरोध और चर्चा बन जाती है। पाकिस्तान और बांग्लादेश में फ्लाइटें शुरू करना एक अच्छा कदम है, लेकिन हमें यह भी सोचते रहना चाहिए कि इसके निजी व्यक्तिगत द्वारों से पर्यावरण पर कैसा प्रभाव पड़ेगा। प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे हमें बहुत बोझिल लग रहे हैं। 🌳
 
ये तो एक बड़ी बात है कि उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों पर किसी भी धर्म के लोगों के प्रवेश पर रोक लग दी गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपने धर्म और सम्प्रदाय को छोड़कर दूसरे धर्मों के प्रति सहानुभूति और समझदारी से आगे बढ़ सकते हैं या नहीं। हमें अपने आसपास के लोगों को एक-दूसरे की भलाई के लिए खोलकर देखना चाहिए, न कि उनके धर्म या सम्प्रदाय से।
 
ये तो उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों पर गैर सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगने की बात कर रहे हैं... मुझे लगता है कि यह बिल्कुल सही निर्णय होगा, लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि सरकार से कुछ और पूछना चाहिए, जैसे कि क्या ये स्थलों पर सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती थी। और बादलों की आवर्ती छाया में ठंड बढ़ सकती है, तो शायद हमें अपने लैपटॉप और बुक्स को ढेर सारे कपड़ों के साथ रखना चाहिए, जैसा कि हम रात्रि गतिविधियों के दौरान करते हैं...
 
अरे दोस्तों, तो यमुनोत्री जैसे धार्मिक स्थलों पर केवल सनातनियों को ही प्रवेश मिलना स्वाभाविक नहीं लगता। हमें अपने इस देश में सभी धर्मों और समुदायों का सम्मान करना चाहिए। फिलहाल यह निर्णय लागू होने पर पहले तो कुछ लोग खुश होंगे, लेकिन धीरे-धीरे इस बात पर विचार करना चाहिए कि हमारी देश की सांस्कृतिक विविधता कैसे प्रभावित होती है।
 
अरे ये तो बुराई है! उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों पर प्रवेश की इतनी जिम्मेदारी लेने की जरूरत नहीं थी। इससे किसान, व्यापारी, और यात्रियों को नुकसान होगा। फिलहाल मैं तो यहां तो घूमना चाहता था, अब यह सोचता हूं घर पर ही बैठ कर इंटरनेट पर देखूंगा। 🤔😒
 
अरे, ये तो ठीक है कि उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों पर प्रवेश पर रोक लगी है, लेकिन हमें जानने की जरूरत है कि यह तो कौन से लोगों द्वारा लगाई गई रोक है? और इसके पीछे क्या तर्क है? मैंने कोई जानकारी नहीं मिली है कि यह तो किसी विशेष धर्म या समुदाय से संबंधित मामला नहीं है, फिर भी ऐसी बातें कहकर पूरा राज्य बंद कर दिया गया है? मैंने पढ़ा है कि यह तो एक छोटी सी घटना होने पर पूरा राज्य बंद हो जाना तो थोड़ा लालचीला है।
 
अरे दोस्त, यमुनोत्री, बदरी-केदार और गंगोत्री जैसे धार्मिक स्थलों पर किसी भी धर्म के लोगों को प्रवेश करने की रोक लगना तो है या हमारे देश की बहुलता को दर्शाने की कोशिश? ठीक है, मैं समझ गया, यह स्वास्थ्य और सुरक्षा की बात है। लेकिन इसके लिए पर्यटक स्थलों को पूरी तरह से बंद करने की जरूरत नहीं होती।

और दिल्ली जैसे शहर में ठंड बढ़ने की बात तो सच है, लेकिन यह धीरे-धीरे होनी चाहिए, न कि एक दिन अचानक। और पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सीधी फ्लाइटें शुरू होना एक अच्छी बात है। लेकिन चांदी की कीमतें तो सचमुच बहुत बढ़ गई हैं। मुझे लगता है कि हमारे पैसों को पहले अपने घर के लोगों की जरूरतों पर खर्च करना चाहिए, न कि विदेशियों को।
 
बात तो यही है 🤔, यमुनोत्री, बदरी-केदार और गंगोत्री जैसे धार्मिक स्थलों पर किसी भी धर्म के लोगों के प्रवेश पर रोक लगना मुश्किल लगता है। यह तो हमारी सांस्कृतिक विरासत को कैसे बचाएं ? 🙏 साथ ही, दिल्ली और अन्य जगहों पर बादलों की आवर्ती छाया में ठंड बढ़ने की चिंता भी है। लेकिन यह तो हमारे पास वैज्ञानिक उपकरण हैं जो हमें इसकी जानकारी देते हैं। #प्राकृतिकविनाश #धार्मिकस्थल #समृद्धि
 
क्या यमुनोत्री, बदरी-केदार और गंगोत्री जैसे धार्मिक स्थलों में भी ऐसी बातें हो रही हैं? तो फिर क्यों? पूरे देश में ठंड बढ़ रही है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और तेज हवाएं आ रही हैं। यह तो आम आदमी को बुरा लगता है। और अब पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच फ्लाइटें फिर से शुरू हुई हैं? तो फिर क्यों नहीं थीं पहले? चांदी की कीमतें बढ़ गई हैं, लेकिन कौन सा आदमी इसका असर महसूस करेगा? 🤑
 
अरे दोस्त, यमुनोत्री जैसे धार्मिक स्थलों पर प्रवेश पर रोक लगने की बात सुनकर मुझे थोड़ा अजीब लगता है... क्या हमें अपने धर्म और संस्कृति को समझने के लिए इन जगहों पर जाने की जरूरत नहीं? 🤔

लेकिन फिर भी, तापमान में बदलाव और पाकिस्तान-बांग्लादेश की दोस्ती की खुशखेल पर ध्यान देना चाहिए... सीधी फ्लाइटें शुरू होने से हमारे बीचों-बीच लोगों को मिलने की संभावना बढ़ गई है! 🛫

और चांदी की कीमतें बढ़ जाने की बात तो सचमुच आश्चर्यजनक है... मुझे लगता है कि हमें अपनी बचतों में थोड़ा सा इजाफा करना चाहिए, फिर कुछ खरीदने का मौका मिल जाएगा! 😊
 
मुझे लगता है कि उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों पर गैर सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने की बात तो हो सकती है, लेकिन फिर भी यह नहीं होता, जैसे की कितने लोग इन स्थलों में जाते हैं और उन्हें इतना महत्व दिया जाता है! 🤔 तो शायद यह एक अच्छा निर्णय था क्या?

और पाकिस्तान और बांग्लादेश की दोस्ती पर ध्यान देना चाहिए, खासकर जब दोनों देशों के बीच सीधी फ्लाइटें फिर से शुरू हुई हैं! 🛫️ यह भारतीय अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा पर बहुत बड़ा प्रभाव डाल सकती है।

और चांदी की कीमतें तो बढ़ गई ही, लेकिन फिर भी लोग चांदी के सोने की तरह दीवाने नहीं होते! 🤑 ₹19,500 प्रति किलो की कीमत पर चांदी खरीदना तो मुश्किल है, लेकिन फिर भी कुछ लोग इसके लिए तैयार होंगे!
 
मैंने कभी नहीं सोचा था कि उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों पर खाद्य और पेय पदार्थ बेचने वाले भाई-बहनें और फोटोग्राफर लोगों को फिर से बहिष्कार कर दिया जाएगा। यह तो बहुत ही गंभीर मुद्दा है। मैं समझता हूँ कि धार्मिक स्थलों पर शांति बनाए रखना महत्वपूर्ण है, लेकिन इस तरह की नीतियाँ लागू करने से पहले हमें यह सोचना चाहिए कि इससे कैसे प्रभावित होगा। और फिर भी, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच फ्लाइटें शुरू होने की बात तो अच्छी है। लेकिन चांदी की कीमतें बढ़ना मुझे थोड़ा चिंतित कर देता है। मैंने अपनी खजाना कमाई की याद नहीं रखी हूँ, परantu अब तो पैसों का सोचकर नहीं रह सकता।
 
क्या ये धार्मिक स्थलों पर जाने की बात में कोई समझ है? किस तो किसने विरोध किया, ठीक है, लेकिन ऐसे फैसले लेने का तरीका सही नहीं है। हमें देशभर में एकजुट रहना चाहिए, न कि अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों को बांट-मिलावट करना।
 
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