भारत और रूस की 23वीं भारत-रूस समिट हाल ही में हुई, जब दुनिया तनाव चरम पर थी। अमेरिका ने भारत पर रूस से कच्चे तेल खरीदने को रोकने का दबाव डाला, जिसके बाद भारत ने इसका बहुत विरोध किया। लेकिन पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की बैठक से यह स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच रिश्ते गहरे हैं और उन्हें किसी दबाव से नहीं झुकने वाले।
पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने इस समिट का इस्तेमाल ऊर्जा क्षेत्र के दीर्घकालिक रणनीतिक महत्व को उजागर करने के लिए किया। अमेरिका और यूरोप के प्रतिबंधों ने भुगतान और रसद चैनलों को जटिल बना दिया, लेकिन इन वजहों से भारत की जरूरतों या उन्हें पूरा करने की रूस की इच्छा नहीं बदली।
पीएम मोदी ने अपने साथ बातचीत के बाद साझा बयान में कहा था कि रूस बढ़ती हुई भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ईंधन की बिना किसी रोक-टोक आपूर्ति जारी रखेगा। रूस क्षेत्रफल के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा देश है, लेकिन उसकी आबादी सिर्फ 15 करोड़ है। यही वजह है कि रूस को भारतीय कामगारों की जरूरत है।
भारत-रूस के बीच स्पेस सेक्टर को लेकर भी समझौता हुआ है, जिसके तहत दोनों देश अंतरिक्ष में इंसानों को भेजने के मिशन पर साथ काम करेंगे। नेविगेशन, डीप स्पेस और रॉकेट इंजन के विकास में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा। आतंकवाद के खिलाफ भी दोनों देशों के बीच सहमति बनी है और राष्ट्रपति पुतिन ने कहा है कि वो आतंकी फंडिंग को रोकने और उन पर प्रतिबंध लगाने के लिए भारत के साथ मिल कर काम करेंगे।
इसके अलावा, महत्वपूर्ण फैसलों में यह एक ये है कि भारत और रूस के बीच इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर बनाया जाएगा। इस कॉरिडोर से दोनों देश समय और पैसे की बचत करके एक दूसरे के साथ व्यापार कर सकेंगे।
पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने इस समिट का इस्तेमाल ऊर्जा क्षेत्र के दीर्घकालिक रणनीतिक महत्व को उजागर करने के लिए किया। अमेरिका और यूरोप के प्रतिबंधों ने भुगतान और रसद चैनलों को जटिल बना दिया, लेकिन इन वजहों से भारत की जरूरतों या उन्हें पूरा करने की रूस की इच्छा नहीं बदली।
पीएम मोदी ने अपने साथ बातचीत के बाद साझा बयान में कहा था कि रूस बढ़ती हुई भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ईंधन की बिना किसी रोक-टोक आपूर्ति जारी रखेगा। रूस क्षेत्रफल के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा देश है, लेकिन उसकी आबादी सिर्फ 15 करोड़ है। यही वजह है कि रूस को भारतीय कामगारों की जरूरत है।
भारत-रूस के बीच स्पेस सेक्टर को लेकर भी समझौता हुआ है, जिसके तहत दोनों देश अंतरिक्ष में इंसानों को भेजने के मिशन पर साथ काम करेंगे। नेविगेशन, डीप स्पेस और रॉकेट इंजन के विकास में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा। आतंकवाद के खिलाफ भी दोनों देशों के बीच सहमति बनी है और राष्ट्रपति पुतिन ने कहा है कि वो आतंकी फंडिंग को रोकने और उन पर प्रतिबंध लगाने के लिए भारत के साथ मिल कर काम करेंगे।
इसके अलावा, महत्वपूर्ण फैसलों में यह एक ये है कि भारत और रूस के बीच इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर बनाया जाएगा। इस कॉरिडोर से दोनों देश समय और पैसे की बचत करके एक दूसरे के साथ व्यापार कर सकेंगे।